मादक पदार्थ तस्करी और अवैध गतिविधियों का गठजोड़
प्रश्न
संसार के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उगाने वाले राज्यों से भारत की निकटता ने भारत की आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। नशीली दवाओं के अवैध व्यापार एवं बंदूक बेचने, गुपचुप धन विदेश भेजने और मानव तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों के बीच कड़ियों को स्पष्ट कीजिए। इन गतिविधियों को रोकने के लिए क्या-क्या प्रतिरोधी उपाय किए जाने चाहिए?
आदर्श उत्तर
अफगानिस्तान से जुड़े स्वर्णिम अर्द्धचंद्र और म्यांमार से जुड़े स्वर्णिम त्रिभुज के तस्करी नेटवर्क उसकी सीमाओं तथा समुद्री मार्गों पर दबाव डालते हैं। मादक पदार्थ तस्करी अन्य अपराधों को वित्त, संपर्क और परिवहन-सुविधा उपलब्ध कराती है।
अवैध गतिविधियों से संबंध
- हथियार तस्करी: मादक पदार्थों से प्राप्त लाभ हथियार खरीद और हिंसक संगठनों के संचालन में लग सकता है। साझा मार्ग, बिचौलिये और भ्रष्ट संरक्षण दोनों कारोबारों की लागत तथा जोखिम घटाते हैं।
- धन-शोधन: नकद आय हवाला, मुखौटा कंपनियों और व्यापार-आधारित तरीकों से वैध अर्थव्यवस्था में प्रवेश कर सकती है। इससे अपराधी संपत्ति छिपती है और अगली तस्करी को पूँजी मिलती है।
- मानव तस्करी: कमजोर व्यक्तियों को वाहक बनाया जा सकता है। शोषण, ऋण और नशे की निर्भरता से अपराधी नियंत्रण बना रहता है। नेटवर्क दस्तावेज, सीमापार संपर्क तथा परिवहन-सुविधाएँ साझा कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: यह गठजोड़ आतंक-वित्तपोषण, भ्रष्टाचार और सीमावर्ती समुदायों में राज्य के प्रति अविश्वास को बढ़ा सकता है। हालांकि प्रत्येक नशीले पदार्थ का मामला स्वतः आतंकवाद से जुड़ा नहीं होता।
प्रतिरोधक उपाय
सीमा निगरानी और समुद्री जाँच के साथ वित्तीय जाँच अनिवार्य हो। स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पुलिस, सीमा शुल्क, तटरक्षक और धन-शोधन जाँच एजेंसियाँ संयुक्त खुफिया विश्लेषण करें। अग्रदूत रसायनों की निगरानी तथा अपराध-आय की विधिसम्मत जब्ती से नेटवर्क की आर्थिक क्षमता घटाई जाए।
पड़ोसी देशों के साथ सूचना-साझेदारी, प्रत्यर्पण और कानूनी सहायता बढ़े। साथ ही पीड़ित संरक्षण, उपचार और सीमावर्ती वैकल्पिक आजीविका जरूरी हैं। नीति की सफलता केवल बरामदगी से नहीं, वित्तीय नेटवर्क टूटने और समुदायों की सुरक्षा बढ़ने से मापी जानी चाहिए।