एशियाई शेर: संरक्षण सफलता और भौगोलिक जोखिम
बढ़ती शेर आबादी को संरक्षण सफलता मानते हुए भी महामारी और आपदा-जोखिम के कारण भौगोलिक विविधीकरण की आवश्यकता।
प्रश्न
“एकल भौगोलिक क्षेत्र में संकटग्रस्त प्रजाति का अत्यधिक संकेंद्रण संरक्षण सफलता और पारिस्थितिक जोखिम—दोनों है।” बरदा में एशियाई शेरों के विस्तार के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
प्रश्न की मांग
- संख्या-वृद्धि को उपलब्धि और भौगोलिक संकेंद्रण को जोखिम—दोनों रूपों में दिखाना है।
- बरदा को जोखिम-विविधीकरण तथा व्यापक परिदृश्य संरक्षण से जोड़ना है।
आदर्श उत्तर
भूमिका: गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या 2025 में 891 तक पहुँचना दीर्घकालीन संरक्षण की उल्लेखनीय उपलब्धि है। किंतु अधिकांश आबादी का एक ही व्यापक सौराष्ट्र परिदृश्य में रहना पारिस्थितिक जोखिम भी पैदा करता है।
जोखिम: महामारी, वनाग्नि, चक्रवात, शिकार-आधार में गिरावट या किसी बड़े क्षेत्रीय संकट का प्रभाव एक साथ बड़ी आबादी पर पड़ सकता है। इसलिए केवल संख्या बढ़ना प्रजाति-सुरक्षा का पर्याप्त संकेतक नहीं है।
बरदा का महत्व: बरदा वन्यजीव अभयारण्य में 17 शेरों की प्रजननशील उप-आबादी का प्राकृतिक विस्तार गिर परिदृश्य के भीतर जोखिम को कुछ हद तक वितरित करता है। यह नए आवास, गलियारों और शिकार-आधार की रक्षा का महत्व भी दर्शाता है।
आगे की राह: वन्यजीव स्वास्थ्य निगरानी, आवास-संपर्क, मानव–वन्यजीव सहअस्तित्व और वैज्ञानिक रूप से उपयुक्त स्वतंत्र आबादियों की दीर्घकालीन रणनीति आवश्यक है।
निष्कर्ष: वास्तविक संरक्षण सफलता संख्या-वृद्धि के साथ भौगोलिक और आनुवंशिक लचीलापन भी सुनिश्चित करती है।
मूल्यवर्धन
अद्यतन तथ्य: 2025 गुजरात आकलन—891 एशियाई शेर; बरदा में 17 शेर (6 वयस्क, 11 शावक)।