बहुआयामी गरीबी: उपलब्धि से गुणवत्तापूर्ण समावेशन तक
राष्ट्रीय MPI के आँकड़ों को आय, सार्वजनिक सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और क्षेत्रीय असमानता से जोड़ने वाला 10-अंकीय उत्तर।
प्रश्न
भारत में बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय कमी के बावजूद गरीबी उन्मूलन की चुनौती समाप्त नहीं हुई है। उपलब्धियों और शेष चुनौतियों का परीक्षण करते हुए आगे की राह सुझाइए।
प्रश्न की मांग
- दोनों पक्षों को संक्षेप में संतुलित ढंग से रखना।
- समस्या के कारण और नीतिगत समाधान को सीधे प्रश्न से जोड़ना।
आदर्श उत्तर
भारत में बहुआयामी गरीबी में कमी विकास-नीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन-स्तर की 12 वंचनाओं को मापा जाता है; स्वच्छता, बिजली, बैंकिंग, आवास और बुनियादी सेवाओं के विस्तार ने गरीबी घटाने में योगदान दिया है।
फिर भी चुनौती समाप्त नहीं हुई। अनौपचारिक रोजगार, आय-अस्थिरता, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य-शिक्षा की असमान पहुँच, क्षेत्रीय विषमता, शहरी आवास संकट और जलवायु-जोखिम परिवारों को पुनः गरीबी में धकेल सकते हैं। केवल किसी सुविधा का उपलब्ध होना उसके गुणवत्तापूर्ण उपयोग की गारंटी नहीं है।
अतः आगे की नीति में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के साथ सार्वभौमिक गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाएँ, पोषण, कौशल और स्थानीय रोजगार, शहरी किराये/आवास सहायता, पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा तथा जलवायु-सहनशील आजीविका को जोड़ा जाना चाहिए।
निष्कर्ष: गरीबी उन्मूलन का अगला चरण “वंचना की संख्या घटाने” से आगे बढ़कर स्थिर आय, गरिमापूर्ण जीवन और अवसरों की समानता सुनिश्चित करना होना चाहिए।
मूल्यवर्धन
उत्तर में लिखें: राष्ट्रीय MPI = स्वास्थ्य + शिक्षा + जीवन स्तर; 12 संकेतक; “गरीबी” को आय से आगे बहुआयामी वंचना के रूप में परिभाषित करें।