MSP, खाद्य सुरक्षा और संधारणीय फसल चक्र
MSP के लाभ और पारिस्थितिक लागत—दोनों को संतुलित रखते हुए समाधान-केंद्रित 10-अंकीय उत्तर।
प्रश्न
“न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली ने भारत को खाद्य सुरक्षा तो प्रदान की है, लेकिन इसने फसल चक्र को विकृत कर पर्यावरणीय संकट भी पैदा किया है।” इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और कृषि को संधारणीय बनाने के उपाय सुझाइए।
प्रश्न की मांग
- दोनों पक्षों को संक्षेप में संतुलित ढंग से रखना।
- समस्या के कारण और नीतिगत समाधान को सीधे प्रश्न से जोड़ना।
आदर्श उत्तर
MSP और सार्वजनिक खरीद ने हरित क्रांति के बाद किसानों को मूल्य-सुरक्षा दी, गेहूँ-धान उत्पादन बढ़ाया और PDS के लिए पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया। इस दृष्टि से यह भारत की खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार रहा है।
परंतु खरीद का वास्तविक लाभ कुछ फसलों और राज्यों में केंद्रित रहने से गेहूँ-धान प्रधान चक्र को प्रोत्साहन मिला। परिणामतः पंजाब-हरियाणा जैसे क्षेत्रों में भूजल दोहन, मृदा-पोषक असंतुलन, पराली और एकल फसल पर निर्भरता बढ़ी। MSP घोषित होने मात्र से दलहन, तिलहन और मोटे अनाज आकर्षक नहीं बनते, जब तक विश्वसनीय खरीद और बाजार उपलब्ध न हों।
समाधान के लिए दलहन-तिलहन-मोटे अनाज की प्रभावी खरीद, क्षेत्र-विशिष्ट फसल योजना, सूक्ष्म सिंचाई, Price Deficiency Payment, प्रसंस्करण व भंडारण, तथा PDS/पोषण योजनाओं में विविध अनाजों की मांग बढ़ानी चाहिए।
निष्कर्ष: MSP को समाप्त करने के बजाय उसे फसल विविधीकरण और संसाधन-संरक्षण से जोड़ना अधिक उपयुक्त है।
मूल्यवर्धन
तथ्य: रबी विपणन सत्र 2027–28 में गेहूँ MSP ₹2,610/क्विंटल है। 1.5 गुना लागत नीति का आधार A2+FL है, C2 नहीं।