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कृषि मूल्य नीति • रबी फसलें • GS-III

रबी MSP 2027–28: नई कीमतें, CACP, CCEA और फसल विविधीकरण

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इस विषय में एक जरूरी तिथि-सुधार है: रबी विपणन सीजन 2027–28 के लिए MSP की मंजूरी अक्टूबर मध्य में लंबित नहीं थी। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) इसे 30 सितंबर 2026 को मंजूर कर चुकी थी। इसलिए परीक्षा के लिए अब वास्तविक स्वीकृत दरों और उनके नीति-अर्थ को पढ़ना चाहिए।

17 अक्टूबर 2026

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 सितंबर 2026 को विपणन सीजन 2027–28 के लिए सभी अधिदिष्ट रबी फसलों की MSP बढ़ाने को मंजूरी दी। सबसे बड़ी पूर्ण वृद्धि कुसुम में ₹675 प्रति क्विंटल और उसके बाद सरसों में ₹413 प्रति क्विंटल की रही।

रबी विपणन सीजन 2027–28 की स्वीकृत MSP

फसलMSP (₹/क्विंटल)उत्पादन लागत* (₹)लागत पर अपेक्षित मार्जिन
गेहूँ26101264106%
जौ2286144758%
चना5958375159%
मसूर7390385492%
रेपसीड एवं सरसों6613336796%
कुसुम7215481050%

*सरकारी तालिका में प्रयुक्त लागत में चुकता लागतों के साथ पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य भी शामिल है।

MSP तय करने का संस्थागत तंत्र

  • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) 22 अधिदिष्ट फसलों के लिए MSP की सिफारिश से जुड़ा प्रमुख निकाय है।
  • इनमें 14 खरीफ, 6 रबी और 2 वाणिज्यिक फसलें—जूट और कोपरा—शामिल हैं। गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) अलग व्यवस्था है।
  • MSP पर अंतिम सरकारी निर्णय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) लेती है।
  • CACP केवल लागत नहीं, बल्कि मांग-आपूर्ति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतें, अंतर-फसल मूल्य-समानता, व्यापार की शर्तें और संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग जैसे पहलुओं पर भी विचार करता है।

A2, A2+FL और C2: लागत की तीन अवधारणाएँ

  • A2: बीज, खाद, कीटनाशक, किराए का श्रम, सिंचाई, ईंधन आदि पर किसान का वास्तविक चुकता खर्च।
  • A2 + FL: A2 के साथ परिवार द्वारा दिए गए श्रम का अनुमानित मूल्य।
  • C2: A2+FL के अलावा स्वामित्व वाली भूमि का अनुमानित किराया और स्थिर पूँजी पर ब्याज जैसी व्यापक लागत।
UPSC ट्रैप: केंद्र की “कम-से-कम 1.5 गुना लागत” वाली MSP नीति में आधिकारिक लागत-तालिका चुकता लागतों तथा पारिवारिक श्रम के अनुमानित मूल्य को सम्मिलित करती है; इसे सीधे C2 कहना सही नहीं होगा।

स्टैटिक लिंक: मंत्रिमंडलीय समितियाँ

मंत्रिमंडलीय समितियाँ संविधान में अलग से वर्णित संस्थाएँ नहीं हैं, इसलिए इन्हें संविधानेतर माना जाता है। इनका कार्य-संचालन भारत सरकार के कार्य-संचालन नियम, 1961 (Transaction of Business Rules, 1961) के ढाँचे से जुड़ा है, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 77(3) के अंतर्गत बनाया गया है।

विशेषतापरीक्षा-उपयोगी तथ्य
प्रकृतिसंविधानेतर; कैबिनेट के कार्यभार को बाँटने और निर्णय को सुव्यवस्थित करने का तंत्र।
गठन/परिवर्तनप्रधानमंत्री आवश्यकतानुसार स्थायी समितियों की संरचना/कार्य में परिवर्तन कर सकते हैं।
CCEAआर्थिक नीति, निवेश और कृषि मूल्य जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक मामलों में निर्णयकारी भूमिका।
अध्यक्षताकई प्रमुख समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं; सभी समितियों के लिए एक ही अध्यक्षता नियम नहीं है।

स्टैटिक लिंक: भारत की प्रमुख फसल ऋतुएँ

ऋतुबुवाई/कटाईप्रमुख फसलेंमुख्य भौगोलिक विशेषता
रबीबुवाई: अक्टूबर–दिसंबर
कटाई: अप्रैल–जून
गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसोंबुवाई में ठंडा मौसम; पकते समय अपेक्षाकृत शुष्क और गर्म दशाएँ। पश्चिमी विक्षोभ की नियंत्रित शीतकालीन वर्षा लाभकारी हो सकती है।
खरीफबुवाई: जून–जुलाई
कटाई: सितंबर–अक्टूबर
धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, कपास, मूंगफलीमानसून, उच्च तापमान और पर्याप्त आर्द्रता से जुड़ी ऋतु।
जायदरबी और खरीफ के बीच; सामान्यतः मार्च–जूनतरबूज, खरबूजा, ककड़ी, सब्जियाँ, चाराअल्पावधि फसलें; सिंचाई उपलब्धता महत्वपूर्ण।

मुख्य परीक्षा: MSP, खरीद और फसल विविधीकरण

MSP ने किसानों को मूल्य-संकेत और देश को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, परंतु MSP घोषित होना और वास्तविक खरीद होना अलग बातें हैं। गेहूँ-धान केंद्रित प्रभावी खरीद से कुछ क्षेत्रों में फसल-पैटर्न कठोर हुआ है। इसका परिणाम भूजल दोहन, बिजली सब्सिडी का बढ़ता बोझ, धान की पराली, मिट्टी-पोषक असंतुलन और दलहन-तिलहन की आयात निर्भरता के रूप में दिखाई दे सकता है।

संधारणीय विविधीकरण के लिए

  • दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों के लिए विश्वसनीय खरीद या मूल्य-अंतर भुगतान जैसे साधन।
  • क्षेत्र-विशिष्ट जल बजट और कम पानी वाली फसलों के लिए प्रोत्साहन।
  • FPO, भंडारण, प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन और स्थानीय मूल्य-वर्धन।
  • फसल बीमा, विस्तार सेवाएँ और सुनिश्चित बाजार ताकि किसान नए फसल-पैटर्न का जोखिम उठा सके।
  • MSP को अकेला उपाय न मानकर कृषि-विपणन, सिंचाई, अनुसंधान और पोषण-नीति से जोड़ना।

वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा 2018

निम्नलिखित पर विचार कीजिए:

  1. सुपारी
  2. जौ
  3. कॉफी
  4. रागी
  5. मूंगफली
  6. तिल
  7. हल्दी

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उपर्युक्त में से किनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है?

(a) केवल 1, 2, 3 और 7   (b) केवल 2, 4, 5 और 6   (c) केवल 1, 3, 4, 5 और 6   (d) 1, 2, 3, 4, 5, 6 और 7

सही उत्तर: (b) केवल 2, 4, 5 और 6

जौ, रागी, मूंगफली और तिल अधिदिष्ट MSP फसलों में आते हैं; सुपारी, कॉफी और हल्दी इस सूची में नहीं हैं।

मुख्य परीक्षा 2018 — सामान्य अध्ययन-III

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से आप क्या समझते हैं? MSP किसानों को निम्न आय के जाल से कैसे बचाएगा?

10 अंक · 150 शब्द

मुख्य परीक्षा 2021 — सामान्य अध्ययन-III

फसल विविधीकरण के समक्ष वर्तमान चुनौतियाँ क्या हैं? उभरती प्रौद्योगिकियाँ फसल विविधीकरण के लिए किस प्रकार अवसर प्रदान करती हैं?

15 अंक · 250 शब्द

आज का मुख्य परीक्षा अभ्यास

“न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली ने भारत को खाद्य सुरक्षा तो प्रदान की है, लेकिन इसने फसल चक्र को विकृत कर पर्यावरणीय संकट भी पैदा किया है।” इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और कृषि को संधारणीय बनाने के उपाय सुझाइए।

10 अंक · 150 शब्द

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