हरित हाइड्रोजन: ऊर्जा सुरक्षा से औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन तक
उद्योग, ऊर्जा आयात, मिशन-ढाँचा और व्यावहारिक बाधाओं को एक साथ जोड़ने वाला 15-अंकीय उत्तर।
प्रश्न
“हरित हाइड्रोजन भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन दोनों के लिए अवसर है, पर इसकी सफलता लागत, अवसंरचना और सुरक्षा मानकों पर निर्भर करेगी।” चर्चा कीजिए।
प्रश्न की मांग
- ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और आर्थिक अवसरों का विश्लेषण करना।
- लागत, अवसंरचना, सुरक्षा और संसाधन संबंधी सीमाओं का मूल्यांकन करना।
- भारतीय नीति-ढाँचे को आगे की राह से जोड़ना।
आदर्श उत्तर
भारत के ऊर्जा संक्रमण में हरित हाइड्रोजन की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजलीकरण से कठिन क्षेत्रों—इस्पात, उर्वरक, रिफाइनरी, भारी परिवहन और नौवहन—में प्रत्यक्ष जीवाश्म ईंधन प्रतिस्थापन सीमित है। नवीकरणीय बिजली से जल के विद्युत-अपघटन द्वारा उत्पादित हरित हाइड्रोजन इन क्षेत्रों के उत्सर्जन को घटाने का विकल्प देता है।
भारत के लिए अवसर
- ऊर्जा सुरक्षा: प्राकृतिक गैस और जीवाश्म-आधारित feedstock के आयात पर निर्भरता घट सकती है।
- औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन: उर्वरक में green ammonia, रिफाइनरी में स्वच्छ hydrogen और इस्पात में DRI आधारित प्रक्रियाएँ उपयोगी हो सकती हैं।
- हरित विनिर्माण: electrolyser, renewable power, storage, pipelines और ports में घरेलू उद्योग विकसित हो सकता है।
- निर्यात: green ammonia और derivatives भारत को उभरते स्वच्छ-ईंधन व्यापार में स्थान दिला सकते हैं।
मुख्य बाधाएँ
उच्च उत्पादन लागत, सस्ती और निरंतर नवीकरणीय बिजली, electrolyser supply chain, जल उपलब्धता, भंडारण-परिवहन, safety codes तथा खरीदारों की निश्चित मांग प्रमुख चुनौतियाँ हैं। विभिन्न देशों में “green” की परिभाषा और certification standards भी निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेंगे।
आगे की राह
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के SIGHT प्रोत्साहनों को दीर्घकालिक offtake contracts, green ammonia procurement, घरेलू electrolyser अनुसंधान, renewable-energy corridors, जल-कुशल परियोजना-स्थल और कठोर safety standards से जोड़ना चाहिए। Carbon pricing/green public procurement जैसे demand-side संकेत भी उपयोगी होंगे।
निष्कर्ष: हरित हाइड्रोजन कोई एकल ऊर्जा समाधान नहीं, बल्कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक नीति और जलवायु रणनीति का साझा मंच बन सकता है—यदि लागत और अवसंरचना की बाधाएँ व्यवस्थित रूप से घटाई जाएँ।
मूल्यवर्धन
मिशन लक्ष्य: 2030 तक कम-से-कम 5 MMT प्रति वर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता। SIGHT: Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition.
ताज़ा उदाहरण: SIGHT Mode-2A Tranche-II में 54,000 MTPA green ammonia की निविदा।