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मुख्य परीक्षा अभ्यास • सामान्य अध्ययन-III

खाद्य सुरक्षा से पोषण और जलवायु-सहनशील कृषि तक

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कृषि, पोषण, जलवायु परिवर्तन और किसान आय को एक साथ देखने वाला प्रश्न।

15 अंकशब्द-सीमा: 250 शब्दमाध्यम: हिंदी

प्रश्न

“खाद्य सुरक्षा अब केवल अनाज भंडार नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार, मृदा स्वास्थ्य और जलवायु सहनशीलता का एकीकृत तंत्र है।” भारत में कृषि-पारिस्थितिकी को बढ़ावा देने की रणनीतियों का मूल्यांकन कीजिए।

प्रश्न की मांग

  • खाद्य सुरक्षा को केवल उत्पादन नहीं, पोषण और पारिस्थितिक स्थिरता से जोड़ना।
  • कृषि-पारिस्थितिकी की उपयोगिता के साथ उसकी व्यवहारिक सीमाओं का मूल्यांकन करना।
  • भारत के लिए नीतिगत, बाजार और अनुसंधान-आधारित रणनीति देना।

आदर्श उत्तर

भारत की खाद्य सुरक्षा नीति ने अनाज उपलब्धता में मजबूती दी है, पर कुपोषण, मृदा क्षरण, भूजल-दोहन, कृषि-रसायनों पर निर्भरता और चरम मौसम यह बताते हैं कि अगला चरण “कैलोरी सुरक्षा” से “पोषण एवं पारिस्थितिक सुरक्षा” की ओर होना चाहिए। कृषि-पारिस्थितिकी (Agroecology) इसी संक्रमण का आधार बन सकती है।

क्यों उपयोगी?

  • विविधता: मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी और मिश्रित खेती पोषण व आय दोनों बढ़ाती है।
  • मृदा व जल: फसल चक्र, जैविक पदार्थ, कृषि-वनीकरण और स्थानीय पोषक-चक्र मृदा कार्बन, जल-धारण तथा सूखा-सहनशीलता सुधारते हैं।
  • लागत एवं जोखिम: स्थानीय जैव-इनपुट और एकीकृत कृषि बाहरी इनपुट-निर्भरता तथा एकल फसल के जोखिम को घटा सकते हैं।
  • जलवायु अनुकूलन: विविध कृषि-तंत्र कीट, ताप और वर्षा-आघात के प्रति अधिक प्रत्यास्थ होते हैं।

भारत के लिए रणनीति

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को वैज्ञानिक, क्षेत्र-विशिष्ट परीक्षण और कृषि विज्ञान केंद्रों से जोड़ना; मोटे अनाज-दालों की खरीद को सार्वजनिक वितरण, आंगनवाड़ी और पीएम-पोषण से जोड़कर मांग बनाना; कृषक उत्पादक संगठनों, प्रसंस्करण व स्थानीय मूल्य-शृंखला से बेहतर मूल्य दिलाना; तथा मृदा-स्वास्थ्य, सूक्ष्म सिंचाई और कृषि-वनीकरण को जिला कृषि योजना में समेकित करना आवश्यक है।

सावधानियाँ

संक्रमण अवधि में उपज-अनिश्चितता, अधिक ज्ञान-आवश्यकता, प्रमाणन, बाजार प्रीमियम और छोटे किसानों की जोखिम-वहन क्षमता सीमाएँ हैं। इसलिए एक ही मॉडल पूरे देश पर लागू करने के बजाय स्थानीय पारिस्थितिकी + वैज्ञानिक प्रमाण + किसान आय पर आधारित क्रमिक संक्रमण होना चाहिए।

निष्कर्ष: टिकाऊ खाद्य व्यवस्था वही है जो खेत की मिट्टी, किसान की आय और थाली के पोषण—तीनों को एक साथ सुरक्षित करे।

मूल्यवर्धन

FAO के 10 तत्व: विविधता, सहक्रिया, दक्षता, पुनर्चक्रण, प्रत्यास्थता, ज्ञान-सहसृजन, मानवीय-सामाजिक मूल्य, खाद्य परंपराएँ, उत्तरदायी शासन और परिपत्र अर्थव्यवस्था।

भारत: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का कुल परिव्यय ₹2,481 करोड़ है।