← प्रारंभिक परीक्षा + करंट पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी • साप्ताहिक लिंक

14–22 सितंबर 2026: करंट अफेयर्स को पर्यावरण से जोड़कर पढ़ें

केवल वे घटनाएँ जिनसे प्रजाति संरक्षण, जैव विविधता, मैंग्रोव, जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, संरक्षित क्षेत्र, पर्यावरणीय कानून या पारिस्थितिकी पर प्रारंभिक परीक्षा में कथन-आधारित प्रश्न बन सकता है।

01
प्रजाति संरक्षण • घासभूमिअत्यंत उच्च प्राथमिकता

गोडावण (Great Indian Bustard): क्रमिक मुक्तिकरण (Soft Release) केंद्र

क्यों चर्चा में?

कच्छ के नलिया में गोडावण के लिए सॉफ्ट रिलीज केंद्र का उद्घाटन हुआ और उसके प्राकृतिक आवास, घासभूमि पुनर्स्थापन तथा संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम की समीक्षा की गई।

स्थिर पारिस्थितिकी से सीधा संबंध

गोडावण खुली घासभूमि, अर्ध-शुष्क झाड़ी क्षेत्र और वर्षा-आधारित कृषि परिदृश्य से जुड़ी प्रजाति है। भारी शरीर और कम प्रजनन दर के कारण आवास विखंडन तथा बिजली लाइनों से टकराव इसके लिए गंभीर खतरे हैं।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • वैज्ञानिक नाम: Ardeotis nigriceps
  • IUCN स्थिति: गंभीर संकटग्रस्त (Critically Endangered)।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में उच्च संरक्षण।
  • प्रवासी प्रजातियों पर अभिसमय (CMS) के परिशिष्ट-I में शामिल।
  • कच्छ परिदृश्य में लगभग 11 वर्ग किमी Prosopis juliflora प्रभावित घासभूमि का पुनर्स्थापन किया गया।
  • “क्रमिक मुक्तिकरण (Soft Release)” का उद्देश्य नियंत्रित वातावरण से प्राकृतिक आवास में धीरे-धीरे अनुकूलन कराना है।
ट्रैप: गोडावण वन-आश्रित पक्षी नहीं; इसका प्रमुख पारिस्थितिक संबंध खुली घासभूमि और अर्ध-शुष्क परिदृश्य से है।
स्रोत: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय; वन्यजीव संस्थान भारत.
02
मैंग्रोव • तटीय पारिस्थितिकीअत्यंत उच्च प्राथमिकता

मैंग्रोव पहल (MISHTI) और कच्छ के मैंग्रोव

क्यों चर्चा में?

जखाऊ मैंग्रोव नर्सरी और कोरी क्रीक क्षेत्र में मैंग्रोव पुनर्स्थापन की समीक्षा हुई तथा Avicennia marina का रोपण किया गया।

स्थिर पारिस्थितिकी से संबंध

मैंग्रोव लवण-सहिष्णु वनस्पतियाँ हैं जो ज्वारीय तटीय क्षेत्रों, मुहानों और क्रीक में विकसित होती हैं। वे तट-क्षरण कम करने, कार्बन संचयन, मत्स्य-नर्सरी और तूफानी लहरों से प्राकृतिक सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • MISHTI = तटीय आवास एवं ठोस आय हेतु मैंग्रोव पहल (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes)।
  • कच्छ में प्रमुख क्षेत्र: कोरी क्रीक, जखाऊ और सर क्रीक क्षेत्र।
  • Avicennia marina भारत के व्यापक रूप से पाए जाने वाले मैंग्रोवों में से एक है।
  • 2023-24 से 2026-27 तक कच्छ का संचयी रोपण लक्ष्य 29,250 हेक्टेयर बताया गया; 27,652 हेक्टेयर में रोपण पूर्ण होने की सूचना दी गई।
  • जखाऊ नर्सरी में लगभग 3.49 लाख मैंग्रोव पौध तैयार किए गए।
  • मैंग्रोव “नीला कार्बन (Blue Carbon)” पारिस्थितिकी तंत्रों में महत्त्वपूर्ण हैं।
ट्रैप: हर तटीय वन मैंग्रोव नहीं होता; मैंग्रोव ज्वारीय, लवणीय परिस्थितियों के लिए विशेष अनुकूलन रखते हैं।
स्रोत: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, कच्छ मैंग्रोव पुनर्स्थापन समीक्षा.
03
वायुमंडल • अंतरराष्ट्रीय समझौताअत्यंत उच्च प्राथमिकता

विश्व ओज़ोन दिवस 2026 और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल

क्यों चर्चा में?

32वाँ विश्व ओज़ोन दिवस मुंबई में “शीतल ग्रह हेतु वैश्विक कार्रवाई” विषय के साथ मनाया गया।

स्थिर पर्यावरण से संबंध

समतापमंडलीय ओज़ोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी-B किरणों का बड़ा हिस्सा अवशोषित करती है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन और हैलोन जैसे ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थ समतापमंडल में क्लोरीन/ब्रोमीन मुक्त कर ओज़ोन को नष्ट करते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • वियना अभिसमय: 1985 — ओज़ोन परत संरक्षण हेतु ढाँचा।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: 1987 — ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध समाप्त करने का समझौता।
  • किगाली संशोधन: 2016 — HFC के चरणबद्ध कमी से संबंधित।
  • HFC सीधे प्रमुख ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थ नहीं हैं, लेकिन शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं।
  • ओज़ोन छिद्र का सबसे प्रमुख मौसमी विकास अंटार्कटिका के ऊपर देखा जाता है।
ट्रैप: क्षोभमंडलीय ओज़ोन प्रदूषक है, जबकि समतापमंडलीय ओज़ोन पृथ्वी को UV-B से सुरक्षा देती है।
स्रोत: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, विश्व ओज़ोन दिवस 2026.
04
जलवायु शासनअत्यंत उच्च प्राथमिकता

भारत का नेट ज़ीरो पोर्टल और राष्ट्रीय जलवायु कार्ययोजना (NAPCC) डैशबोर्ड

क्यों चर्चा में?

विश्व ओज़ोन दिवस के अवसर पर भारत का नेट ज़ीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड शुरू किया गया।

स्थिर पर्यावरण से संबंध

नेट ज़ीरो का अर्थ यह नहीं कि सभी उत्सर्जन शून्य हो जाएँ; इसका अर्थ है शेष मानवजनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को हटाने/अवशोषण से संतुलित करना। NAPCC भारत की राष्ट्रीय जलवायु नीति का प्रमुख ढाँचा है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • नेट ज़ीरो पोर्टल स्वैच्छिक नेट ज़ीरो प्रतिबद्धताओं के लिए राष्ट्रीय मंच है।
  • राष्ट्रीय जलवायु कार्ययोजना (NAPCC) डैशबोर्ड राष्ट्रीय जलवायु मिशनों की प्रगति की समेकित निगरानी करेगा।
  • NAPCC वर्ष 2008 में जारी किया गया था।
  • मूल राष्ट्रीय जलवायु कार्ययोजना (NAPCC) में 8 राष्ट्रीय मिशन शामिल थे।
  • भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य घोषित किया है।
ट्रैप: नेट ज़ीरो और पूर्ण शून्य उत्सर्जन समान नहीं हैं; नेट ज़ीरो में अवशिष्ट उत्सर्जन का संतुलन शामिल है।
स्रोत: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, 16 सितंबर 2026.
05
संसाधन दक्षता • अपशिष्टउच्च प्राथमिकता

विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026

क्यों चर्चा में?

गांधीनगर में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026 आयोजित हुआ, जिसका विषय “चक्रीय अर्थव्यवस्था: आम लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन” था।

स्थिर पर्यावरण से संबंध

चक्रीय अर्थव्यवस्था रैखिक “लो–बनाओ–फेंको” मॉडल के बजाय संसाधनों को अधिक समय तक उपयोग में रखने, मरम्मत, पुनःउपयोग, पुनर्निर्माण और पुनर्चक्रण पर आधारित है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था का लक्ष्य संसाधन-दक्षता और अपशिष्ट-न्यूनता बढ़ाना है।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) में उत्पादक को उत्पाद/पैकेजिंग के उपयोग-पश्चात प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाती है।
  • भारत में प्लास्टिक, ई-कचरा, बैटरी और प्रयुक्त तेल जैसे क्षेत्रों में EPR आधारित नियम लागू हैं।
  • रीसाइक्लिंग चक्रीय अर्थव्यवस्था का केवल एक हिस्सा है; पुनःउपयोग और मरम्मत अक्सर अधिक संसाधन-दक्ष हो सकते हैं।
ट्रैप: “चक्रीय अर्थव्यवस्था = केवल पुनर्चक्रण (recycling)” गलत है; जीवन-चक्र में संसाधन उपयोग कम करना और उत्पादों का जीवन बढ़ाना भी केंद्रीय तत्व हैं।
स्रोत: विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026, पर्यावरण मंत्रालय.
06
वायु प्रदूषण • वैधानिक संस्थाअत्यंत उच्च प्राथमिकता

CAQM और दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता

क्यों चर्चा में?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में CAQM ने औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों और डीज़ल जनरेटर से संबंधित अनुपालन की समीक्षा की; 15-दिवसीय अवधि में 150 निरीक्षण दर्ज किए गए।

स्थिर पर्यावरणीय शासन से संबंध

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग एक वैधानिक निकाय है, जिसे 2021 के अधिनियम से स्थापित किया गया। इसका कार्य अंतरराज्यीय वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए समन्वित दिशा-निर्देश और प्रवर्तन है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • कानूनी आधार: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 (Commission for Air Quality Management in NCR and Adjoining Areas Act, 2021)।
  • क्षेत्र: दिल्ली-NCR तथा वायु प्रदूषण से प्रभावित निकटवर्ती क्षेत्र।
  • CAQM ने पूर्ववर्ती पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (Environment Pollution Prevention and Control Authority) की जगह ली।
  • 15-दिवसीय रिपोर्ट में 7 निर्माण/ध्वस्तीकरण स्थल, 98 औद्योगिक इकाइयाँ और 45 डीज़ल जनरेटर संबंधी निरीक्षण शामिल थे।
  • क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (Graded Response Action Plan—GRAP) दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण स्तर के अनुसार चरणबद्ध कार्रवाई का ढाँचा है।
ट्रैप: CAQM केवल दिल्ली सरकार की संस्था नहीं; यह संसद के कानून से स्थापित क्षेत्रीय वैधानिक आयोग है।
स्रोत: CAQM/पर्यावरण मंत्रालय, 15–18 सितंबर 2026.
07
पर्यावरणीय न्यायअत्यंत उच्च प्राथमिकता

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और पर्यावरणीय न्याय

क्यों चर्चा में?

नई दिल्ली में “पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य” विषय पर NGT का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ और NGT मोबाइल अनुप्रयोग जारी किया गया।

स्थिर पर्यावरणीय कानून से संबंध

राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरण संरक्षण, वन एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष वैधानिक अधिकरण है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • कानूनी आधार: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010।
  • मुख्य पीठ: नई दिल्ली।
  • NGT सिविल प्रक्रिया संहिता से बाध्य नहीं; प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है।
  • अधिनियम की धारा 20 के तहत सतत विकास, सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत लागू करता है।
  • पर्यावरणीय विवादों में राहत, प्रतिकर और पर्यावरण पुनर्स्थापन से संबंधित आदेश दे सकता है।
ट्रैप: NGT संवैधानिक न्यायालय नहीं; यह संसद के 2010 के अधिनियम से बना वैधानिक अधिकरण है।
स्रोत: राष्ट्रीय हरित अधिकरण; पर्यावरण मंत्रालय, 19–20 सितंबर 2026.
08
जैव विविधता • जैवमंडलअत्यंत उच्च प्राथमिकता

अगस्थ्यमलाई जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र: 3,261 पुष्पीय प्रजातियाँ

क्यों चर्चा में?

नई पुष्पीय सूची में अगस्थ्यमलाई जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में 3,261 फूलदार पादप प्रजातियाँ दर्ज की गईं; लगभग एक-तिहाई टैक्सा भारत के लिए स्थानिक पाए गए।

स्थिर पारिस्थितिकी से संबंध

अगस्थ्यमलाई दक्षिणी पश्चिमी घाट का अत्यधिक स्थानिकता वाला जैव विविधता क्षेत्र है और केरल तथा तमिलनाडु में फैला है। यह UNESCO के मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम (Man and the Biosphere Programme) के विश्व नेटवर्क में शामिल है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • UNESCO विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल: 2016।
  • क्षेत्रफल: लगभग 3,500 वर्ग किमी।
  • मुख्य संरक्षित क्षेत्र: कलक्कड़-मुंडनथुराई टाइगर रिज़र्व, शेंदुरनी, पेप्पारा और नेय्यर वन्यजीव अभयारण्य।
  • नई सूची: 3,261 प्रजातियाँ, 1,139 वंश और 190 कुल।
  • 1,018 टैक्सा भारत के लिए स्थानिक; 245 अत्यंत संकीर्ण क्षेत्र में सीमित (अति-सीमित स्थानिक (steno-endemic))।
  • Fabaceae सबसे अधिक प्रजाति-समृद्ध कुल बताया गया।
ट्रैप: अगस्थ्यमलाई केवल केरल में नहीं; इसका विस्तार तमिलनाडु में भी है।
स्रोत: UNESCO; JNTBGRI की 2026 पुष्पीय सूची, Plant Science Today.
09
पुनःस्थापन • घासभूमिअत्यंत उच्च प्राथमिकता

Project Cheetah: गांधी सागर बना दूसरा प्रमुख स्थल

क्यों चर्चा में?

बोत्सवाना मूल की मादा चीता CCB-2 को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के सॉफ्ट-रिलीज घेरे में छोड़ा गया, जिससे वहाँ चीता संख्या 4 हो गई।

स्थिर पारिस्थितिकी से संबंध

प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) का उद्देश्य केवल एक प्रजाति की वापसी नहीं, बल्कि खुली घासभूमि, सवाना और अर्ध-शुष्क पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण को भी बढ़ावा देना है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश के मंदसौर–नीमच क्षेत्र में है।
  • यह Kuno National Park के बाद प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) का दूसरा प्रमुख स्थल है।
  • आवास: घासभूमि, सवाना, खुला वन और नदी-घाटी की झाड़ियाँ।
  • दीर्घकालीन योजना Kuno–Gandhi Sagar परिदृश्य में मेटापॉपुलेशन विकसित करने की है।
  • चीता का उपयोग घासभूमि/अर्ध-शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रमुख प्रतीक प्रजाति (flagship species) तथा छत्र प्रजाति (umbrella species) के रूप में भी किया जा रहा है।
ट्रैप: गांधी सागर राष्ट्रीय उद्यान नहीं, वन्यजीव अभयारण्य है।
स्रोत: Project Cheetah आधिकारिक रूपरेखा; सितंबर 2026 गांधी सागर स्थानांतरण रिपोर्ट.
10
पक्षी • ध्वनि प्रदूषणउच्च प्राथमिकता

हिमालयी मोनाल और मानवजनित ध्वनि

क्यों चर्चा में?

एक अध्ययन में पाया गया कि बढ़ती मानवजनित ध्वनि के बीच हिमालयी मोनाल अपने स्वर की पिच और समय में बदलाव कर रहे हैं।

स्थिर पारिस्थितिकी से संबंध

ध्वनि प्रदूषण केवल मनुष्यों पर नहीं, वन्यजीव संचार, प्रजनन, शिकार-परिहार और क्षेत्र-रक्षा पर भी प्रभाव डाल सकता है। पक्षियों में ध्वनिक आवरण (acoustic masking) के कारण स्वर की आवृत्ति या समय बदल सकता है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • वैज्ञानिक नाम: Lophophorus impejanus
  • परिवार: Phasianidae — तीतर समूह।
  • आवास: हिमालयी उप-अल्पाइन/अल्पाइन क्षेत्र, रोडोडेंड्रोन-बाँसयुक्त पर्वतीय वन और घासभूमि।
  • IUCN स्थिति: कम चिंता (Least Concern)।
  • उत्तराखंड का राज्य पक्षी।
  • नर अत्यंत रंगीन, मादा अपेक्षाकृत भूरे छलावरण रंग की—स्पष्ट लैंगिक द्विरूपता।
ट्रैप: “Least Concern” का अर्थ कानूनी संरक्षण न होना नहीं है; IUCN स्थिति और राष्ट्रीय कानूनी संरक्षण अलग व्यवस्थाएँ हैं।
स्रोत: सितंबर 2026 Himalayan Monal acoustic study coverage; IUCN/भारतीय वन्यजीव संदर्भ.
45 सेकंड पुनरावृत्ति

इस सप्ताह के सबसे संभावित पर्यावरण ट्रैप

गोडावण — घासभूमि पक्षी • गंभीर संकटग्रस्त

MISHTI — मैंग्रोव • तटीय पुनर्स्थापन • ब्लू कार्बन

ओज़ोन — Montreal 1987 • Kigali 2016 • HFC जलवायु मुद्दा

नेट ज़ीरो — अवशिष्ट उत्सर्जन का संतुलन, पूर्ण शून्य नहीं

चक्रीय अर्थव्यवस्था — केवल recycling नहीं

CAQM — 2021 का वैधानिक आयोग

NGT — 2010 का वैधानिक अधिकरण • धारा 20 के 3 सिद्धांत

अगस्थ्यमलाई — केरल + तमिलनाडु • UNESCO 2016

गांधी सागर — वन्यजीव अभयारण्य • Project Cheetah

हिमालयी मोनाल — Phasianidae • उत्तराखंड का राज्य पक्षी