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14–22 सितंबर 2026: करंट अफेयर्स को कृषि से जोड़कर पढ़ें

केवल वे खबरें जिनसे फसल, मृदा, कृषि-प्रौद्योगिकी, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि-बाजार, निर्यात या कृषि-योजना पर कथन-आधारित प्रश्न बन सकता है।

01
मृदा • पुनर्योजी कृषिअत्यंत उच्च प्राथमिकता

भारत में पहली बार किसानों को मृदा-कार्बन के लिए भुगतान

क्यों चर्चा में?

पंजाब और हरियाणा के 2,550 किसानों को पुनर्योजी खेती अपनाने पर ₹2.9 करोड़ से अधिक के डिजिटल भुगतान की शुरुआत हुई।

स्थिर कृषि से सीधा संबंध

यह भुगतान ‘आदि’ किसान कार्बन कार्यक्रम के अंतर्गत है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था और ICAR ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया। किसानों ने प्रत्यक्ष बीजित धान, कम जुताई और फसल-अवशेष प्रबंधन जैसी पद्धतियाँ अपनाईं; उनके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और मृदा-कार्बन वृद्धि को मापने के बाद कार्बन क्रेडिट जारी किए गए।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • प्रत्यक्ष बीजित धान (प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR)) में धान की नर्सरी बनाकर रोपाई करने के बजाय बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं।
  • पुनर्योजी कृषि का लक्ष्य मृदा-स्वास्थ्य, जैविक पदार्थ, जल-धारण क्षमता और पारिस्थितिक कार्यक्षमता सुधारना है।
  • फसल-अवशेष जलाने के बजाय उसका प्रबंधन मृदा-कार्बन संरक्षण में सहायक हो सकता है।
  • कार्बन क्रेडिट मापा और सत्यापित उत्सर्जन-घटाव/कार्बन-संग्रहण से जुड़ सकता है।
  • इस कार्यक्रम में वेरा VM0042 (Verra VM0042) पद्धति के तहत कृषि कार्बन क्रेडिट जारी किए गए।
ट्रैप: मृदा में अधिक कार्बन का अर्थ केवल “कार्बन जमा करना” नहीं; यह मृदा-जैविक पदार्थ, संरचना और जल-धारण क्षमता से भी जुड़ा है।
स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय/ICAR, 17 सितंबर 2026.
02
डिजिटल कृषिअत्यंत उच्च प्राथमिकता

एग्रीस्टैक (AgriStack) और किसान पहचान (Farmer ID)

क्यों चर्चा में?

दक्षिणी राज्यों के क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में राज्यों को किसान पहचान (Farmer ID), एग्रीस्टैक (AgriStack), भूमि-अभिलेख एकीकरण, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और गाँव के मानचित्रों के भू-संदर्भीकरण का काम समयबद्ध पूरा करने को कहा गया।

स्थिर कृषि से संबंध

AgriStack, डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का प्रमुख घटक है। इसका उद्देश्य किसान, भूमि और बोई गई फसल से संबंधित सत्यापित डिजिटल अभिलेख तैयार करना है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • AgriStack की 3 मूल रजिस्ट्रियाँ: किसान रजिस्ट्री (Farmer Registry), भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और बोई गई फसल रजिस्ट्री (Crop Sown Registry)।
  • किसान पहचान (Farmer ID) एक विशिष्ट डिजिटल किसान पहचान है।
  • Farmer ID का उपयोग PM-KISAN, PMFBY, MSP खरीद, ऋण, इनपुट वितरण और आपदा राहत जैसी सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।
  • इन रजिस्ट्रियों का निर्माण और रखरखाव राज्य/केंद्रशासित प्रदेश करते हैं।
  • डिजिटल कृषि मिशन को सितंबर 2024 में मंजूरी मिली थी।
ट्रैप: AgriStack केवल “Farmer ID database” नहीं है; इसमें किसान रजिस्ट्री के साथ फसल और भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र भी शामिल हैं।
स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय; डिजिटल कृषि मिशन आधिकारिक विवरण.
03
कृषि-प्रौद्योगिकीउच्च प्राथमिकता

भारत विस्तार: मोबाइल आधारित बहुभाषी कृषि परामर्श

क्यों चर्चा में?

भारत विस्तार को हिंदी और अंग्रेज़ी से आगे 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विस्तारित करने की घोषणा की गई, ताकि किसान अपनी भाषा में प्रश्न पूछकर कृषि सलाह प्राप्त कर सकें।

स्थिर कृषि से संबंध

भारत विस्तार (Bharat Vistar) कृषि संसाधनों तक पहुँच के लिए एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवादात्मक प्रणाली है। यह सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, मौसम, कीट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और मंडी भाव जैसी जानकारी को एक मंच पर लाने का प्रयास करती है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • पूरा नाम: Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources।
  • पहला चरण 17 फरवरी 2026 को शुरू किया गया था।
  • यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवादात्मक कृषि सूचना प्रणाली है।
  • इसे साधारण मोबाइल फोन से भी उपयोग योग्य बनाने की परिकल्पना है।
  • यह AgriStack तथा कृषि संस्थानों/योजनाओं के डेटा से जुड़कर किसान-केंद्रित सलाह दे सकती है।
ट्रैप: भारत विस्तार को AgriStack न समझें—AgriStack कृषि डेटा अवसंरचना है; भारत विस्तार किसान-सलाह/सूचना इंटरफेस है।
स्रोत: कृषि मंत्रालय, 18 सितंबर 2026; संसद में भारत विस्तार पर आधिकारिक उत्तर.
04
फसल प्रणाली • जलवायुअत्यंत उच्च प्राथमिकता

रबी तैयारी, फसल विविधीकरण और एल नीनो

क्यों चर्चा में?

दक्षिणी राज्यों के कृषि सम्मेलन में एल नीनो के प्रभाव, फसल विविधीकरण और आगामी रबी मौसम की तैयारी पर चर्चा हुई। 28–29 सितंबर को राष्ट्रीय रबी सम्मेलन में फसल और क्षेत्रफल योजनाओं के आधार पर बीज व उर्वरक आवश्यकता तय की जानी है।

स्थिर कृषि से संबंध

रबी फसलें सामान्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाद शीत ऋतु में बोई जाती हैं और वसंत/ग्रीष्म के आरंभ में काटी जाती हैं। गेहूँ, चना, सरसों, जौ और मटर प्रमुख रबी फसलें हैं। फसल विविधीकरण का उद्देश्य एक ही फसल पर निर्भरता कम करना और संसाधन, आय तथा जोखिम प्रबंधन में सुधार करना है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • रबी बुवाई: सामान्यतः अक्टूबर–दिसंबर; कटाई: मार्च–अप्रैल/मई।
  • रबी कृषि सिंचाई और शीतकालीन नमी पर अपेक्षाकृत अधिक निर्भर हो सकती है।
  • एल नीनो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य/पूर्वी भाग में असामान्य गर्म समुद्री सतह तापमान से संबंधित है।
  • भारत के मानसून पर एल नीनो का प्रभाव संभाव्य है, पूर्णतः निश्चित नहीं।
  • फसल विविधीकरण जल, मृदा और बाजार जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।
ट्रैप: हर एल नीनो वर्ष भारत में अनिवार्य रूप से सूखा नहीं लाता; अन्य महासागरीय-वायुमंडलीय कारक भी प्रभाव डालते हैं।
स्रोत: दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन, हैदराबाद, 18 सितंबर 2026.
05
पशुपालन • पशु स्वास्थ्यअत्यंत उच्च प्राथमिकता

खुरपका-मुँहपका रोग (FMD) मुक्त क्षेत्र

क्यों चर्चा में?

भारत में FMD-मुक्त क्षेत्र और कम्पार्टमेंट (compartment)s विकसित करने के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) की कार्यशाला आयोजित हुई।

स्थिर कृषि से संबंध

खुरपका-मुँहपका रोग एक अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग है जो मुख्यतः द्विखुरी पशुओं—गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर आदि—को प्रभावित करता है। पशु-उत्पादकता, दूध उत्पादन और पशु व्यापार पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • FMD एक विषाणुजनित रोग है; यह जीवाणुजनित रोग नहीं है।
  • मुख्य संवेदनशील पशु: गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे द्विखुरी पशु।
  • National Animal Disease Control Programme (NADCP) 2019 में शुरू हुआ।
  • NADCP का प्रमुख फोकस FMD और ब्रुसेलोसिस (Brucellosis) नियंत्रण है।
  • WOAH का मुख्यालय पेरिस में है; इसका पुराना नाम OIE था।
  • “रोग-मुक्त क्षेत्र (Disease-free zone)” और “कम्पार्टमेंट (compartment)” पशु-रोग व्यापार एवं जैव-सुरक्षा प्रबंधन में अलग अवधारणाएँ हैं।
ट्रैप: FMD को मानव “हैंड-फुट-माउथ डिज़ीज़” से न मिलाएँ; दोनों अलग रोग हैं।
स्रोत: पशुपालन एवं डेयरी विभाग; WOAH; NADCP आधिकारिक पृष्ठभूमि.
06
सिंचाई • बहुउद्देशीय परियोजनाउच्च प्राथमिकता

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना और 97,000 हेक्टेयर सिंचाई

क्यों चर्चा में?

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर छह राज्यों/क्षेत्रों के बीच समझौते के बाद परियोजना आगे बढ़ी। इससे लगभग 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य है।

स्थिर कृषि से संबंध

किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। सिंचाई परियोजनाएँ कृषि में फसल-तीव्रता, रबी क्षेत्र, सूखा-जोखिम और बहुफसली व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • नदी: टोंस — यमुना की प्रमुख सहायक नदी।
  • स्थान: उत्तराखंड–हिमाचल प्रदेश सीमा क्षेत्र।
  • प्रस्तावित बाँध: 232.6 मीटर ऊँचा कंक्रीट गुरुत्व बाँध।
  • भंडारण क्षमता: 1,562 मिलियन घन मीटर।
  • सिंचाई लाभ: लगभग 97,000 हेक्टेयर।
  • इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है; लगभग 90% वित्तीय भार केंद्र द्वारा वहन किया जाना है।
ट्रैप: किशाऊ परियोजना गंगा की मुख्य धारा पर नहीं; टोंस–यमुना तंत्र में है।
स्रोत: गृह मंत्रालय/जल शक्ति मंत्रालय, किशाऊ परियोजना समझौता, 15 सितंबर 2026.
07
कृषि निर्यातउच्च प्राथमिकता

APEDA–Gulfood 2027: कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात

क्यों चर्चा में?

APEDA और Gulfood आयोजक के बीच समझौता हुआ। भारत लगातार दूसरे वर्ष Gulfood 2027 में आधिकारिक भागीदार देश होगा और FPO, MSME तथा उभरते निर्यातकों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

स्थिर कृषि से संबंध

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन से संबंधित प्रमुख वैधानिक संस्था है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • APEDA की स्थापना एपीडा अधिनियम, 1985 (APEDA Act, 1985) के तहत हुई।
  • प्रशासनिक मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय।
  • APEDA अनुसूचित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात-विकास से संबंधित है।
  • Gulfood 2027: 15–19 मार्च 2027, संयुक्त अरब अमीरात।
  • FPO का अर्थ किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation) है।
  • कृषि निर्यात में उत्पादन के साथ गुणवत्ता, अनुरेखणीयता (traceability), प्रसंस्करण, रसद और बाजार पहुँच महत्त्वपूर्ण हैं।
ट्रैप: APEDA कृषि मंत्रालय के अधीन नहीं; यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन है।
स्रोत: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय/APEDA, 16 सितंबर 2026.
08
मत्स्य पालन • जलीय कृषिउच्च प्राथमिकता

पश्चिम बंगाल का मत्स्य पालन और PMMSY

क्यों चर्चा में?

पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास की उच्चस्तरीय समीक्षा हुई, जिसमें उत्पादन, बाजार-संपर्क और मत्स्य मूल्य-शृंखला मजबूत करने पर जोर दिया गया।

स्थिर कृषि से संबंध

मत्स्य पालन कृषि के संबद्ध क्षेत्रों में आता है। भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन, तालाब, जलाशय, नदी, बाढ़भूमि तथा जलीय कृषि का महत्त्व तेजी से बढ़ा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) मत्स्य उत्पादन, अवसंरचना, बाजार और मूल्य-शृंखला के विकास से जुड़ी प्रमुख योजना है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • PMMSY की शुरुआत वित्त वर्ष 2020-21 से हुई।
  • संबंधित विभाग: मत्स्य पालन विभाग।
  • संबंधित मंत्रालय: मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय।
  • योजना का फोकस: उत्पादन, उत्पादकता, गुणवत्ता, तकनीक, कटाई-पश्चात अवसंरचना, cold chain और बाजार-संपर्क।
  • पश्चिम बंगाल में समुद्री तथा अंतर्देशीय—दोनों प्रकार के मत्स्य संसाधन हैं।
  • जलीय कृषि (जलीय कृषि (aquaculture)) और पकड़-आधारित मत्स्य पालन (capture fisheries) अलग अवधारणाएँ हैं।
ट्रैप: मत्स्य पालन को केवल समुद्री क्षेत्र से न जोड़ें; भारत के कुल मत्स्य उत्पादन में अंतर्देशीय मत्स्य और जलीय कृषि की बहुत बड़ी भूमिका है।
स्रोत: मत्स्य पालन विभाग, पश्चिम बंगाल समीक्षा बैठक, 21 सितंबर 2026; PMMSY आधिकारिक विवरण.
09
जैविक खेतीमध्यम-उच्च प्राथमिकता

जैविक खेती और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)

क्यों चर्चा में?

पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति किसानों के लिए RKVY समर्थित जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जैव-उर्वरक, जैव-अभिकर्ता, कम्पोस्ट और अंतरफसली दलहन पर प्रशिक्षण दिया गया।

स्थिर कृषि से संबंध

जैविक खेती में संश्लेषित रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए जैविक पदार्थ, फसल चक्र, जैव-उर्वरक, जैव-कीटनियंत्रण और मृदा-जैविकी पर अधिक जोर दिया जाता है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • RKVY की शुरुआत 2007 में कृषि में राज्य निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से हुई।
  • RKVY एक केंद्र प्रायोजित योजना ढाँचा है।
  • जैविक खेती और प्राकृतिक खेती पूर्णतः समान अवधारणाएँ नहीं हैं।
  • जैव-उर्वरक जीवित सूक्ष्मजीवों के माध्यम से पौध-पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ा सकते हैं।
  • दलहनी फसलें Rhizobium के साथ सहजीवी संबंध से जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होती हैं।
ट्रैप: “जैविक खेती” का अर्थ केवल रासायनिक उर्वरक न डालना नहीं; इसमें प्रमाणन, इनपुट प्रबंधन और उत्पादन-पद्धति का व्यापक ढाँचा हो सकता है।
स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, पालमपुर जैविक खेती प्रशिक्षण, 21 सितंबर 2026.
10
कृषि व्यापारअत्यंत उच्च प्राथमिकता

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA): कृषि में संरक्षण और सहयोग

क्यों चर्चा में?

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने की घोषणा हुई। कृषि क्षेत्र में कुछ संवेदनशील भारतीय उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है।

स्थिर कृषि से संबंध

मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कृषि बाजार पहुँच, सीमा शुल्क, आयात प्रतिस्पर्धा, किसान-सुरक्षा और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात से जुड़ा है। इस समझौते में भारत ने डेयरी, अधिकांश पशु-मांस, प्रमुख कृषि वस्तुएँ, चीनी और खाद्य तेल जैसे संवेदनशील उत्पादों को शुल्क रियायत से बाहर रखा है।

प्रारंभिक परीक्षा में याद रखें
  • भारत के 100% निर्यात शुल्क-पंक्तियों (tariff lines) को न्यूज़ीलैंड में समझौता लागू होते ही शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी।
  • भारत ने डेयरी, अधिकांश पशु-मांस, प्रमुख कृषि वस्तुएँ, चीनी और खाद्य तेल को संवेदनशील सूची में सुरक्षित रखा है।
  • न्यूज़ीलैंड के सेब, कीवी और मनुका शहद (Manuka honey) के लिए शुल्क-दर कोटा (Tariff Rate Quota), न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी खिड़कियों जैसी व्यवस्थाएँ हैं।
  • कृषि उत्पादकता भागीदारी (Agriculture Productivity Partnership) के अंतर्गत सेब, कीवी और शहद पर सहयोग प्रस्तावित है।
  • शुल्क-दर कोटा (Tariff Rate Quota) में निश्चित मात्रा तक कम/विशिष्ट शुल्क और उसके ऊपर अलग शुल्क व्यवस्था हो सकती है।
ट्रैप: मुक्त व्यापार समझौता (FTA) का अर्थ हर कृषि उत्पाद पर शून्य शुल्क नहीं है; संवेदनशील उत्पादों को अपवाद या नियंत्रित बाजार पहुँच दी जा सकती है।
स्रोत: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू होने की घोषणा, 21 सितंबर 2026.
45 सेकंड पुनरावृत्ति

इस सप्ताह के सबसे संभावित कृषि ट्रैप

मृदा कार्बन — प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR) + कम जुताई + अवशेष प्रबंधन

AgriStack — किसान रजिस्ट्री (Farmer Registry) + ग्राम मानचित्र + बोई गई फसल रजिस्ट्री (Crop Sown Registry)

भारत विस्तार — किसान-सलाह प्रणाली; AgriStack नहीं

रबी — मानसून बाद बुवाई; गेहूँ–चना–सरसों प्रमुख

FMD — विषाणुजनित • द्विखुरी पशु • NADCP

किशाऊ — टोंस नदी • 97,000 हेक्टेयर सिंचाई

APEDA — वाणिज्य मंत्रालय • कृषि निर्यात

PMMSY — मत्स्य पालन विभाग • जलीय कृषि/मूल्य-शृंखला

RKVY — 2007 • राज्य कृषि निवेश

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) — डेयरी सहित संवेदनशील कृषि उत्पाद सुरक्षित