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UPSC Mains 2016

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1. प्रश्न2. मॉडल उत्तर

प्रश्न

वर्ष एवं प्रश्नपत्र: 2016 | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-I (GS Paper I - भारतीय समाज एवं संविधान)
प्रश्न: "भारत में जनजातियों को 'अनुसूचित जनजातियाँ' (Scheduled Tribes) क्यों कहा जाता है? भारत के संविधान में उनके उत्थान के लिए प्रतिष्ठापित प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।" (Why are the tribals in India referred to as 'the Scheduled Tribes'? Indicate the major provisions enshrined in the Constitution of India for their upliftment.)
अंक एवं शब्द सीमा: 12.5 अंक | 200 शब्द
प्रश्न की माँग (Demand of the Question):
1.
प्रथम भाग: स्पष्ट करें कि आदिवासियों/जनजातियों के लिए संवैधानिक रूप से 'अनुसूचित जनजाति' शब्द का प्रयोग क्यों किया जाता है (ऐतिहासिक एवं अनुच्छेद 342 व 366(25) का संदर्भ)।
2.
द्वितीय भाग: संविधान में उनके संरक्षण, प्रतिनिधित्व और उत्थान के लिए दिए गए प्रमुख प्रावधानों को वर्गीकृत रूप में प्रस्तुत करें (विशेषतः पाँचवीं और छठी अनुसूची सहित)।

मॉडल उत्तर

भारत में जनजातीय समुदायों को 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribes) इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्हें संवैधानिक संरक्षण और सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) का लाभ देने के उद्देश्य से भारत के संविधान के तहत एक आधिकारिक 'अनुसूची' (Schedule/List) में सूचीबद्ध किया गया है।

ऐतिहासिक एवं संवैधानिक कारण:

1.
सर्वप्रथम अनुसूचित जिला अधिनियम, 1874 और भारत शासन अधिनियम, 1935 में पिछड़ी जनजातियों को एक पृथक अनुसूची में रखने की परंपरा शुरू हुई।
2.
संविधान का अनुच्छेद 366(25) परिभाषित करता है कि 'अनुसूचित जनजातियों' से ऐसी जनजातियाँ या जनजातीय समुदाय अभिप्रेत हैं जिन्हें अनुच्छेद 342 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा लोक अधिसूचना के माध्यम से अनुसूचित जनजाति के रूप में विनिर्दिष्ट (Scheduled) किया गया है। लोकर समिति (1965) ने इसके लिए आदिम लक्षण, विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव, संकोची स्वभाव और पिछड़ेपन के 5 मानदंड निर्धारित किए।

उत्थान के लिए प्रमुख संवैधानिक प्रावधान:

1.
प्रशासनिक एवं क्षेत्रीय स्वायत्तता (भाग 10):
अनुच्छेद 244(1) एवं पाँचवीं अनुसूची: 10 राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों में राज्यपाल की विशेष विनियामक शक्तियाँ (भूमि अंतरण एवं साहूकारी पर रोक) और जनजाति सलाहकार परिषद (TAC) का गठन।
अनुच्छेद 244(2) एवं छठी अनुसूची: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के माध्यम से विधायी, न्यायिक और वित्तीय स्वशासन।
2.
शैक्षिक, आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा (भाग 3 एवं 4):
अनुच्छेद 15(4), 16(4) एवं 16(4A): शिक्षा, लोक नियोजन और पदोन्नति में आरक्षण।
अनुच्छेद 46 (DPSP): जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों का संवर्धन तथा शोषण से सुरक्षा।
3.
राजनीतिक एवं संस्थागत प्रावधान:
अनुच्छेद 330, 332 एवं 243D: लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और पंचायतों में सीटों का आरक्षण (पेसा अधिनियम, 1996 के तहत 50% सीटें और 100% अध्यक्ष पद)।
अनुच्छेद 164(1): छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में जनजातीय कल्याण मंत्री की अनिवार्यता।
अनुच्छेद 275(1) एवं 338A: संघ से विशेष सहायता अनुदान तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की स्थापना।

इस प्रकार, भारतीय संविधान 'पृथक्करण' और 'बलात् आत्मसातीकरण' के अतिवाद से बचते हुए 'संरक्षण के साथ सम्मानजनक एकीकरण' का मार्ग प्रशस्त करता है।