प्रश्न
प्रश्न 8 (10 अंक | 150 शब्द): अनुसूचित क्षेत्रों में तेजी से होते नगरीकरण ने किस प्रकार संवैधानिक सुरक्षा कवच को कमजोर किया है? इस संदर्भ में अनुच्छेद 243ZC के तहत 'मेसा' (MESA) कानून की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।
मॉडल उत्तर
परिचय: संविधान के अनुच्छेद 243M और अनुच्छेद 243ZC के तहत पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों को क्रमशः भाग 9 (पंचायत) और भाग 9क (नगरपालिकाएँ) के सामान्य प्रवर्तन से छूट दी गई थी ताकि जनजातीय स्वशासन और प्रथागत कानूनों की रक्षा हो सके।
नगरीकरण से उत्पन्न संवैधानिक शून्य (Constitutional Vacuum):
1.
ग्रामीण अनुसूचित क्षेत्रों के लिए तो संसद ने अनुच्छेद 243M(4)(b) के तहत 1996 में पेसा अधिनियम (PESA) पारित कर ग्राम सभाओं को सशक्त कर दिया, किंतु अनुच्छेद 243ZC(3) के तहत नगरीय अनुसूचित क्षेत्रों के लिए आज तक 'नगरपालिका (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम' (MESA) पारित नहीं किया गया है।
2.
परिणामस्वरूप, जैसे ही झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा या गुजरात के किसी खनन/औद्योगिक अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम पंचायत को 'नगर पंचायत' या 'नगरपालिका' में बदला जाता है, वहाँ पेसा अधिनियम के सुरक्षा कवच (ग्राम सभा का परामर्श, अध्यक्ष पद पर 100% ST आरक्षण, भूमि अंतरण पर रोक) स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
3.
कई राज्यों में भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की बाधा से बचने के लिए जानबूझकर आदिवासी गाँवों को नगरीय निकाय घोषित करने की प्रवृत्ति देखी गई है।
निष्कर्ष: भूरिया समिति (1995) की सिफारिश के अनुरूप संसद को तत्काल मेसा अधिनियम (MESA Act) पारित करना चाहिए ताकि नगरीय अनुसूचित क्षेत्रों में भी 'मुहल्ला सभाओं' और जनजातीय अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण मिल सके।