प्रश्न
प्रश्न 6 (10 अंक | 150 शब्द): पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत गठित 'जनजाति सलाहकार परिषद' (Tribes Advisory Council - TAC) की संरचना और कार्यों का वर्णन कीजिए। यह संस्था अपने संवैधानिक उद्देश्य को प्राप्त करने में क्यों विफल रही है?
मॉडल उत्तर
परिचय: संविधान की पाँचवीं अनुसूची के पैराग्राफ 4 के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य में (तथा राष्ट्रपति के निदेश पर केवल अनुसूचित जनजाति वाले राज्यों में भी) जनजाति सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council - TAC) के गठन का प्रावधान है।
संरचना एवं कार्य:
इसमें अधिकतम 20 सदस्य होते हैं, जिनमें से तीन-चौथाई (15 सदस्य) राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के विधायक (ST MLAs) होते हैं।
इसका कार्य राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित उन विषयों पर सलाह देना है जो राज्यपाल द्वारा इसे निर्दिष्ट किए जाएँ। पैरा 5 के तहत राज्यपाल कोई भी विनियम बनाने से पूर्व TAC से परामर्श करते हैं।
अपने उद्देश्य में विफल रहने के कारण:
1.
स्वतः संज्ञान (Suo-motu) की शक्ति का अभाव: TAC केवल उन्हीं मुद्दों पर चर्चा कर सकती है जो राज्यपाल द्वारा उसे भेजे जाएँ।
2.
सलाह की गैर-बाध्यकारी प्रकृति: इसकी सिफारिशें केवल परामर्शकारी हैं, राज्य सरकार उन्हें मानने के लिए बाध्य नहीं है।
3.
मुख्यमंत्री का वर्चस्व एवं दलीय राजनीति: राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियमों के तहत अधिकांश राज्यों में गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री ही इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं और आदिवासी विधायक दलीय व्हिप व अनुशासन के कारण सरकार की जनजाति-विरोधी नीतियों का खुलकर विरोध नहीं कर पाते।
निष्कर्ष: खाखा समिति (2014) के सुझाव के अनुसार TAC को स्वायत्त सचिवालय, स्वतः संज्ञान की शक्ति और बाध्यकारी परामर्श का दर्जा दिया जाना आवश्यक है।