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भारतीय राजव्यवस्था • मुख्य परीक्षा अभ्यास

अभ्यास प्रश्न 5

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1. प्रश्न2. मॉडल उत्तर

प्रश्न

प्रश्न 5 (10 अंक | 150 शब्द): लद्दाख द्वारा संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की माँग के पीछे क्या कारण हैं? लद्दाख में छठी अनुसूची के विस्तार से जुड़ी संवैधानिक, सामरिक और प्रशासनिक जटिलताओं का परीक्षण कीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय: वर्ष 2019 में जम्मू और कश्मीर के पुनर्गठन के बाद केंद्र शासित प्रदेश बने लद्दाख में वहाँ की जनजातीय आबादी द्वारा संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की माँग लगातार की जा रही है, जिसका समर्थन सितंबर 2019 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी किया था।

माँग के प्रमुख कारण:

1.
जनसांख्यिकीय स्वरूप: लद्दाख की 97% से अधिक जनसंख्या अनुसूचित जनजाति (बोट, बाल्टी, चांगपा, ब्रोकपा आदि) है।
2.
भूमि, रोजगार और पारिस्थितिकी की सुरक्षा: अनुच्छेद 370 और 35A के हटने के बाद स्थानीय लोगों में बाहरी लोगों द्वारा भूमि खरीदने, नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी के दोहन और नौकरियों में हिस्सेदारी घटने की आशंका है।
3.
पहाड़ी परिषदों की सीमित शक्ति: वर्तमान लेह और कारगिल स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदें (LAHDCs) केवल कार्यपालिका/विकासात्मक निकाय हैं, उनके पास छठी अनुसूची की ADCs जैसी विधायी शक्तियाँ नहीं हैं।

प्रमुख संवैधानिक और सामरिक जटिलताएँ:

संवैधानिक सीमा: अनुच्छेद 244(2) छठी अनुसूची को केवल 4 पूर्वोत्तर राज्यों तक सीमित करता है; इसे केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख पर लागू करने के लिए संविधान संशोधन आवश्यक है।
सामरिक संवेदनशीलता: चीन और पाकिस्तान की सीमा (LAC और LoC) से सटे होने के कारण रक्षा अवसंरचना और सीमा सड़कों के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण में स्वायत्त परिषद के अवरोधों को लेकर केंद्र सरकार सतर्क है।

निष्कर्ष: लद्दाख की सामरिक आवश्यकता और जनजातीय आकांक्षाओं के बीच संतुलन साधने के लिए अनुच्छेद 371 के तहत विशेष भूमि व रोजगार संरक्षण तथा LAHDCs को विधायी-वित्तीय रूप से सशक्त करना एक व्यावहारिक मध्यमार्ग हो सकता है।