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भारतीय राजव्यवस्था • मुख्य परीक्षा अभ्यास

अभ्यास प्रश्न 4

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1. प्रश्न2. मॉडल उत्तर

प्रश्न

प्रश्न 4 (15 अंक | 250 शब्द): पूर्वोत्तर भारत में स्वायत्त जिला परिषदों (Autonomous District Councils - ADCs) ने नृजातीय आकांक्षाओं को संतुष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, किंतु वे स्वयं गंभीर संरचनात्मक और वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही हैं। संविधान (125वाँ संशोधन) विधेयक के आलोक में इन चुनौतियों और आवश्यक सुधारों का विश्लेषण कीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय: संविधान की छठी अनुसूची [अनुच्छेद 244(2)] के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में कार्यरत 10 स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) ने पूर्वोत्तर की जनजातियों को 'राज्य के भीतर राज्य' जैसी विधायी, न्यायिक और कार्यकारी स्वायत्तता देकर राष्ट्र-निर्माण और उग्रवाद-शमन में ऐतिहासिक योगदान दिया है।

स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:

1.
वित्तीय परनिर्भरता एवं संसाधन संकट: ADCs के पास कर लगाने के सीमित स्रोत हैं। अनुच्छेद 275 के तहत मिलने वाला अनुदान राज्य सरकारों के माध्यम से आता है, जिसे राज्य सरकारें प्रायः रोक लेती हैं या देरी से जारी करती हैं।
2.
जमीनी लोकतंत्र (Grassroots Democracy) का अभाव: छठी अनुसूची में भाग 9 (पंचायती राज) लागू नहीं होने के कारण शक्ति जिला परिषद के शीर्ष अभिजात वर्ग तक सिमट गई है और ग्राम स्तर पर निर्वाचित संस्थाओं का अभाव है।
3.
महिला प्रतिनिधित्व की कमी: 30-सदस्यीय परिषदों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।
4.
अनियमित चुनाव और दल-बदल: चुनावों का संचालन राज्य सरकार के विभागों द्वारा होने से चुनाव समय पर नहीं होते और दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) लागू न होने से परिषदों में राजनीतिक अस्थिरता बनी रहती है।
5.
राज्यपाल की अनुमति में विलंब: पैरा 3 के तहत परिषदों द्वारा पारित विधेयकों को राज्यपाल की अनुमति मिलने में वर्षों लग जाते हैं।

संविधान (125वाँ संशोधन) विधेयक के माध्यम से प्रस्तावित सुधार:

1.
त्रि-स्तरीय लोकतंत्र: स्वायत्त जिलों में निर्वाचित ग्राम परिषदों और नगर परिषदों का गठन तथा महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण।
2.
वित्तीय स्वायत्तता: अनुच्छेद 280 में संशोधन कर केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग के माध्यम से ADCs को सीधा वित्तीय हस्तांतरण।
3.
लोकतांत्रिक जवाबदेही: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा समयबद्ध चुनाव और सदस्यों पर दल-बदल विरोधी नियमों का लागू होना।

निष्कर्ष: 125वें संविधान संशोधन विधेयक को शीघ्र पारित करना छठी अनुसूची की संस्थाओं को अधिक लोकतांत्रिक, जवाबदेह और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे ठोस कदम होगा।