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भारतीय राजव्यवस्था • मुख्य परीक्षा अभ्यास

अभ्यास प्रश्न 3

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1. प्रश्न2. मॉडल उत्तर

प्रश्न

प्रश्न 3 (10 अंक | 150 शब्द): "पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) ने अनुसूचित क्षेत्रों में 'प्रतिनिधित्वमूलक लोकतंत्र' को 'सहभागी लोकतंत्र' में बदलने की परिकल्पना की थी, किंतु इसके तीन दशक बाद भी इसका क्रियान्वयन अधूरा है।" चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय: दिलीप सिंह भूरिया समिति की सिफारिश पर अधिनियमित पेसा अधिनियम, 1996 ने संविधान के भाग 9 का विस्तार पाँचवीं अनुसूची के 10 राज्यों में करते हुए पारंपरिक ग्राम सभा को स्वशासन की धुरी बनाया और 'प्रतिनिधित्वमूलक लोकतंत्र' को 'प्रत्यक्ष सहभागी लोकतंत्र' में बदलने की क्रांतिकारी पहल की।

सहभागी लोकतंत्र के प्रमुख प्रावधान (धारा 4):

ग्राम सभा को परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण की सर्वोच्च शक्ति;
लघु वनोपज (MFP) का स्वामित्व, ग्रामीण बाजारों और लघु जल निकायों का प्रबंधन;
भूमि अधिग्रहण से पूर्व अनिवार्य परामर्श, अवैध रूप से हस्तांतरित जनजातीय भूमि की वापसी और गौण खनिजों के पट्टे हेतु अनिवार्य पूर्व सिफारिश।

तीन दशक बाद भी क्रियान्वयन अधूरा क्यों है?

1.
नियम निर्माण में उदासीनता: झारखंड और ओडिशा जैसे प्रमुख जनजातीय राज्यों में दशकों तक राज्य पेसा नियम (State PESA Rules) अधिसूचित नहीं किए गए।
2.
असंगत राज्य कानून: राज्यों के वन, आबकारी और खनन कानूनों को पेसा के अनुरूप संशोधित नहीं किया गया (जैसे—लघु वनोपज पर आज भी वन निगमों का एकाधिकार)।
3.
परामर्श बनाम सहमति: भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा के 'परामर्श' को 'सहमति' नहीं माना जाता और कई बार फर्जी ग्राम सभा प्रस्तावों की शिकायतें आती हैं।

निष्कर्ष: पेसा की वास्तविक भावना को साकार करने के लिए सभी केंद्रीय व राज्य कानूनों का पेसा से सामंजस्य (Harmonization) और ग्राम सभाओं का वित्तीय-प्रशासनिक क्षमता निर्माण अनिवार्य है।