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भारतीय राजव्यवस्था • मुख्य परीक्षा अभ्यास

अभ्यास प्रश्न 2

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1. प्रश्न2. मॉडल उत्तर

प्रश्न

प्रश्न 2 (15 अंक | 250 शब्द): भारतीय संविधान की पाँचवीं अनुसूची और छठी अनुसूची के अंतर्गत जनजातीय प्रशासन के प्रतिमानों (Models) की तुलना कीजिए। क्या पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें छठी अनुसूची में स्थानांतरित किया जाना चाहिए? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय: भारतीय संविधान के भाग 10 के अंतर्गत पाँचवीं अनुसूची [अनुच्छेद 244(1)] और छठी अनुसूची [अनुच्छेद 244(2)] जनजातीय प्रशासन के दो भिन्न ऐतिहासिक और मानवशास्त्रीय प्रतिमानों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

दोनों प्रतिमानों की मुख्य तुलना:

1.
प्रशासनिक दर्शन: पाँचवीं अनुसूची (ठक्कर समिति आधारित) 'संरक्षणवादी एवं कार्यपालिका-केंद्रित' मॉडल है, जो 10 मुख्यभूमि राज्यों में राज्यपाल और सलाहकार प्रकृति की जनजाति सलाहकार परिषद (TAC) के माध्यम से कार्य करता है। इसके विपरीत, छठी अनुसूची (बोरदोलोई समिति आधारित) 'स्वशासन एवं स्वायत्तता-आधारित' मॉडल है, जो असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में निर्वाचित स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) को विधायी, न्यायिक और कराधान शक्तियाँ देता है।
2.
स्थानीय निकाय: पाँचवीं अनुसूची में पेसा (PESA, 1996) के तहत ग्राम सभा सशक्त है, जबकि छठी अनुसूची में जिला स्तर पर ADC शक्तिशाली है।

क्या पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों को छठी अनुसूची में स्थानांतरित किया जाना चाहिए?

पक्ष में तर्क: पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में राज्यपाल और TAC की निष्क्रियता के कारण बड़े पैमाने पर भूमि हस्तांतरण और विस्थापन हुआ है। छठी अनुसूची की तरह विधायी और वित्तीय शक्तियाँ मिलने से जनजातीय समुदाय अपनी भूमि और संसाधनों की स्वयं रक्षा कर सकेंगे (पेसा की धारा 4(o) भी जिला स्तर पर छठी अनुसूची के प्रतिमान का सुझाव देती है)।
विपक्ष में व्यावहारिक एवं जनसांख्यिकीय तर्क:
1.
मिश्रित जनसांख्यिकी: छठी अनुसूची के अधिकांश जिलों में जनजातीय आबादी 80%–95% तक सघन और समरूप है, जबकि पाँचवीं अनुसूची के अधिकांश जिलों में जनजातीय और गैर-जनजातीय आबादी (50%–60%) मिश्रित रूप से रहती है। वहाँ छठी अनुसूची लागू करने से तीखे नृजातीय संघर्ष पैदा हो सकते हैं।
2.
छठी अनुसूची की अपनी सीमाएँ: छठी अनुसूची की ADCs स्वयं ग्राम-स्तरीय लोकतंत्र के अभाव, भ्रष्टाचार और वित्तीय संकट से जूझ रही हैं।

निष्कर्ष: समाधान पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों को यांत्रिक रूप से छठी अनुसूची में बदलने में नहीं, बल्कि पेसा अधिनियम (1996) और वनाधिकार अधिनियम (2006) को पूर्ण राजनीतिक इच्छाशक्ति से लागू कर 'पाँचवीं अनुसूची + सशक्त ग्राम सभा' के मॉडल को धरातल पर उतारने में निहित है।