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भारतीय राजव्यवस्था • मुख्य परीक्षा अभ्यास

अभ्यास प्रश्न 10

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1. प्रश्न2. मॉडल उत्तर

प्रश्न

प्रश्न 10 (15 अंक | 250 शब्द): वामपंथी उग्रवाद (Left-Wing Extremism) में कमी लाने और जनजातीय विश्वास बहाली में पाँचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम (1996) और वनाधिकार अधिनियम (2006) की त्रयी (Trinity) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय: भारत में वामपंथी उग्रवाद (Left-Wing Extremism - LWE) केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में जनजातीय भूमि के हस्तांतरण, वनों से बेदखली, खनन-जनित विस्थापन और प्रशासनिक उपेक्षा में रही हैं। इस असंतोष को लोकतांत्रिक रूप से समाप्त करने के लिए भारतीय राज्य के पास पाँचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम (1996) और वनाधिकार अधिनियम (FRA, 2006) की संवैधानिक-वैधानिक त्रयी (Trinity) सबसे सशक्त हथियार है।

इस त्रयी की भूमिका का मूल्यांकन:

1.
जल-जंगल-जमीन पर वैधानिक अधिकार की बहाली:
उग्रवादी संगठनों का मुख्य नारा 'जल, जंगल, जमीन' रहा है। पाँचवीं अनुसूची का पैरा 5(2) जनजातीय भूमि के गैर-जनजातियों को हस्तांतरण पर रोक लगाता है, जबकि FRA (2006) व्यक्तिगत (4 हेक्टेयर तक) और सामुदायिक वन संसाधनों (CFR) पर आदिवासियों को कानूनी पट्टा देता है।
2.
आर्थिक शोषण से मुक्ति और आजीविका सुरक्षा:
पेसा की धारा 4(m) के तहत तेंदू पत्ता, बाँस और महुआ जैसी लघु वनोपज (MFP) का स्वामित्व ग्राम सभा को मिलने से ठेकेदारों और बिचौलियों का शोषण रुका है तथा आदिवासियों की आय में वृद्धि हुई है।
3.
लोकतांत्रिक अलगाव (Democratic Deficit) की समाप्ति:
पेसा अधिनियम द्वारा पारंपरिक ग्राम सभा को विकास योजनाओं के अनुमोदन, बाजार प्रबंधन और विवाद समाधान की शक्ति मिलने से आदिवासी युवाओं का लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास बढ़ा है (उदाहरणार्थ—छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जिन जिलों में CFR पट्टे और पेसा प्रभावी ढंग से लागू हुए, वहाँ नक्सली भर्ती में भारी गिरावट आई)।

सीमाएँ एवं कमियाँ (योजना आयोग के डी. बंद्योपाध्याय विशेष समूह, 2008 का निष्कर्ष):

भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की अनदेखी, वन अधिकार दावों की अस्वीकृति और पेसा नियमों के कमजोर प्रवर्तन के कारण कई क्षेत्रों में यह त्रयी कागजों तक सीमित रही, जिसका लाभ उग्रवादी तत्वों ने उठाया।

निष्कर्ष: सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने वामपंथी उग्रवाद के भौगोलिक दायरे को संकुचित किया है, किंतु स्थायी शांति तभी संभव है जब पाँचवीं अनुसूची, पेसा और वनाधिकार अधिनियम का अक्षरशः क्रियान्वयन कर प्रत्येक आदिवासी गाँव में संवैधानिक स्वशासन स्थापित किया जाए।