S. P. Gupta v. Union of India (1981) PIL के विकास के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 47 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 8प्रश्न 47 / 50

विकल्प

Aइसने public-interest standing को व्यापक रूप से मान्यता दी और उपयुक्त bona fide व्यक्ति को उन लोगों की ओर से न्यायालय आने की गुंजाइश मजबूत की जो गरीबी, असमर्थता या सामाजिक बाधा से स्वयं न्यायालय नहीं पहुँच सकते।
Bइसने PIL पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
Cइसने केवल अधिवक्ताओं को PIL दाखिल करने की अनुमति दी।
Dइसने सार्वजनिक हित में standing को पारंपरिक निजी अधिकार तक सीमित कर दिया।
सही उत्तर: A. इसने public-interest standing को व्यापक रूप से मान्यता दी और उपयुक्त bona fide व्यक्ति को उन लोगों की ओर से न्यायालय आने की गुंजाइश मजबूत की जो गरीबी, असमर्थता या सामाजिक बाधा से स्वयं न्यायालय नहीं पहुँच सकते।
सही उत्तर (a) है। S.P. Gupta judgment ने locus standi के उदारीकरण को doctrinal आधार दिया। Justice P.N. Bhagwati की reasoning ने यह स्वीकार किया कि जहाँ public wrong या कमजोर वर्गों के अधिकार प्रभावित हों और पीड़ित स्वयं न्यायालय न पहुँच सके, वहाँ bona fide public-spirited person न्यायालय का ध्यान आकर्षित कर सकता है। इसी व्यापक access-to-justice philosophy ने epistolary jurisdiction—पत्रों को भी उचित मामलों में petition के रूप में देखने—के विकास को बल दिया।

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