संसदीय समितियों की सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अधिकांश समिति-रिपोर्टें सलाहकारी प्रकृति की होती हैं और सरकार पर स्वतः विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं होतीं। 2. कुछ वित्तीय समितियों—विशेषकर PAC—का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाने के बाद लेखों और लेखापरीक्षण की 'post-mortem' जाँच करता है, जबकि सभी संसदीय समितियों पर यह सीमा समान रूप से लागू नहीं होती। 3. समितियाँ सामान्यतः दिन-प्रतिदिन के कार्यपालिका प्रशासन को अपने हाथ में नहीं लेतीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 50 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 7प्रश्न 50 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
सही उत्तर (d) है। समिति-प्रणाली संसद को विस्तृत जाँच का समय देती है, लेकिन उसकी रिपोर्टें सामान्यतः advisory होती हैं और अंतिम राजनीतिक/विधायी निर्णय सदन या सरकार पर रहता है। PAC का काम काफी हद तक expenditure के बाद audit-based scrutiny है, इसलिए उसे post-mortem financial control कहा जाता है; यह विशेषता हर समिति पर लागू नहीं—DRSCs bills और Demands for Grants को पहले भी जाँचती हैं। समितियाँ oversight करती हैं, रोजमर्रा का प्रशासन स्वयं नहीं चलातीं।

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