राज्यसभा के सभापति (Chairman of Rajya Sabha) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। 2. सभापति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता। 3. सभापति पद से हटना उपराष्ट्रपति पद से हटने से जुड़ा है। 4. किसी विधेयक को धन विधेयक प्रमाणित करने की शक्ति राज्यसभा सभापति के पास नहीं होती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 13 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 7प्रश्न 13 / 50

विकल्प

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4
Cकेवल 1 और 4
D1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: D. 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 64 उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का पदेन सभापति बनाता है, लेकिन वह राज्यसभा का सदस्य नहीं होता। इसलिए उसका पद राज्यसभा सदस्यता पर नहीं, उपराष्ट्रपति पद पर आधारित है। धन विधेयक का प्रमाणीकरण अनुच्छेद 110(3) के तहत लोकसभा अध्यक्ष की विशिष्ट शक्ति है। संयुक्त बैठक की सामान्य अध्यक्षता भी लोकसभा अध्यक्ष करते हैं। इसलिए चारों कथन राज्यसभा सभापति की संवैधानिक स्थिति को सही दर्शाते हैं।

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