लोकसभा उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) के पद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपाध्यक्ष का चुनाव अध्यक्ष के चुनाव के बाद होता है और चुनाव की तारीख लोकसभा अध्यक्ष तय करते हैं। 2. उपाध्यक्ष अध्यक्ष का अधीनस्थ नहीं होता; वह सीधे सदन के प्रति उत्तरदायी स्वतंत्र संवैधानिक पदाधिकारी है। 3. 11वीं लोकसभा के बाद सत्ता पक्ष से अध्यक्ष और विपक्ष से उपाध्यक्ष चुने जाने की एक संसदीय परंपरा विकसित हुई, यद्यपि यह बाध्यकारी संवैधानिक नियम नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 11 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 7प्रश्न 11 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 93 लोकसभा को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने का निर्देश देता है। उपाध्यक्ष अध्यक्ष का कर्मचारी या अधीनस्थ नहीं, बल्कि सदन द्वारा चुना गया स्वतंत्र पीठासीन अधिकारी है। 1990 के दशक से उपाध्यक्ष पद विपक्ष को देने की एक राजनीतिक परंपरा विकसित हुई, पर यह संविधान या नियमों में बाध्यकारी नहीं है और हाल की लोकसभाओं में इसका निरंतर पालन भी नहीं हुआ। इसलिए इसे संवैधानिक अधिकार की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।

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