राष्ट्रपति के 'परिस्थितिगत विवेक' (Situational Discretion) के उदाहरणों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हो सकते हैं? 1. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति। 2. ऐसे मंत्रिमंडल को पद छोड़ने के लिए बाध्य करना जिसने लोकसभा का विश्वास खो दिया हो लेकिन इस्तीफा न दे। 3. लोकसभा में बहुमत खो चुकी मंत्रिपरिषद की सलाह पर लोकसभा भंग करने से इंकार करना और वैकल्पिक सरकार की संभावना तलाशना। उपर्युक्त में से कौन-से शामिल हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 16 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 6प्रश्न 16 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
सही उत्तर (d) है। सामान्य स्थिति में राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे रहते हैं, पर अस्पष्ट बहुमत या सरकार के विश्वास खोने जैसी असाधारण राजनीतिक स्थितियों में सीमित परिस्थितिगत विवेक सामने आता है। राष्ट्रपति का लक्ष्य अपना राजनीतिक विकल्प थोपना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रधानमंत्री लोकसभा का विश्वास रखता हो। त्रिशंकु सदन में किसे आमंत्रित किया जाए और पराजित मंत्रिपरिषद की विघटन-सलाह स्वीकार की जाए या वैकल्पिक सरकार की संभावना देखी जाए—ये इसी श्रेणी के उदाहरण हैं।

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