ब्रिटिश संसदीय मॉडल और भारतीय संसदीय मॉडल के मध्य भिन्नताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश संसद संप्रभु है, जबकि भारत में संसद की शक्तियाँ लिखित संविधान और न्यायिक समीक्षा से सीमित हैं। 2. ब्रिटेन में प्रधानमंत्री केवल निचले सदन (हाउस ऑफ कॉमन्स) का सदस्य होना चाहिए, जबकि भारत में प्रधानमंत्री संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो सकता है। 3. ब्रिटेन में मंत्रियों की विधिक जिम्मेदारी (Legal Responsibility) होती है, जबकि भारत में मंत्रियों के लिए ऐसी कोई समान संवैधानिक विधिक जिम्मेदारी नहीं है। 4. ब्रिटेन में 'छाया मंत्रिमंडल' (Shadow Cabinet) की संस्था है, जबकि भारत में ऐसी कोई आधिकारिक संवैधानिक संस्था नहीं है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 3 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 5प्रश्न 3 / 50

विकल्प

Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 4
Cकेवल 1 और 4
D1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: D. 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर (d) है। चारों कथन सही हैं। ब्रिटेन में संसदीय संप्रभुता का सिद्धांत प्रभावी है, जबकि भारत में संविधान सर्वोच्च है और संसद न्यायिक समीक्षा तथा संवैधानिक सीमाओं के अधीन है। भारत में प्रधानमंत्री लोकसभा या राज्यसभा—किसी भी सदन से हो सकता है; ब्रिटिश परंपरा में प्रधानमंत्री हाउस ऑफ कॉमन्स से होता है। भारत में मंत्रियों के कार्यों पर ब्रिटेन जैसी औपचारिक कानूनी प्रतिहस्ताक्षर-जिम्मेदारी नहीं है, और 'Shadow Cabinet' भारत की संवैधानिक व्यवस्था का आधिकारिक अंग नहीं है।

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