शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ मामला (1951) में उच्चतम न्यायालय ने पहले संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 की वैधता की समीक्षा करते हुए क्या निर्णय दिया था?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 43 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 4प्रश्न 43 / 50

विकल्प

Aसंसद मूल अधिकारों में कोई संशोधन नहीं कर सकती।
Bअनुच्छेद 368 के तहत संसद की संविधान संशोधन की शक्ति में मूल अधिकारों में संशोधन करने की शक्ति भी शामिल है।
Cसंविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के तहत एक सामान्य कानून है।
Dसंपत्ति का अधिकार संविधान के आधारभूत ढांचे का अंग है।
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 368 के तहत संसद की संविधान संशोधन की शक्ति में मूल अधिकारों में संशोधन करने की शक्ति भी शामिल है।
शंकरी प्रसाद मामले (1951) में न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन की शक्ति में मौलिक अधिकारों में संशोधन शामिल है और अनुच्छेद 13 में 'विधि' शब्द केवल सामान्य विधियों पर लागू होता है, संविधान संशोधन पर नहीं।

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