केशवानंद भारती मामले (1973) में उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 368 के संबंध में दी गई व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 4 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 3प्रश्न 4 / 50

विकल्प

Aसंविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के तहत एक 'विधि' है, अतः किसी भी मूल अधिकार को संशोधित नहीं किया जा सकता।
Bसंसद किसी भी मूल अधिकार को संशोधित कर सकती है, किंतु ऐसा संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं कर सकता।
Cसंविधान संशोधन पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर है।
Dअनुच्छेद 368 के तहत संशोधन केवल राज्य सूची के विषयों पर ही लागू हो सकता है।
सही उत्तर: B. संसद किसी भी मूल अधिकार को संशोधित कर सकती है, किंतु ऐसा संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं कर सकता।
केशवानंद भारती मामले (1973) में न्यायालय ने कहा कि संसद मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह संविधान के आधारभूत ढांचे (Basic Structure) को नष्ट न करे।

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