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संविधान के अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता / Uniform Civil Code) के विधिक स्वरूप और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 44 राज्य पर यह दायित्व डालता है कि वह भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा। 2. शाह बानो मामला (1985) और सरला मुद्गल मामला (1995) में उच्चतम न्यायालय ने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रगति न होने पर चिंता व्यक्त की थी। 3. समान नागरिक संहिता एक स्वतः लागू होने वाला प्रावधान है और किसी भी नागरिक द्वारा इसे लागू कराने के लिए अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 41 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 19प्रश्न 41 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: A. केवल 1 और 2
कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 44, अनुच्छेद 37 के कारण न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय मौलिक अधिकार नहीं है। फिर भी विधानमंडल इस दिशा में कानून बना सकते हैं। वर्तमान उदाहरण के रूप में Uttarakhand Uniform Civil Code 27 जनवरी 2025 से लागू है और 2026 में उसमें संशोधन भी हुए हैं। कथन 1 और 2 सही हैं।

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