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संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उच्चतम न्यायालय की पूर्ण न्याय करने की शक्ति ( Power to do Complete Justice) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उच्चतम न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए ऐसा आदेश या डिक्री पारित कर सकता है जो उसके समक्ष लंबित किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो। 2. अनुच्छेद 142 के तहत पारित आदेश पूरे भारत में संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के तहत लागू होने तक उसी रीति से प्रवर्तनीय होता है। 3. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (1998) मामले में न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 142 की शक्ति का प्रयोग मूल सांविधिक कानूनों या मौलिक अधिकारों के स्पष्ट उल्लंघन में नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 45 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 18प्रश्न 45 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट की एक अद्वितीय असाधारण शक्ति है, किंतु यह शक्ति विधायी शून्यता को भरने के लिए है, विधायिका के स्पष्ट कानूनों को पूरी तरह दरकिनार करने के लिए नहीं।

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