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संविधान के अनुच्छेद 292 और 293 के तहत क्रमशः केंद्र और राज्यों की ऋण लेने की शक्तियों ( Borrowing Powers) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्र सरकार भारत की संचित निधि की प्रतिभूति पर देश के भीतर और विदेशों से भी ऋण ले सकती है, संसद द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर। 2. राज्य सरकार केवल भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर ही ऋण ले सकती है, विदेशों से सीधे वाणिज्यिक ऋण नहीं ले सकती। 3. यदि किसी राज्य पर केंद्र सरकार का कोई पुराना ऋण बकाया है, तो वह राज्य केंद्र की पूर्व सहमति के बिना कोई नया ऋण नहीं ले सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 7 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 18प्रश्न 7 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 292 केंद्र को विदेशी ऋण की शक्ति देता है, जबकि 293 राज्यों को केवल घरेलू ऋण तक सीमित रखता है और बकाया केंद्रीय ऋण की स्थिति में केंद्र की पूर्व अनुमति अनिवार्य करता है।

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