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स्थायी लोक अदालतों ( Permanent Lok Adalats) के संदर्भ में वर्ष 2002 के संशोधन द्वारा किए गए विशेष प्रावधानों पर विचार कीजिए: 1. स्थायी लोक अदालतों की स्थापना सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं ( Public Utility Services जैसे परिवहन, डाक, टेलीफोन, विद्युत, जल, अस्पताल आदि) से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए की गई है। 2. यदि दोनों पक्षों के बीच सुलह या समझौता नहीं हो पाता है, तो भी स्थायी लोक अदालत को विवाद का गुण-दोष के आधार पर निर्णय (Decide on merits) करने का वैधानिक अधिकार है। 3. स्थायी लोक अदालत का निर्णय दोनों पक्षों पर अंतिम और बाध्यकारी होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 50 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 17प्रश्न 50 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। Permanent Lok Adalat public utility services के pre-litigation disputes में पहले conciliation का प्रयास करती है और समझौता न होने पर, गैर-समझौतायोग्य अपराध से जुड़े मामलों को छोड़कर, merits पर निर्णय दे सकती है। वर्तमान वैधानिक pecuniary jurisdiction अधिकतम ₹1 करोड़ तक बढ़ाई जा चुकी है; उसका award final and binding होता है।

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