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कृष्ण कु मार सिंह बनाम बिहार राज्य (2017) मामले में उच्चतम न्यायालय की 7-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अध्यादेश शक्ति पर क्या युगांतकारी निर्णय दिया? 1. अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति का प्रयोग अनिवार्य रूप से विधायिका के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और अध्यादेश को विधायिका के पटल पर रखना एक अनिवार्य संवैधानिक आवश्यकता है। 2. अध्यादेश को विधायिका के पटल पर न रखना एक गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है। 3. अध्यादेश के समाप्त हो जाने पर उसके तहत सृजित सभी अधिकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं, जब तक कि लोकहित में उन्हें अपरिवर्तनीय न माना जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 15 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 17प्रश्न 15 / 50

विकल्प

Aकेवल 1 और 2
Bकेवल 2 और 3
Cकेवल 1 और 3
D1, 2 और 3
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। 2017 के 7-न्यायाधीशों के फैसले ने कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों के दुरुपयोग पर सख्त सीमाएं तय कीं और सदन के पटल पर रखने को अनिवार्य घोषित किया।

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