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अध्यादेशों के बार-बार पुनः प्रख्यापन ( Re-promulgation of Ordinances) के संदर्भ में डी. सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987) मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने क्या व्यवस्था दी?

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास · प्रश्न 14 / 50

भारतीय राजव्यवस्था — सेट 17प्रश्न 14 / 50

विकल्प

Aकार्यपालिका अनिश्चित काल तक जितनी बार चाहे अध्यादेश को पुनः प्रख्यापित कर सकती है।
Bविधानमंडल के समक्ष विधेयक पेश किए बिना अध्यादेशों को बार-बार पुनः प्रख्यापित करना संविधान के साथ एक धोखा (Fraud on the Constitution) और असंवैधानिक है।
Cअध्यादेशों का पुनः प्रख्यापन केवल राष्ट्रपति की लिखित अनुमति से ही संभव है।
Dअध्यादेश केवल वित्तीय आपातकाल के दौरान ही पुनः प्रख्यापित किए जा सकते हैं।
सही उत्तर: B. विधानमंडल के समक्ष विधेयक पेश किए बिना अध्यादेशों को बार-बार पुनः प्रख्यापित करना संविधान के साथ एक धोखा (Fraud on the Constitution) और असंवैधानिक है।
डी. सी. वाधवा मामले (1987) में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि बिहार सरकार ने 1967 से 1981 के बीच विधानमंडल को दरकिनार कर सैकड़ों अध्यादेशों को बार-बार प्रख्यापित किया। न्यायालय ने इसे कार्यपालिका द्वारा विधायिका की शक्ति हड़पने का असंवैधानिक कृत्य और संविधान के साथ धोखा माना।

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