1.4.4 कायांतरित शैल

पहले से मौजूद आग्नेय, अवसादी या पुरानी कायांतरित शैल जब पृथ्वी के भीतर ताप, दबाव, तनाव और रासायनिक रूप से सक्रिय द्रवों के प्रभाव से बिना पूर्ण रूप से पिघले अपनी खनिजीय संरचना और बनावट बदलती है, तो बनने वाली नई शैल को कायांतरित शैल (Metamorphic Rock) कहा जाता है।

इस परिवर्तन की प्रक्रिया कायांतरण (Metamorphism) कहलाती है।

सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा-बिंदु

कायांतरण में शैल सामान्यतः पिघलती नहीं है।

यदि शैल पूरी तरह पिघल जाए तो मैग्मा बनेगा और उसके ठंडने से आग्नेय शैल बनेगी।

मूलशैल

जिस पुरानी शैल से कायांतरित शैल बनती है उसे मूलशैल (Protolith) कहते हैं।

उदाहरण—

कायांतरण के प्रमुख कारक

ताप

ताप खनिजों को पुनःक्रिस्टलीकृत कर सकता है और नए खनिज बनने की रासायनिक अभिक्रियाएँ प्रारंभ करता है।

दबाव

गहराई के साथ सर्वदिशीय दबाव बढ़ता है।

यह खनिजों को अधिक घनी संरचनाओं में बदल सकता है।

दिशात्मक तनाव

पर्वतनिर्माण क्षेत्रों में एक दिशा से अधिक तनाव खनिजों को समान दिशा में व्यवस्थित कर सकता है।

इससे पर्णन विकसित हो सकता है।

रासायनिक रूप से सक्रिय द्रव

गरम जल और द्रव आयनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाकर खनिज अभिक्रियाएँ तेज कर सकते हैं।

प्रमुख प्रकार

संपर्क कायांतरण

गरम मैग्माई अंतर्वेध के आसपास ताप प्रधान होता है।

क्षेत्रीय कायांतरण

पर्वतनिर्माण और प्लेट टक्कर वाले विशाल क्षेत्रों में ताप और दबाव दोनों प्रभावी होते हैं।

गतिशील कायांतरण

भ्रंश और कतरनी क्षेत्रों में अत्यधिक तनाव और विकृति से शैल बदल सकती है।

जलतापीय कायांतरण

गरम द्रवों के साथ रासायनिक अभिक्रिया से शैल में परिवर्तन होता है।

पर्णन

दिशात्मक दबाव से पत्तीनुमा या पट्टीनुमा बनावट विकसित हो सकती है।

इसे पर्णन (Foliation) कहते हैं।

सामान्य बढ़ता क्रम—

स्लेटी विदलन → फिल्लाइटिक बनावट → शिस्टता → नीसीय पट्टियाँ।

अपर्णित कायांतरित शैल

कुछ कायांतरित शैलों में स्पष्ट पर्णन नहीं होता।

उदाहरण—

कायांतरण श्रेणी

ताप और दबाव की तीव्रता के आधार पर कायांतरण—

का हो सकता है।

शेल का सामान्य बढ़ता क्रम—

शेल → स्लेट → फिल्लाइट → शिस्ट → नीस।

सूचक खनिज

कुछ खनिज विशेष ताप-दाब परिस्थितियों में स्थिर होते हैं।

इन्हें सूचक खनिज (Index Minerals) कहा जाता है।

उदाहरण—

इनसे कायांतरण की श्रेणी का अनुमान लगाया जाता है।

कायांतरित मुखाकृति

विशिष्ट ताप-दाब अवस्था में बनने वाले खनिज-समूह को कायांतरित मुखाकृति (Metamorphic Facies) कहा जाता है।

प्रमुख उदाहरण—

ये केवल ताप नहीं, ताप और दबाव दोनों के संयोजन को दर्शाते हैं।

भारत में कायांतरित भूभाग

दक्षिण भारतीय ग्रैनुलाइट भूभाग

तमिलनाडु और केरल के बड़े भागों में उच्च श्रेणी की ग्रैनुलाइट शैलें मिलती हैं।

पूर्वी घाट

ओडिशा और आंध्र प्रदेश का पूर्वी घाट भूभाग उच्च ताप–उच्च श्रेणी कायांतरण के लिए प्रसिद्ध है।

हिमालय

हिमालय में क्षेत्रीय कायांतरण का उत्कृष्ट क्रम मिलता है।

गार्नेट, क्यानाइट, सिलिमेनाइट और उच्च श्रेणी की नीसें पर्वतनिर्माण इतिहास का प्रमाण देती हैं।

धारवाड़ और सिंहभूम

प्राचीन ग्रीनस्टोन पट्टियों और कायांतरित शैलों का व्यापक विकास हुआ है।

2025–2026 समसामयिक अद्यतन

2025 में दक्षिण भारतीय ग्रैनुलाइटों पर किए गए अध्ययन ने जिरकॉन, टाइटेनाइट, मोनाजाइट और एपेटाइट के यूरेनियम–सीसा काल-निर्धारण तथा समस्थानिक संकेतों से उनके जटिल कायांतरित इतिहास की नई व्याख्या प्रस्तुत की।

2025 के पूर्वी घाट अध्ययन में अत्यधिक उच्च ताप कायांतरण से जुड़ी विशिष्ट खनिज-समष्टियों और लगभग 959 तथा 846 मिलियन वर्ष पुराने तापीय प्रकरणों का संकेत मिला।

2026 की भारतीय प्राचीन भूभाग समीक्षा ने दक्षिणी ग्रैनुलाइट भूभाग और पूर्वी घाट को अलग-अलग कठोरता तथा प्राचीन टक्कर इतिहास वाले कायांतरित प्रदेशों के रूप में रेखांकित किया।

परीक्षा-योग्य मूल्यवर्धन

आधुनिक कायांतरित शैल अध्ययन में खनिज-रसायन, ताप-दाब मॉडल और रेडियोमेट्रिक काल-निर्धारण से ताप–दाब–समय इतिहास निकाला जाता है।

सत्यापित UPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

कायांतरित शैलों के रूपांतरण-युग्म पर प्रत्यक्ष हालिया UPSC CSE प्रारंभिक प्रश्न का विश्वसनीय सत्यापन नहीं मिला।

सत्यापित UPSC मुख्य परीक्षा PYQ

UPSC भूविज्ञान वैकल्पिक में कायांतरण के प्रकार, श्रेणी, मुखाकृति, खनिज-समष्टि और भारतीय ग्रैनुलाइट भूभाग नियमित परीक्षा-विषय हैं।

इस व्यापक शीर्षक पर प्रत्यक्ष सत्यापित सामान्य अध्ययन प्रश्न नहीं मिला।

सत्यापित BPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

इस व्यापक शीर्षक पर स्पष्ट CCE वर्ष-सहित प्रत्यक्ष प्रश्न का भरोसेमंद मिलान नहीं मिला।

सत्यापित BPSC मुख्य परीक्षा PYQ

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प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

शेल → स्लेट।

चूना पत्थर → संगमरमर।

बलुआ पत्थर → क्वार्ट्जाइट।

ग्रेनाइट → नीस।

कायांतरण में पूर्ण पिघलाव नहीं होता।

पर्णन दिशात्मक दबाव से जुड़ा है।

संगमरमर और क्वार्ट्जाइट सामान्यतः अपर्णित हैं।

ग्रैनुलाइट उच्च श्रेणी कायांतरण दर्शाता है।

निष्कर्ष

कायांतरित शैल पृथ्वी की पर्पटी में ताप, दबाव और विवर्तनिक तनाव के इतिहास का अभिलेख हैं। उनकी खनिज संरचना और बनावट से पर्वतनिर्माण, गहराई, तापीय विकास और प्लेट टक्कर की परिस्थितियों का पुनर्निर्माण किया जा सकता है।