1.3.3.3 लेहमैन असांतत्य

द्रव बाह्य क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड के बीच की सीमा को सामान्य प्रतियोगी भूगोल में लेहमैन असांतत्य कहा जाता है।

यह लगभग 5,150 किमी गहराई पर स्थित है।

इसे आधुनिक भूभौतिकी में Inner Core Boundary — ICB भी कहा जाता है।

इस सीमा के बाहर लौह-समृद्ध बाह्य क्रोड द्रव अवस्था में है और इसके भीतर आंतरिक क्रोड ठोस अवस्था में है।

खोज

डेनमार्क की भूकंप विज्ञानी इंगे लेहमैन ने 1936 में भूकंपीय तरंगों के विश्लेषण के आधार पर पृथ्वी के ठोस आंतरिक क्रोड का प्रस्ताव दिया।

भूकंपों के बाद कुछ P-तरंगें उन क्षेत्रों में दर्ज हो रही थीं जहाँ केवल द्रव क्रोड वाला सरल मॉडल उन्हें समझा नहीं पाता था।

लेहमैन ने निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी के केंद्र में एक ठोस आंतरिक क्षेत्र मौजूद है जो P-तरंगों को refract/reflect करता है।

लेहमैन सीमा के ऊपर और नीचे

ऊपर — बाह्य क्रोड: द्रव, लौह-समृद्ध।

नीचे — आंतरिक क्रोड: ठोस, लौह-निकेल प्रधान।

इसलिए यह सीमा मुख्यतः—

द्रव → ठोस

अवस्था परिवर्तन का संकेत देती है।

आंतरिक क्रोड ठोस क्यों है?

आंतरिक क्रोड में तापमान अत्यंत अधिक है।

फिर भी अत्यधिक दबाव लौह का गलनांक बढ़ा देता है।

इस कारण लगभग 5,150 किमी गहराई से अंदर लौह-समृद्ध पदार्थ ठोस अवस्था में स्थिर रहता है।

परीक्षा-फँद

आंतरिक क्रोड “ठंडा” होने के कारण ठोस नहीं है।

मुख्य कारण—

अत्यधिक दबाव।

भूकंपीय प्रमाण

लेहमैन सीमा की पहचान मुख्यतः P-तरंगों के व्यवहार से की गई।

द्रव बाह्य क्रोड से होकर आने वाली कुछ P-wave phases आंतरिक क्रोड में प्रवेश कर सकती हैं।

आंतरिक क्रोड से गुजरने वाली प्रमुख phase को भूकंप विज्ञान में PKIKP कहा जाता है।

पृथ्वी के केंद्र के पास से reflect/refract होने वाली अन्य phases भी ICB की संरचना का अध्ययन करने में उपयोग की जाती हैं।

UPSC/BPSC के लिए phase names याद करना अनिवार्य नहीं है; अवधारणा समझना महत्वपूर्ण है।

P-तरंग वेग

द्रव बाह्य क्रोड से ठोस आंतरिक क्रोड में प्रवेश करने पर P-wave velocity में परिवर्तन होता है।

इससे inner core के ठोस होने और उसके आकार का अनुमान लगाया जाता है।

आंतरिक क्रोड की त्रिज्या लगभग 1,220 किमी है।

S-तरंग और आंतरिक क्रोड

सामान्य S-तरंगें बाह्य क्रोड से नहीं गुजर सकतीं।

इसलिए सतह से सीधे S-wave द्वारा inner core का अध्ययन संभव नहीं है।

लेकिन P-to-S conversions और विशेष core phases से आंतरिक क्रोड की shear properties का अप्रत्यक्ष अध्ययन किया जाता है।

Inner Core Boundary की प्रकृति

सरल चित्रों में ICB को साफ गोलाकार रेखा दिखाया जाता है।

वास्तविक सीमा में—

जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं।

इसलिए आधुनिक अध्ययन इसे पूरी तरह सरल smooth boundary नहीं मानते।

आंतरिक क्रोड का विकास

पृथ्वी के क्रमिक cooling के दौरान द्रव बाह्य क्रोड का लौह-समृद्ध पदार्थ केंद्र की ओर crystallize होकर आंतरिक क्रोड बनाता है।

अर्थात ICB धीरे-धीरे बाहर की ओर बढ़ती है।

इस crystallization से—

दोनों प्रक्रियाएँ outer-core convection और geodynamo को ऊर्जा देने में सहायक हैं।

लेहमैन सीमा और चुंबकीय क्षेत्र

पृथ्वी का मुख्य चुंबकीय क्षेत्र बाह्य क्रोड में बनता है।

फिर भी ICB पर inner-core growth बाह्य क्रोड की convection को ऊर्जा देती है।

इसलिए लेहमैन सीमा/ICB पृथ्वी के दीर्घकालीन भू-चुंबकीय विकास में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण है।

आंतरिक क्रोड की अनैसोट्रॉपी

आंतरिक क्रोड में भूकंपीय तरंगें सभी दिशाओं में समान गति से नहीं चलतीं।

इसे seismic anisotropy कहते हैं।

लौह क्रिस्टलों की दिशात्मक व्यवस्था इसके संभावित कारणों में से एक है।

यह तथ्य दिखाता है कि लेहमैन सीमा के अंदर का ठोस क्रोड भी पूरी तरह समान नहीं है।

2025 का शोध — सीमा में परिवर्तन

2025 के Nature Geoscience अध्ययन ने repeating earthquake seismograms के आधार पर संकेत दिया कि inner core की बाहरी सतह में समय के साथ छोटे आकार परिवर्तन या deformation हो सकते हैं।

इसका संभावित कारण द्रव बाह्य क्रोड की गतियाँ और inner-core surface की अपेक्षाकृत soft outermost material हो सकती है।

इसका अर्थ आंतरिक क्रोड का द्रव होना नहीं है।

मुख्य आंतरिक क्रोड ठोस ही माना जाता है।

2026 का शोध — Mushy Inner Core Boundary

जून 2026 में Earth and Planetary Science Letters में प्रकाशित अध्ययन ने एक antipodal PKIIKP seismic phase का उपयोग करके inner core surface की संरचना का विश्लेषण किया।

अध्ययन ने ICB के एक भाग में mushy region के संकेत प्रस्तुत किए।

“Mushy” से तात्पर्य ऐसा संक्रमण क्षेत्र है जिसमें ठोस crystals और शेष द्रव/आंशिक रूप से crystallizing material का जटिल मिश्रण हो सकता है।

परीक्षा-योग्य संदेश

लेहमैन/ICB को कठोर गणितीय रेखा की बजाय वास्तविक पृथ्वी में जटिल crystallization boundary के रूप में समझा जा सकता है।

2026 का शोध — आंतरिक क्रोड का सापेक्ष घूर्णन

जनवरी 2026 के Geophysical Research Letters अध्ययन ने 1982–2024 के लंबे seismic records से inner-core differential rotation का विश्लेषण किया।

अध्ययन में संकेत मिला कि—

यह inner core–outer core–mantle coupling की जटिलता दिखाता है।

मीडिया-सावधानी

समाचारों में कभी कहा जाता है—

“पृथ्वी का inner core घूमना बंद कर चुका है।”

यह वैज्ञानिक रूप से भ्रामक है।

सही अर्थ है—

inner core की mantle के सापेक्ष rotation rate समय के साथ बदल सकती है।

पूरा inner core पृथ्वी के सामान्य घूर्णन से अलग होकर अचानक स्थिर नहीं हो जाता।

सत्यापित UPSC Prelims PYQ

Lehmann discontinuity को नाम लेकर पूछने वाला प्रत्यक्ष UPSC CSE Prelims PYQ विश्वसनीय स्रोतों में सत्यापित नहीं मिला।

इसलिए practice MCQ को PYQ के रूप में शामिल नहीं किया गया है।

सत्यापित UPSC Mains PYQ

UPSC Geology Optional, 2016 — 10 अंक

प्रश्न:

“Explain the major discontinuities within the Earth's interior.”

लेहमैन discontinuity इस प्रश्न के प्रमुख भागों में शामिल है।

उत्तर में—

लिखना आवश्यक है।

सत्यापित BPSC Prelims PYQ

BPSC CCE Prelims में लेहमैन असांतत्य को नाम लेकर पूछने वाला प्रत्यक्ष, वर्ष-सहित और आधिकारिक रूप से सत्यापित प्रश्न उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला।

इसलिए कोई mock question PYQ नहीं बनाया गया है।

सत्यापित BPSC Mains PYQ

68वीं BPSC Mains Geology Optional में पृथ्वी के आंतरिक भाग से कई प्रश्न पूछे गए, लेकिन उपलब्ध सत्यापित प्रश्नपत्र में लेहमैन असांतत्य को अकेले पूछने वाला प्रत्यक्ष प्रश्न नहीं मिला।

इसलिए कोई अनुमानित प्रश्न नहीं जोड़ा गया है।

Prelims के लिए अंतिम तथ्य

लेहमैन discontinuity लगभग 5,150 किमी गहराई पर है।

यह बाह्य और आंतरिक क्रोड की सीमा है।

बाह्य क्रोड द्रव है।

आंतरिक क्रोड ठोस है।

इंगे लेहमैन ने 1936 में ठोस inner core का प्रस्ताव दिया।

आंतरिक क्रोड ठोस होने का मुख्य कारण अत्यधिक दबाव है।

ICB पर inner core crystallize होकर धीरे-धीरे बढ़ता है।

Inner-core growth geodynamo को अप्रत्यक्ष ऊर्जा देती है।

2026 के शोध में ICB के एक भाग में mushy structure के संकेत मिले।

Inner core differential rotation समय के साथ बदल सकती है।

निष्कर्ष

लेहमैन असांतत्य पृथ्वी के द्रव बाह्य क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड की सीमा है। इसकी खोज ने पृथ्वी के केंद्र को एकसमान द्रव मानने वाली पुरानी धारणा को बदल दिया। आधुनिक भूकंपीय शोध बताते हैं कि यह सीमा स्वयं भी जटिल, असमान और क्रिस्टलीकरण से विकसित होती हुई संरचना हो सकती है। इसलिए ICB पृथ्वी के आंतरिक तापीय विकास और भू-डायनेमो दोनों को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी है।