1.3.3 प्रमुख असांतत्य
पृथ्वी के भीतर विभिन्न परतों के बीच ऐसी सीमाएँ जहाँ भूकंपीय तरंगों के वेग, दिशा, घनत्व या पदार्थ की अवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन दिखाई देता है, भूकंपीय असांतत्य कहलाती हैं।
पृथ्वी की आंतरिक परतें प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देतीं। इनके बीच की सीमाओं का पता मुख्यतः P और S भूकंपीय तरंगों के—
- वेग परिवर्तन,
- अपवर्तन,
- परावर्तन,
- छाया क्षेत्र
के अध्ययन से लगाया गया है।
परीक्षा की दृष्टि से तीन सबसे महत्वपूर्ण असांतत्य हैं—
मोहोरोविचिक असांतत्य — भूपर्पटी और मैंटल
गुटेनबर्ग असांतत्य — मैंटल और बाह्य क्रोड
लेहमैन असांतत्य — बाह्य और आंतरिक क्रोड
असांतत्य का अर्थ
“असांतत्य” का अर्थ यह नहीं है कि पृथ्वी के भीतर हमेशा एक बिल्कुल शून्य मोटाई वाली रेखा मौजूद है।
वास्तविक पृथ्वी में कई सीमाएँ कुछ मोटाई वाले संक्रमण क्षेत्र हो सकती हैं, लेकिन भूकंपीय तरंगों के व्यवहार में अपेक्षाकृत अचानक परिवर्तन होने के कारण उन्हें भूभौतिकीय सीमा के रूप में पहचाना जाता है।
प्रमुख असांतत्यों की सारणी
| असांतत्य | लगभग गहराई | किन परतों के बीच | प्रमुख भूकंपीय संकेत |
|---|---|---|---|
| कॉनराड | क्षेत्रीय; महाद्वीपीय पर्पटी के भीतर | ऊपरी–निचली महाद्वीपीय पर्पटी | वेग परिवर्तन |
| मोहो | महासागर में लगभग 5–10 किमी; महाद्वीप में लगभग 30–40 किमी; पर्वतों के नीचे अधिक | भूपर्पटी–मैंटल | P और S वेग में वृद्धि |
| 410 किमी सीमा | लगभग 410 किमी | ऊपरी मैंटल | खनिजीय अवस्था परिवर्तन |
| 660 किमी सीमा | लगभग 660 किमी | संक्रमण क्षेत्र–निचला मैंटल | वेग वृद्धि/खनिजीय परिवर्तन |
| गुटेनबर्ग | लगभग 2,900 किमी | मैंटल–बाह्य क्रोड | S तरंग समाप्त; P वेग घटता |
| लेहमैन | लगभग 5,150 किमी | बाह्य–आंतरिक क्रोड | P तरंग व्यवहार में परिवर्तन |
कॉनराड असांतत्य
पुरानी भूगोल पुस्तकों में कॉनराड असांतत्य को महाद्वीपीय पर्पटी के ऊपरी और निचले भागों के बीच सीमा माना जाता है।
लेकिन यह पूरी पृथ्वी पर समान रूप से विकसित सार्वभौमिक सीमा नहीं है।
इसलिए इसे मोहो, गुटेनबर्ग और लेहमैन जैसी वैश्विक प्रमुख सीमाओं के बराबर सार्वभौमिक नहीं माना जाना चाहिए।
रेपेटी असांतत्य — परीक्षा सावधानी
कुछ पारंपरिक प्रतियोगी पुस्तकों में रेपेटी असांतत्य को ऊपरी और निचले मैंटल के बीच रखा जाता है।
आधुनिक भूकंप विज्ञान ऊपरी–निचले मैंटल के संक्रमण को मुख्यतः 410–660 किमी mantle transition zone और विशेष रूप से 660 किमी सीमा से समझाता है।
इसलिए Prelims में यदि पारंपरिक शब्दावली पूछी जाए तो Repetti का मिलान upper–lower mantle से किया जा सकता है, लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या में 410 और 660 किमी खनिजीय सीमाएँ अधिक सटीक हैं।
मोहोरोविचिक असांतत्य
1.3.3.1 मोहो का विस्तृत अध्ययन पढ़ें →
मोहो भूपर्पटी और मैंटल की सीमा है।
यहाँ P और S तरंगों का वेग अचानक बढ़ जाता है।
कारण—
पर्पटी की चट्टानों से अधिक घनी, Mg-Fe समृद्ध मैंटल चट्टानों में प्रवेश।
महासागरों के नीचे मोहो उथला और महाद्वीपों के नीचे गहरा होता है।
हिमालय जैसे पर्वतों के नीचे यह और अधिक गहरा हो सकता है।
गुटेनबर्ग असांतत्य
1.3.3.2 गुटेनबर्ग असांतत्य का विस्तृत अध्ययन पढ़ें →
लगभग 2,900 किमी गहराई पर मैंटल और द्रव बाह्य क्रोड के बीच की सीमा गुटेनबर्ग असांतत्य कहलाती है।
यहाँ—
- S-तरंगें आगे नहीं जातीं,
- P-तरंग का वेग घटता है,
- P-तरंग तीव्र रूप से अपवर्तित होती है।
इन्हीं संकेतों से बाह्य क्रोड के द्रव होने की पुष्टि हुई।
लेहमैन असांतत्य
1.3.3.3 लेहमैन असांतत्य का विस्तृत अध्ययन पढ़ें →
लगभग 5,150 किमी गहराई पर द्रव बाह्य क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड की सीमा लेहमैन असांतत्य कहलाती है।
P-तरंगों के विशेष मार्ग और यात्रा समय ने आंतरिक क्रोड की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1936 में इंगे लेहमैन ने ठोस आंतरिक क्रोड का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
असांतत्य कैसे खोजे जाते हैं?
यदि पृथ्वी एक समान पदार्थ से बनी होती तो भूकंपीय तरंगें अपेक्षाकृत सरल मार्ग से चलतीं।
लेकिन वास्तविक सीस्मोग्राम में—
- कुछ तरंगें जल्दी पहुँचती हैं,
- कुछ देर से,
- कुछ दिशा बदलती हैं,
- कुछ परावर्तित होती हैं,
- कुछ क्षेत्र में गायब हो जाती हैं।
इन परिवर्तनों का गणितीय विश्लेषण करके वैज्ञानिक पृथ्वी के भीतर परतों की सीमा निर्धारित करते हैं।
अपवर्तन और परावर्तन
भूकंपीय तरंग एक परत से दूसरी परत में प्रवेश करते समय वेग बदलने पर मुड़ती है। इसे अपवर्तन कहते हैं।
सीमा पर ऊर्जा का कुछ भाग वापस परावर्तित भी हो सकता है।
इन reflected phases से सीमा की गहराई और आकृति का अध्ययन किया जाता है।
उदाहरण—
Moho-reflected P phase को PmP कहा जाता है।
छाया क्षेत्र
गुटेनबर्ग सीमा और द्रव बाह्य क्रोड के कारण—
P तरंग का प्रमुख छाया क्षेत्र लगभग 105°–145°
और
S तरंग लगभग 105° के बाद प्रत्यक्ष रूप से अनुपस्थित
होती है।
यह पृथ्वी की गहरी परतों के प्रमाण का क्लासिक उदाहरण है।
असांतत्य और रासायनिक परिवर्तन
हर असांतत्य का कारण समान नहीं है।
मोहो — मुख्यतः पर्पटी से मैंटल के संघटन/भौतिक गुणों का परिवर्तन।
410 और 660 किमी — बड़े स्तर पर खनिजीय अवस्था-परिवर्तन।
गुटेनबर्ग — ठोस सिलिकेट मैंटल से द्रव धात्विक बाह्य क्रोड।
लेहमैन — द्रव बाह्य क्रोड से ठोस आंतरिक क्रोड।
इसलिए “हर असांतत्य केवल रासायनिक संघटन बदलने से बनता है” गलत है।
भारत और असांतत्य
भारत में Moho की गहराई क्षेत्रीय रूप से अत्यंत भिन्न है।
प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य महाद्वीपीय पर्पटी की मोटाई लगभग 35–45 किमी के क्रम में हो सकती है, जबकि हिमालय और तिब्बत के नीचे पर्पटी बहुत अधिक मोटी है।
भूकंपीय receiver functions, surface waves और reflected phases से भारतीय Moho का मानचित्रण लगातार बेहतर हो रहा है।
समसामयिक अद्यतन — 2025–2026
भारतीय मोहो
2025 में भारतीय शील्ड के 45 स्टेशनों के अध्ययन में Moho के पार S-तरंग वेग-विरोध में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय अंतर मिला।
इससे स्पष्ट हुआ कि भारतीय Moho हर जगह समान रूप से तीक्ष्ण सीमा नहीं है।
2026 में पूर्वी हिमाचल हिमालय के अध्ययन ने नीचे धँसती भारतीय Moho की ज्यामिति और ऊपरी मैंटल Pn/Sn वेगों का विश्लेषण किया।
क्रोड–मैंटल सीमा
2026 के Nature Geoscience अध्ययन ने दिखाया कि क्रोड–मैंटल सीमा पर ऊष्मा प्रवाह वैश्विक रूप से समान नहीं है और LLSVP क्षेत्रों के नीचे अत्यंत जटिल हो सकता है।
आंतरिक क्रोड सीमा
2026 के Earth and Planetary Science Letters अध्ययन में inner-core boundary पर एक संभावित mushy region के भूकंपीय संकेत मिले।
इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थापित प्रमुख सीमाओं की सूक्ष्म संरचना आज भी सक्रिय शोध का विषय है।
सत्यापित UPSC Prelims PYQ
UPSC CSE Prelims में “मोहो–गुटेनबर्ग–लेहमैन तीनों का मिलान” पूछने वाला प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला।
इसलिए अभ्यास MCQ को PYQ के रूप में नहीं जोड़ा गया है।
सत्यापित UPSC Mains PYQ
UPSC Geology Optional, 2016 — 10 अंक
प्रश्न:
“Explain the major discontinuities within the Earth's interior.”
अर्थात—
“पृथ्वी के आंतरिक भाग के प्रमुख असांतत्यों की व्याख्या कीजिए।”
यह इस पूरे उपविषय का प्रत्यक्ष UPSC Mains Geology Optional PYQ है।
इसे GS Mains का प्रश्न नहीं समझना चाहिए।
सत्यापित BPSC Prelims PYQ
BPSC CCE Prelims में सभी प्रमुख असांतत्यों पर प्रत्यक्ष, वर्ष-सहित और विश्वसनीय रूप से सत्यापित प्रश्न उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला।
इसलिए कोई Mock/Test Series प्रश्न BPSC PYQ के नाम से नहीं जोड़ा गया है।
सत्यापित BPSC Mains PYQ
68वीं BPSC Mains Geology Optional में पृथ्वी के आंतरिक भाग से संबंधित प्रत्यक्ष प्रश्न पूछे गए, जैसे—
Asthenosphere is…
और
“हमें कैसे पता चलता है कि बाह्य क्रोड द्रव है?”
लेकिन “सभी प्रमुख असांतत्यों की व्याख्या” जैसा प्रत्यक्ष प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।
Prelims के लिए अंतिम तथ्य
मोहो = भूपर्पटी–मैंटल।
गुटेनबर्ग = मैंटल–बाह्य क्रोड।
लेहमैन = बाह्य क्रोड–आंतरिक क्रोड।
कॉनराड = महाद्वीपीय पर्पटी के भीतर क्षेत्रीय सीमा; सार्वभौमिक नहीं।
रेपेटी = पारंपरिक रूप से upper–lower mantle; आधुनिक व्याख्या में 410–660 किमी संक्रमण क्षेत्र अधिक महत्वपूर्ण।
गुटेनबर्ग सीमा पर S-तरंगें समाप्त होती हैं।
लेहमैन सीमा के भीतर आंतरिक क्रोड ठोस है।
410 और 660 किमी सीमाएँ मुख्यतः खनिजीय अवस्था परिवर्तन से जुड़ी हैं।
निष्कर्ष
पृथ्वी के प्रमुख असांतत्य उसके आंतरिक विभेदन को समझने की आधारभूत कुंजी हैं। मोहो पर्पटी और मैंटल, गुटेनबर्ग ठोस मैंटल और द्रव बाह्य क्रोड तथा लेहमैन द्रव बाह्य और ठोस आंतरिक क्रोड को अलग करते हैं। आधुनिक भूकंप विज्ञान यह भी दिखाता है कि इन सीमाओं की वास्तविक संरचना स्थानिक रूप से जटिल हो सकती है।