1.3.4.1 भूतापीय प्रवणता

पृथ्वी के भीतर गहराई बढ़ने के साथ सामान्यतः तापमान बढ़ता है। गहराई के साथ तापमान बढ़ने की दर को भूतापीय प्रवणता (Geothermal Gradient) कहा जाता है।

इसे सामान्यतः प्रति किलोमीटर तापमान वृद्धि के रूप में व्यक्त किया जाता है।

पर्पटी के ऊपरी भाग में औसत भूतापीय प्रवणता लगभग 25–30°C प्रति किमी के क्रम की मानी जाती है, लेकिन यह कोई सार्वभौमिक स्थिर मान नहीं है। अलग-अलग भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में यह बहुत बदल सकती है।

भूतापीय प्रवणता का सरल अर्थ

यदि किसी क्षेत्र में भूतापीय प्रवणता 30°C प्रति किमी है, तो आदर्श रूप से 1 किमी गहराई पर सतह की तुलना में लगभग 30°C अधिक तापमान मिल सकता है।

लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में—

के कारण यह संबंध सरल रैखिक नहीं रहता।

भूतापीय प्रवणता और भू-तापीय प्रवाह में अंतर

दोनों शब्द एक नहीं हैं।

भूतापीय प्रवणता (Geothermal Gradient)
गहराई के साथ तापमान बदलने की दर।

भू-तापीय प्रवाह (Geothermal Heat Flow)
पृथ्वी के भीतर से प्रति इकाई क्षेत्र प्रति इकाई समय सतह की ओर निकलने वाली ऊष्मा।

सरल रूप में—

ऊष्मा प्रवाह = ऊष्मीय चालकता × तापमान प्रवणता

लेकिन प्राकृतिक पृथ्वी में द्रव प्रवाह और जटिल संरचनाएँ भी प्रभाव डालती हैं।

प्रवणता हर स्थान पर अलग क्यों है?

भूतापीय प्रवणता कई कारकों से नियंत्रित होती है।

पर्पटी की मोटाई

मोटी महाद्वीपीय पर्पटी में रेडियोधर्मी ऊष्मा उत्पादन महत्वपूर्ण हो सकता है।

लेकिन केवल मोटाई से प्रवणता निर्धारित नहीं होती।

रेडियोधर्मी तत्व

यूरेनियम, थोरियम और पोटैशियम जैसे तत्वों का क्षय ऊष्मा उत्पन्न करता है।

इन तत्वों से समृद्ध महाद्वीपीय पर्पटी क्षेत्रीय तापीय संरचना को प्रभावित कर सकती है।

विवर्तनिक सक्रियता

रिफ्ट, ज्वालामुखीय क्षेत्र और युवा विवर्तनिक पट्टियाँ सामान्यतः अधिक तापीय प्रवाह से जुड़ी हो सकती हैं।

मैग्मा

सतह के अपेक्षाकृत निकट मैग्माई निकाय स्थानीय तापमान बहुत बढ़ा सकते हैं।

भूजल

गरम जल ऊपर आने पर स्थानीय तापीय प्रवणता अधिक दिखाई दे सकती है।

दूसरी ओर ठंडे जल का गहरा परिसंचरण स्थानीय तापमान घटा सकता है।

चट्टानों की ऊष्मीय चालकता

अधिक ऊष्मीय चालकता वाली चट्टानें ऊष्मा को अधिक प्रभावी ढंग से स्थानांतरित करती हैं।

इस कारण समान ऊष्मा प्रवाह वाले दो क्षेत्रों में भी तापमान प्रवणता अलग हो सकती है।

महासागरीय क्षेत्रों में प्रवणता

मध्य-महासागरीय कटक के पास नई महासागरीय स्थलमंडल गर्म होती है।

यहाँ ऊष्मा प्रवाह बहुत अधिक होता है।

कटक से दूर जाते हुए महासागरीय स्थलमंडल—

इसलिए महासागरीय तापीय संरचना महासागरीय पर्पटी की आयु से गहराई से जुड़ी है।

महाद्वीपीय क्षेत्रों में प्रवणता

महाद्वीपीय क्षेत्रों में स्थिति अधिक जटिल है।

प्राचीन क्रेटोन सामान्यतः ठंडे और मोटे स्थलमंडल से जुड़े होते हैं।

रिफ्ट और युवा सक्रिय क्षेत्रों में उच्च प्रवणता मिल सकती है।

अवसादी बेसिनों में दबी हुई परतों, द्रव संचरण और चट्टानी चालकता के कारण स्थानीय प्रवणता अलग-अलग हो सकती है।

गहराई के साथ तापमान

भूतापीय प्रवणता को पृथ्वी के केंद्र तक एक ही दर से लागू नहीं किया जा सकता।

यदि ऊपरी पर्पटी के 30°C प्रति किमी मान को केंद्र तक बढ़ा दिया जाए, तो अत्यंत अवास्तविक तापमान मिलेगा।

गहरे मैंटल में ऊष्मा का परिवहन बड़े स्तर पर संवहन से होता है, इसलिए तापमान-वृद्धि का ढाँचा अलग है।

परीक्षा-सावधानी

25–30°C प्रति किमी को ऊपरी पर्पटी का सामान्य औसत मान समझें, पूरी पृथ्वी का स्थिर नियम नहीं।

भू-तापीय विसंगति

किसी क्षेत्र में सामान्य क्षेत्रीय प्रवणता की तुलना में तापमान असामान्य रूप से अधिक या कम हो तो उसे भू-तापीय विसंगति (Geothermal Anomaly) कहा जा सकता है।

उच्च तापीय विसंगतियाँ—

से जुड़ी हो सकती हैं।

गरम जल स्रोत

भूजल गहरे भाग में जाकर गरम हो सकता है और भ्रंशों या दरारों के माध्यम से फिर सतह पर आ सकता है।

इससे गरम जल स्रोत बनते हैं।

भारत में प्रमुख उदाहरण—

भारत में भूतापीय क्षेत्र

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भारत में 381 गरम जल स्रोतों का दस्तावेजीकरण किया है।

भारत की सैद्धांतिक भूतापीय ऊर्जा क्षमता लगभग 10,600 मेगावाट आँकी गई है।

महत्वपूर्ण भूतापीय प्रांतों में—

जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

पुगा घाटी

लद्दाख की पुगा घाटी भारत के सबसे महत्वपूर्ण भूतापीय क्षेत्रों में से है।

यहाँ गरम जल स्रोत, बोरैक्स और अन्य तापीय संकेत लंबे समय से ज्ञात हैं।

जुलाई 2026 में यहाँ भारत के पहले 2 गहरे भूतापीय कुएँ चालू किए गए।

दोनों लगभग 1,000 मीटर गहरे हैं।

इनका उद्देश्य भविष्य की 1 मेगावाट प्रदर्शन परियोजना के लिए भंडार का मूल्यांकन करना है।

2026 का वैज्ञानिक अद्यतन

2026 में प्रकाशित वैश्विक अध्ययन ने हजारों प्रत्यक्ष भूतापीय प्रवणता मापों का उपयोग कर मशीन अधिगम आधारित वैश्विक तापीय मानचित्र विकसित किया।

यह अध्ययन दर्शाता है कि महाद्वीपीय और महासागरीय स्थलमंडल में भूतापीय प्रवणता अत्यंत विषम है और केवल एक वैश्विक औसत से पृथ्वी की तापीय संरचना को नहीं समझा जा सकता।

एक अन्य 2026 अध्ययन में चीन के वेईहे बेसिन के एक क्षेत्र में औसत प्रवणता लगभग 33.3°C प्रति किमी मिली, लेकिन क्षेत्र के भीतर ही उत्तर की ओर इसमें कमी देखी गई।

परीक्षा-योग्य निष्कर्ष

भूतापीय प्रवणता स्थानीय भूविज्ञान, पर्पटी–मैंटल संरचना, रेडियोधर्मी ऊष्मा और द्रव प्रवाह से नियंत्रित होती है।

सत्यापित UPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

भूतापीय प्रवणता को सीधे परिभाषा या °C/किमी के रूप में पूछने वाला स्पष्ट, वर्ष-सहित UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

हालाँकि UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2013 में भूतापीय ऊर्जा को पृथ्वी की सतह पर गतिशील परिवर्तन लाने वाले कारकों में शामिल किया गया था।

इसे प्रवणता का प्रत्यक्ष प्रश्न नहीं माना गया है।

सत्यापित UPSC मुख्य परीक्षा PYQ

भूतापीय प्रवणता पर प्रत्यक्ष UPSC सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

भूविज्ञान और भूभौतिकी के विशेष प्रश्नपत्रों में ताप-प्रवाह संबंधी प्रश्न मिलते हैं, लेकिन उन्हें सिविल सेवा सामान्य अध्ययन PYQ के रूप में नहीं जोड़ा गया है।

सत्यापित BPSC प्रारंभिक परीक्षा PYQ

BPSC संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा में भूतापीय प्रवणता पर प्रत्यक्ष और स्पष्ट वर्ष-सहित सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

इसलिए कोई अभ्यास प्रश्न PYQ के रूप में नहीं जोड़ा गया है।

सत्यापित BPSC मुख्य परीक्षा PYQ

71वीं BPSC मुख्य परीक्षा, 2026 — सामान्य अध्ययन-II

प्रश्न:

“उपयुक्त उदाहरणों सहित भारत में भूतापीय ऊर्जा के पर्यावरणीय और सामाजिक लाभों का विवरण दीजिए।”

यह प्रवणता का प्रत्यक्ष प्रश्न नहीं है, लेकिन भूतापीय संसाधनों और पृथ्वी के ताप से सीधा संबंधित BPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न है।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

भूतापीय प्रवणता = गहराई के साथ तापमान वृद्धि की दर।

ऊपरी पर्पटी का सामान्य औसत लगभग 25–30°C प्रति किमी के क्रम का है।

यह पृथ्वी पर हर जगह समान नहीं है।

भूतापीय प्रवणता और भू-तापीय प्रवाह अलग अवधारणाएँ हैं।

मध्य-महासागरीय कटक पर ऊष्मा प्रवाह अधिक होता है।

पुराने क्रेटोन सामान्यतः अपेक्षाकृत ठंडे होते हैं।

मैग्मा और गरम द्रव स्थानीय तापीय विसंगति उत्पन्न कर सकते हैं।

निष्कर्ष

भूतापीय प्रवणता पृथ्वी की पर्पटी की तापीय अवस्था को समझने का महत्वपूर्ण मापक है। इसका मान स्थानीय भूविज्ञान, रेडियोधर्मी ऊष्मा, ऊष्मीय चालकता, विवर्तनिकी और भूमिगत द्रवों से प्रभावित होता है। इसलिए इसे किसी एक वैश्विक स्थिर संख्या के बजाय क्षेत्रीय तापीय संकेतक के रूप में समझना चाहिए।