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GS Paper-I • भौतिक भूगोल अध्याय 02 (Geomorphology) UPSC CSE & BPSC Prelims + Mains

2. महाद्वीपीय विस्थापन और सागर नितल प्रसरण

Continental Drift & Seafloor Spreading — Complete Visual & Analytical Study Notes
⏱️ पठन समय: 35–45 मिनट 🗺️ विज़ुअल: महाद्वीपीय विस्थापन, सागर नितल प्रसरण एवं विश्व कटक–गर्त 🎯 परीक्षा प्रासंगिकता: UPSC Prelims + GS-1 Mains + Mapping

🎯 परीक्षा-सार (Exam Synopsis)

अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (1912) से लेकर आर्थर होम्स के संवहन धारा सिद्धांत (1928–29), पुराचुंबकत्व और हैरी हेस के सागर नितल प्रसरण सिद्धांत (1961) तक का संपूर्ण विश्लेषण व विश्व मानचित्रण।

क्रम:
Wegener → Holmes → Paleomagnetism → Hess
मुख्य प्रमाण:
Jig-Saw Fit, Rocks, Tillite, Placer, Fossils
मैपिंग:
Mid-Atlantic, Carlsberg, Ninety East, Mariana, Sunda
1

अल्फ्रेड वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत

Wegener's Continental Drift Theory — 1912

महाद्वीपों के जुड़े होने की संभावना 1596 में अब्राहम ऑर्टेलियस और 1910 में एफ. बी. टेलर ने जताई थी, किंतु 1912 में जर्मन मौसम वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegener) ने व्यापक प्रमाणों के साथ यह सिद्धांत प्रस्तुत किया।

पैंजिया और पैंथालासा ~250–300 MYA

कार्बोनिफेरस युग में सभी महाद्वीप जुड़कर एक विशाल महाद्वीप पैंजिया (Pangaea) थे, जिसके चारों ओर विशाल महासागर पैंथालासा (Panthalassa — वर्तमान प्रशांत महासागर का पूर्वज) फैला था।

लॉरेशिया व गोंडवानालैंड ~200 MYA

पैंजिया टूटकर उत्तर में लॉरेशिया / अंगारालैंड (उत्तरी अमेरिका, यूरोप, एशिया) और दक्षिण में गोंडवानालैंड (द. अमेरिका, अफ्रीका, मेडागास्कर, प्रायद्वीपीय भारत, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका) में बँट गया।

टेथिस सागर (Tethys Sea)

लॉरेशिया और गोंडवानालैंड के बीच उथला टेथिस सागर खुला, जिसके अवसादों के मुड़ने से आगे चलकर हिमालय और आल्प्स बने (भूमध्य सागर इसी का अवशेष है)।

विस्थापन की दिशावेगनर द्वारा बताया गया बल (Proposed Force)भौगोलिक परिणाम (वेगनर के अनुसार)
1. भूमध्य रेखा की ओर प्रवाह (Equatorward Drift)गुरुत्वाकर्षण व प्लवनशीलता बल (Pole-Fleeing Force): पृथ्वी के घूर्णन और भूमध्यरेखीय उभार से उत्पन्न बल।अफ्रीका और प्रायद्वीपीय भारत उत्तर की ओर खिसके, जिससे टेथिस सागर मुड़कर आल्प्स और हिमालय बने तथा पीछे हिंद महासागर खुला।
2. पश्चिम की ओर प्रवाह (Westward Drift)सूर्य और चंद्रमा का ज्वारीय बल (Tidal Force): पृथ्वी के पश्चिम-से-पूर्व घूर्णन के विपरीत ज्वारीय घर्षण।उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका पश्चिम की ओर खिसके, बीच में S-आकार का अटलांटिक महासागर बना और पश्चिमी तट पर रॉकीज़ व एंडीज़ बने।
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महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में 5 प्रमुख प्रमाण

Evidences of Continental Drift
अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन के प्रमाण
मानचित्र 2.1: गोंडवानालैंड के महाद्वीपों में जीवाश्मों (Mesosaurus, Glossopteris, Lystrosaurus), टिलाइट और सोने के प्लेसर निक्षेपों का मिलान।

1. महाद्वीपीय तटों की साम्यता (Jig-Saw Fit)

दक्षिण अमेरिका का पूर्वी तट (ब्राज़ील का उभार) और अफ्रीका का पश्चिमी तट (गिनी की खाड़ी / Gulf of Guinea) आरी के दाँतों की तरह फिट बैठते हैं। 1964 में एडवर्ड बुलार्ड (Edward Bullard) ने कंप्यूटर द्वारा 1,000-फैदम गहराई रेखा (Continental Slope) पर इसे पूर्णतः सटीक सिद्ध किया।

2. महासागरों के पार चट्टानों की आयु में समानता

ब्राज़ील तट की 200 करोड़ वर्ष (2 Billion Years) पुरानी शैल पट्टी पश्चिमी अफ्रीका की चट्टानों से हूबहू मेल खाती है। उत्तरी अमेरिका के अपलेशियन पर्वत और ब्रिटेन/स्कैंडिनेविया के कैलेडोनियन पर्वत एक ही श्रृंखला के हिस्से हैं।

3. टिलाइट निक्षेप (Tillite — Glacial Deposits)

हिमनद निक्षेपण से बनी टिलाइट चट्टानें भारत के गोंडवाना तलछटों के समान ही दक्षिणी गोलार्ध के 5 अन्य भू-भागों—अफ्रीका, फॉकलैंड द्वीप, मेडागास्कर, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया में मिलती हैं।

4. प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits)

पश्चिमी अफ्रीका के घाना तट (Gold Coast) पर सोने (Gold) के समृद्ध जलोढ़ निक्षेप मिलते हैं, किंतु वहाँ सोने की कोई मूल चट्टान (Source Rock) नहीं है। सोने की मूल शिराएँ ब्राज़ील के पठार में मिलती हैं।

5. जीवाश्मों का वितरण (Fossil Evidences)

  • मेसोसॉरस (Mesosaurus): उथले पानी का छोटा सरीसृप जो महासागर तैरकर पार नहीं कर सकता था; इसके जीवाश्म केवल दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी केप प्रांत और ब्राज़ील के इरावर शैल समूह में मिलते हैं।
  • ग्लोसोप्टेरिस वनस्पति (Glossopteris Flora): भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका की कोयला परतों में समान रूप से पाए गए।
  • लिस्ट्रोसॉरस और लेमूरिया: लिस्ट्रोसॉरस (स्थलीय सरीसृप) के जीवाश्म अफ्रीका, भारत व अंटार्कटिका में तथा लेमूर (Lemurs) के जीवाश्म भारत, मेडागास्कर व अफ्रीका में मिले।

⚠️ वेगनर के सिद्धांत की आलोचना (Criticism)

1. अपर्याप्त बल: ज्वारीय बल और ध्रुवीय पलायन बल महाद्वीपों को खिसकाने के लिए 10 अरब गुना कमज़ोर हैं। 2. विरोधाभासी तर्क: पहले कहा कि SIAL बिना रुकावट SIMA पर तैरती है, फिर कहा कि SIMA के घर्षण से रॉकीज़ व एंडीज़ पर्वत बन गए।

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संवहन धारा सिद्धांत, पुराचुंबकत्व और सागर नितल प्रसरण

Convection Currents, Paleomagnetism & Seafloor Spreading — 1961

आर्थर होम्स का संवहन धारा सिद्धांत (1928–29)

मेंटल (Asthenosphere) में रेडियोधर्मी तत्वों (U, Th, K) के क्षय से तापीय अंतर पैदा होता है और मैग्मा की संवहन धाराएँ (Convection Currents) चलती हैं:

  • आरोही धाराएँ (Rising Limbs): क्रस्ट के नीचे विपरीत दिशा में मुड़कर तनाव बल लगाती हैं → मध्य-महासागरीय कटक (MOR) बनते हैं।
  • अवरोही धाराएँ (Descending Limbs): नीचे उतरते समय संपीडन बल लगाती हैं → वलित पर्वत और महासागरीय गर्त (Trenches) बनते हैं।

पुराचुंबकत्व (Vine & Matthews - 1963)

मध्य-महासागरीय कटक से निकलने वाले बेसाल्टिक लावा में मौजूद मैग्नेटाइट (Magnetite) खनिज ठंडा होते समय पृथ्वी के तात्कालिक चुंबकीय ध्रुवों की दिशा में जम जाते हैं।

कटक के दोनों ओर सामान्य ध्रुवण (Normal Polarity +) और उत्क्रमित ध्रुवण (Reversed Polarity -) की चट्टानी पट्टियाँ बिल्कुल सममित (Mirror-Image Zebra Stripes) रूप में मिलती हैं।

सागर नितल प्रसरण और पुराचुंबकत्व
आरेख 2.2: हैरी हेस का सागर नितल प्रसरण (MOR पर सबसे नई क्रस्ट, सममित चुंबकीय पट्टियाँ और गर्त में सबडक्शन)।

हैरी हेस के सागर नितल प्रसरण (1961) के 5 प्रमुख प्रमाण (Prelims High-Yield)

  1. कटक से दूरी के साथ आयु बढ़ना: मध्य-महासागरीय कटक (MOR) के शिखर पर चट्टानें सबसे नई (Youngest) हैं और कटक से दूर जाने पर आयु समान रूप से बढ़ती है।
  2. महासागरीय क्रस्ट की युवा आयु: महासागरीय नितल की चट्टानें कहीं भी 20 करोड़ वर्ष (200 Million Years) से अधिक पुरानी नहीं हैं (जबकि महाद्वीपीय चट्टानें 380 करोड़ वर्ष तक पुरानी हैं)।
  3. अवसादों की पतली परत: महासागरीय तल पर अवसादों (Sediments) की परत बहुत पतली है और कटक के शीर्ष के पास अवसाद लगभग शून्य हैं।
  4. सममित चुंबकीय पट्टियाँ: कटक के दोनों ओर समान दूरी पर स्थित चट्टानों की आयु, संरचना और चुंबकीय गुण दर्पण प्रतिबिंब (Mirror Image) हैं।
  5. भूकंप की गहराई: मध्य-महासागरीय कटकों पर उथले भूकंप (Shallow Focus: <70 km) आते हैं, जबकि महासागरीय गर्तों (Trenches) के पास गहरे भूकंप (300–700 km) आते हैं।
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विश्व मानचित्रण: प्रमुख महासागरीय कटक और गर्त

World Mapping — Major Mid-Oceanic Ridges & Deep Oceanic Trenches
विश्व के प्रमुख मध्य-महासागरीय कटक और गर्त
मानचित्र 2.3: विश्व के प्रमुख मध्य-महासागरीय कटक (Mid-Atlantic, Carlsberg, Ninety East, East Pacific Rise) और महासागरीय गर्त।
प्रमुख कटक / गर्त (Feature)महासागर और अवस्थितिUPSC प्रिलिम्स व मेंस में महत्व
1. मध्य-अटलांटिक कटक (Mid-Atlantic Ridge)अटलांटिक महासागर ('S' आकार में आइसलैंड से बूवेट द्वीप तक)उत्तर में डॉल्फिन कटक (Dolphin Ridge) और दक्षिण में चैलेंजर कटक (Challenger Ridge)। आइसलैंड इसी कटक पर स्थित है।
2. कार्ल्सबर्ग कटक (Carlsberg Ridge)उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर (अरब सागर)अफ्रीकी प्लेट और भारतीय प्लेट को अलग करने वाला अपसारी कटक।
3. नाइंटी ईस्ट रिज (Ninety East Ridge)पूर्वी हिंद महासागर (90°E देशांतर के समानांतर)बंगाल की खाड़ी से दक्षिणी हिंद महासागर तक 5,000 km लंबा जलमग्न कटक।
4. पूर्वी प्रशांत उभार (East Pacific Rise)दक्षिण-पूर्वी प्रशांत महासागरविश्व में सबसे तेज़ सागर नितल प्रसरण दर (15 cm/वर्ष तक); प्रशांत और नाज़्का प्लेट के मध्य।
5. मारियाना गर्त (Mariana Trench)पश्चिमी प्रशांत महासागर (गुआम द्वीप के पास)विश्व का सबसे गहरा गर्त (Challenger Deep ~ 10,994 m); प्रशांत व फिलीपीन प्लेट की टक्कर।
6. प्यूर्टो रिको गर्त (Puerto Rico Trench)उत्तरी अटलांटिक और कैरेबियन सागर की सीमाअटलांटिक महासागर का सबसे गहरा गर्त (~8,376 m)।
7. सुंडा या जावा गर्त (Sunda / Java Trench)पूर्वी हिंद महासागर (सुमात्रा-जावा के दक्षिण में)हिंद महासागर का सबसे गहरा गर्त (~7,450 m); 2004 की सुनामी का उद्गम क्षेत्र।
8. टोंगा और कूरिल गर्त (Tonga & Kuril)प्रशांत महासागर (न्यूज़ीलैंड के उत्तर व जापान के उत्तर)टोंगा गर्त का Horizon Deep (~10,882 m) विश्व का दूसरा सबसे गहरा बिंदु है।

अध्याय 2: Prelims Statement Traps

Statement Alert
ट्रैप 1: “वेगनर के अनुसार मुख्य कारण मेंटल की संवहन धाराएँ थीं।”

सही तथ्य: वेगनर ने Pole-fleeing force और Tidal force बताए; संवहन धारा सिद्धांत Arthur Holmes (1928–29) ने दिया।

ट्रैप 2: “MOR से महाद्वीपीय तटों की ओर जाने पर महासागरीय चट्टानों की आयु घटती है।”

सही तथ्य: कटक पर चट्टानें सबसे नई होती हैं; कटक से दूर जाने पर चट्टानों की आयु और अवसादों की मोटाई दोनों बढ़ती हैं।

UPSC Mains — Chapter 2 Model Answer Bank

UPSC GS Paper-1 के लिए अध्याय 2 से सीधे जुड़े वास्तविक एवं अभ्यास प्रश्नों के पूर्ण मॉडल उत्तर—भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष सहित।

4 Full Answers
UPSC CSE Mains 2013 · Continental Drift▼
प्रश्न 2 (UPSC CSE Mains 2013, GS-1 — 10/15 अंक): "'महाद्वीपीय विस्थापन' के सिद्धांत से आप क्या समझते हैं? इसके पक्ष में प्रमुख साक्ष्यों की विवेचना कीजिए।" (What do you understand by the theory of 'continental drift'? Discuss the prominent evidences in its support.) उत्तर (संपूर्ण मॉडल उत्तर) — भूमिका (Introduction): महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory) का प्रतिपादन 1912 में जर्मन मौसमविद् अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegener) द्वारा पृथ्वी पर महाद्वीपों और महासागरों के वितरण तथा प्राचीन जलवायु परिवर्तनों की व्याख्या करने के लिए किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, कार्बोनिफेरस युग (~250–300 मिलियन वर्ष पूर्व) में विश्व के सभी महाद्वीप आपस में जुड़कर एक एकल विशाल भू-खंड 'पैंजिया' (Pangaea) के रूप में स्थित थे, जिसके चारों ओर विशाल महासागर 'पैंथालासा' (Panthalassa) का विस्तार था। मुख्य भाग (Main Body): 1. महाद्वीपीय विस्थापन की प्रक्रिया: वेगनर के अनुसार लगभग 200 मिलियन वर्ष पूर्व पैंजिया का विभाजन दो बड़े भू-खंडों—उत्तरी भाग 'लॉरेशिया' (अंगारालैंड) और दक्षिणी भाग 'गोंडवानालैंड' में हुआ तथा इनके मध्य 'टेथिस सागर' का निर्माण हुआ। वेगनर ने बताया कि पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न ध्रुवीय पलायन बल (Pole-fleeing Force) के कारण महाद्वीप भूमध्य रेखा की ओर खिसके (जिससे हिमालय व आल्प्स बने) और सूर्य व चंद्रमा के ज्वारीय बल (Tidal Force) के कारण उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका पश्चिम की ओर प्रवाहित हुए (जिससे अटलांटिक महासागर तथा रॉकीज़ व एंडीज़ पर्वत बने)। 2. महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में प्रमुख साक्ष्य (Prominent Evidences): महाद्वीपीय तटों की साम्यता (Jig-Saw Fit of Coastlines): दक्षिण अमेरिका का पूर्वी तट (ब्राज़ील का उभार) और अफ्रीका का पश्चिमी तट (गिनी की खाड़ी) आरी के दाँतों (Jig-saw puzzle) की भाँति एक-दूसरे में सटीक बैठते हैं। 1964 में एडवर्ड बुलार्ड ने कंप्यूटर की सहायता से 1,000-फैदम की गहराई रेखा (महाद्वीपीय ढाल) पर इन दोनों तटों का लगभग दोषरहित मिलान सिद्ध किया। महासागरों के पार चट्टानों की आयु और संरचना में समानता: रेडियोमेट्रिक काल-निर्धारण से प्रमाणित हुआ है कि ब्राज़ील के तट पर स्थित 200 करोड़ वर्ष (2 अरब वर्ष) पुरानी शैल पट्टी की आयु और संरचना पश्चिमी अफ्रीका की चट्टानों से हूबहू मेल खाती है। साथ ही, उत्तरी अमेरिका के अपलेशियन पर्वत और ब्रिटेन व स्कैंडिनेविया के कैलेडोनियन पर्वत एक ही प्राचीन पर्वत श्रृंखला के निरंतर भाग हैं। टिलाइट निक्षेप (Tillite — हिमनद साक्ष्य): भारत के गोंडवाना श्रेणी के तलछटों के समान ही प्राचीन हिमनद निक्षेप (Tillites) दक्षिणी गोलार्ध के पाँच अन्य भू-भागों—अफ्रीका, फॉकलैंड द्वीप, मेडागास्कर, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं। यह प्रमाणित करता है कि ये सभी महाद्वीप अतीत में दक्षिणी ध्रुव के पास एक साथ जुड़े थे। प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits): पश्चिमी अफ्रीका के घाना तट (Gold Coast) पर सोने के विशाल जलोढ़ निक्षेप मिलते हैं, किंतु पूरे घाना में सोने की कोई मूल चट्टाान (Source Rock) नहीं है। सोने युक्त मूल शिराएँ ब्राज़ील के पठार में स्थित हैं, जो सिद्ध करता है कि दोनों महाद्वीपों के जुड़े रहने के दौरान ब्राज़ील की नदियों ने घाना में सोने का निक्षेपण किया था। जीवाश्मों का समरूप वितरण (Fossil Evidences): उथले खारे जल के छोटे सरीसृप 'मेसोसॉरस' (Mesosaurus) के जीवाश्म केवल दक्षिण अफ्रीका के केप प्रांत और ब्राज़ील के इरावर शैल समूह में मिलते हैं। इसी प्रकार, भारी बीजों वाली 'ग्लोसोप्टेरिस' (Glossopteris) वनस्पति और 'लिस्ट्रोोसॉरस' के जीवाश्म भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका में समान रूप से पाए गए हैं, जो महाद्वीपों के जुड़े होने का अकाट्य प्रमाण देते हैं। निष्कर्ष (Conclusion): यद्यपि वेगनर द्वारा प्रस्तावित बल (ज्वारीय बल और ध्रुवीय पलायन बल) महाद्वीपों को खिसकाने के लिए वैज्ञानिक रूप से अपर्याप्त पाए गए, तथापि उनके द्वारा जुटाए गए भूवैज्ञानिक और जीवाश्मीय साक्ष्यों ने भू-आकृति विज्ञान में क्रांति ला दी और आगे चलकर आर्थर होम्स के संवहन धारा सिद्धांत, हैरी हेस के सागर नितल प्रसरण और आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Plate Tectonic Theory) की मज़बूत आधारशिला रखी।
UPSC CSE Mains 2025 · Crustal Movements▼
प्रश्न 3 (UPSC CSE Mains 2025, GS-1 — 15 अंक, 250 शब्द): "चर्चा कीजिए कि भूपर्पटीय द्रव्यमानों (Crustal Masses) के विवर्तनिक संचलनों के कारण ग्रह के महाद्वीपों और महासागरीय बेसिनों के आकार और आकृति में किस प्रकार परिवर्तन होते हैं।" (Discuss how the changes in shape and sizes of continents and ocean basins of the planet take place due to tectonic movements of the crustal masses.) उत्तर (संपूर्ण मॉडल उत्तर) — भूमिका (Introduction): पृथ्वी का बाहरी कठोर स्थलमंडल (Lithosphere: 10–200 km) स्थिर न होकर विभिन्न महाद्वीपीय और महासागरीय विवर्तनिक प्लेटों (Crustal Masses / Tectonic Plates) में विभाजित है। दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) में चलने वाली तापीय संवहन धाराओं (Convection Currents) के प्रभाव से ये भूपर्पटीय द्रव्यमान निरंतर गतिमान रहते हैं। महाद्वीपीय विस्थापन, सागर नितल प्रसरण और प्लेट विवर्तनिकी के माध्यम से होने वाले ये संचलन पृथ्वी के महाद्वीपों और महासागरीय बेसिनों के आकार व आकृति को निरंतर बदलते रहते हैं, जिसे भूविज्ञान में 'विल्सन चक्र' (Wilson Cycle) के रूप में जाना जाता है। मुख्य भाग (Main Body): 1. अपसारी संचलन और सागर नितल प्रसरण द्वारा महासागरीय बेसिनों का विस्तार एवं महाद्वीपीय विखंडन: महाद्वीपीय भ्रंशन और नए महासागरों का जन्म (Continental Rifting): जब महाद्वीपीय क्रस्ट के नीचे मेंटल की आरोही संवहन धाराएँ या मेंटल प्लूम (Mantle Plume) ऊपर उठते हैं, तो तनाव बल के कारण महाद्वीप में दरार पड़ती है। उदाहरण के लिए, पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी (East African Rift Valley) में सोमाली प्लेट अफ्रीकी (नूबियन) प्लेट से अलग हो रही है, और आगे चलकर लाल सागर (Red Sea) की भाँति एक नए महासागर का रूप ले लेगी। सागर नितल प्रसरण से महासागरीय बेसिन का चौड़ाा होना: मध्य-अटलांटिक कटक (Mid-Atlantic Ridge) के सहारे निरंतर नवीन बेसाल्टिक क्रस्ट के निर्माण से उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका पश्चिम की ओर और यूरोप व अफ्रीका पूर्व की ओर खिसक रहे हैं, जिससे अटलांटिक महासागर का आकार प्रतिवर्ष 2 से 4 cm की दर से बढ़ रहा है। 2. अभिसारी संचलन और क्षेपण (Subduction) द्वारा महासागरों का संकुचन एवं महाद्वीपों का पुनर्गठन: महासागरीय बेसिनों का सिकुड़ना (Shrinking of Ocean Basins): जहाँ दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, वहाँ भारी महासागरीय क्रस्ट (3.0 g/cm³) महासागरीय गर्तों (Trenches) के सहारे मेंटल में नीचे धँसकर (Subduct होकर) नष्ट हो जाती है। परि-प्रशांत मेखला (Ring of Fire) में मारियाना, टोंगा, कूरिल और पेरू-चिली गर्तों के सहारे तीव्र सबडक्शन के कारण प्रशांत महासागर (पैंथालासा का अवशेष) का आकार निरंतर सिकुड़ रहा है। प्राचीन सागरों का विलोपन और महाद्वीपीय समामेलन (Continental Suturing): गोंडवानालैंड से टूटकर जब भारतीय प्लेट उत्तर की ओर प्रवाहित होते हुए यूरेशियन प्लेट से टकराई, तो उनके बीच स्थित विशाल टेथिस सागर (Tethys Sea) पूर्णतः समाप्त हो गया और उसके अवसादों के वलन से विश्व की सर्वोच्च हिमालय पर्वत श्रृंखला तथा तिब्बत के पठार का निर्माण हुआ, जिससे एशिया महाद्वीप का आकार और आकृति स्थायी रूप से बदल गए। द्वीपीय चापों और तोरणों का जुड़ना (Accretion of Island Arcs): महासागरीय-महासागरीय अभिसरण से बने ज्वालामुखीय द्वीप चाप (जैसे जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया) समय के साथ महाद्वीपीय किनारों से जुड़कर महाद्वीपों के क्षेत्रफल में वृद्धि (Continental Accretion) करते हैं। 3. संरक्षी या रूपांतर संचलन (Transform Movements) से तटीय आकृति में बदलाव: संरक्षी प्लेट किनारों पर भूपर्पटी का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश, किंतु प्लेटों के समानांतर खिसकने से महाद्वीपीय तटरेखा की आकृति बदल जाती है। उदाहरण के लिए, उत्तरी अमेरिका में सैन एंड्रियास भ्रंश (San Andreas Fault) के सहारे प्रशांत प्लेट के उत्तर-पश्चिम की ओर खिसकने से कैलिफोर्निया प्रायद्वीप मुख्य भूमि से अलग होकर अपनी आकृति बदल रहा है। निष्कर्ष (Conclusion): संक्षेप में, पृथ्वी की भूपर्पटी एक गतिशील पहेली (Dynamic Mosaic) है। मेंटल संवहन धाराओं द्वारा संचालित विवर्तनिक संचलन एक ओर मध्य-महासागरीय कटकों पर नए महासागरीय बेसिनों का सृजन और विस्तार करते हैं (जैसे अटलांटिक महासागर), तो दूसरी ओर सबडक्शन ज़ोन और महाद्वीपीय टक्कर के माध्यम से पुराने महासागरों को समाप्त कर (जैसे टेथिस सागर व प्रशांत का संकुचन) महाद्वीपों को नए रूप में संगठित करते हैं।
UPSC CSE Mains 2021 · Gondwanaland & Mining▼
प्रश्न 6 (UPSC CSE Mains 2021, GS-1 — 15 अंक, 250 शब्द): "गोंडवानालैंड के देशों में से एक होने के बावजूद, भारत के खनन उद्योोग का अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्रतिशत में बहुत कम योगदान है। विवेचना कीजिए।" (Despite India being one of the countries of the Gondwanaland, its mining industry contributes much less to its GDP in percentage. Discuss.) उत्तर (संपूर्ण मॉडल उत्तर) — भूमिका (Introduction): अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के अनुसार, प्रायद्वीपीय भारत प्राचीन महा-महाद्वीप गोंडवानालैंड (Gondwanaland) का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। भूवैज्ञानिक रूप से आर्कियन, धारवाड़ और गोंडवाना शैल तंत्रों से निर्मित होने के कारण भारत लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, मैंगनीज और अभ्रक जैसे खनिजों से अत्यंत समृद्ध है। किंतु गोंडवानालैंड के अपने अन्य समकक्ष देशों—जैसे ऑस्ट्रेलिया (जहाँ खनन का GDP में योगदान ~10–12% है) और दक्षिण अफ्रीका (~7–8%)—की तुलना में भारत के खनन क्षेत्र का राष्ट्रीीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान मात्र 1.7% से 2.5% के बीच सीमित बना हुआ है। मुख्य भाग (Main Body): 1. गोंडवानालैंड की भूवैज्ञानिक विरासत और भारत की खनिज संपदा: गोंडवानालैंड के हिस्से के रूप में भारत के छोटानागपुर पठार, ओडिशा-छत्तीसगढ़-झारखंड पेटी, दामोदर-सोन-महानदी-गोदावरी भ्रंश घाटियों (गोंडवाना कोयला क्षेत्र) और कर्नाटक के धारवाड़ क्षेत्र में धात्विक एवं अधात्विक खनिजों के विशाल भंडार संचित हैं। 2. भारत की GDP में खनन उद्योोग के कम योगदान के प्रमुख कारण: गहरे एवं उच्च-मूल्य वाले खनिजों के अन्वेषण (Exploration) की कमी: ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में अपने कुल संभावित खनिज क्षेत्र के 80% से अधिक भाग का गहन भू-भौतिकीय अन्वेषण किया जा चुका है, जबकि भारत में 'Obvious Geological Potential' (OGP) क्षेत्र के मात्र 10% से 15% भाग का ही गहन अन्वेषण (Deep-seated Exploration) हो पाया है। भारत में खनन मुख्यतः सतही खनिजों (कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर) तक सीमित है, जबकि सोना, हीरा, तांबा, निकल, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) का उत्खनन नगण्य है। भौगोलिक ओवरलैप — खनिज पेटी, सघन वन और जनजातीय क्षेत्र: भारत के अधिकांश खनिज भंडार मध्य और पूर्वी भारत (झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश) के उन क्षेत्रों में स्थित हैं जहाँ सघन वन क्षेत्र, जैव-विविधता गलियारे और पाँचवीं अनुसूची के जनजातीय क्षेत्र हैं। भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, वनाधिकार अधिनियम (FRA 2006) और पर्यावरणीय मंजूरियों (EIA) में लगने वाले लंबे समय के कारण खनन परियोजनाएँ वर्षों तक लंबित रहती हैं। नीतिगत एवं नियामकीय जटिलताएँ तथा उच्च कराधान: भारत में खनन क्षेत्र पर रॉयल्टी दरें, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) शुल्क और राष्ट्रीीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET) के अंशदान को मिलाकर कुल प्रभावी कर भार (Effective Tax Rate) विश्व में सर्वाधिक (~40– 50%) में से एक है, जो निजी और विदेशी निवेश (FDI) को हतोत्साहित करता है। तकनीकी पिछड़ाापन और कम उत्पादकता: भारत में अधिकांश खदानें छोटी, खंडित और पुरानी खुली खदान तकनीक (Open-cast mining) पर आधारित हैं। आधुनिक भूमिगत खनन (Underground Mining) और ऑटोमेशन का अभाव है। अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स की उच्च लागत: खदान क्षेत्रों से बंदरगाहों और इस्पात/बिजली संयंत्रों तक खनिजों की ढुलाई पर अत्यधिक रेल मालभाड़ाा (Freight Cost) लगता है, जिससे भारतीय खनिज अंतरराष्ट्रीीय बाज़ाार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं। 3. सुधार की दिशा में सरकारी प्रयास (Way Forward): राष्ट्रीीय खनिज नीति 2019 एवं MMDR संशोधन अधिनियम (2021 व 2023): निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ााने, कैप्टिव और गैर-कैप्टिव खदानों का अंतर समाप्त करने तथा 30 महत्वपूर्ण खनिजों (Critical & Deep-seated Minerals — जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल) के अन्वेषण लाइसेंस देने की शुरुआत की गई है। नेशनल जियोसाइंस डेटा रिपॉजिटरी (NGDR): एरो-जियोफिजिकल सर्वेक्षण डेटा को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराकर गहरे खनिजों की खोज को गति देना। निष्कर्ष (Conclusion): भारत की गोंडवाना भूवैज्ञानिक संपदा को आर्थिक समृद्धि में बदलने के लिए सतत खनन (Sustainable Green Mining), जीरो-वेस्ट तकनीक, त्वरित सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के गहरे अन्वेषण में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना आवश्यक है, ताकि पर्यावरण और जनजातीय हितों की रक्षा करते हुए GDP में खनन क्षेत्र का योगदान बढ़ााया जा सके।
अध्याय 2 मुख्य अभ्यास · Seafloor Spreading & Paleomagnetism▼
प्रश्न 8 (अध्याय 2 मुख्य अभ्यास प्रश्न — 15 अंक, 250 शब्द): "सागर नितल प्रसरण (Seafloor Spreading) सिद्धांत ने महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत की कमियों को कैसे दूर किया? पुराचुंबकत्व (Paleomagnetism) के प्रमाणों सहित स्पष्ट कीजिए।" उत्तर (संपूर्ण मॉडल उत्तर) — भूमिका (Introduction): 1912 में अल्फ्रेड वेगनर द्वारा प्रतिपादित महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत ने महाद्वीपों की गतिशीलता का क्रांतिकारी विचार दिया, किंतु दो प्रमुख वैज्ञानिक कमियों—(1) अपर्याप्त प्रेरक बल (ज्वारीय एवं ध्रुवीय पलायन बल) और (2) महाद्वीपों (SIAL) के महासागरीय तली (SIMA) को चीरते हुए आगे बढ़ने के विरोधाभासी तर्क—के कारण इसे लंबे समय तक अस्वीकार किया गया। 1960 के दशक में हैरी हेस (Harry Hess, 1961) के सागर नितल प्रसरण सिद्धांत तथा वाइन और मैथ्यूज (1963) के पुराचुंबकीय प्रमाणों ने इन कमियों को दूर कर आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्य भाग (Main Body): 1. सागर नितल प्रसरण ने वेगनर की कमियों को कैसे दूर किया? निष्क्रिय महासागरीय तली के स्थान पर गतिशील तली (Active Ocean Floor): वेगनर ने महासागरीय तली (SIMA) को निष्क्रिय और अचल माना था जिसके ऊपर महाद्वीप तैरते हैं। हैरी हेस ने सिद्ध किया कि महाद्वीप स्वयं महासागरीय तली को चीरकर नहीं चलते, बल्कि महासागरीय नितल स्वयं एक कन्वेयर बेल्ट (Conveyor Belt) की तरह गति करता है और महाद्वीप उसके साथ निष्क्रिय यात्री की तरह खिसकते हैं। वास्तविक प्रेरक बल की व्याख्या: ज्वारीय बल के स्थान पर आर्थर होम्स की मेंटल संवहन धाराओं (Mantle Convection Currents) को प्रेरक बल के रूप में स्थापित किया गया। जहाँ आरोही संवहन धाराएँ ऊपर उठती हैं, वहाँ मध्य-महासागरीय कटक (MOR) से नया बेसाल्टिक लावा निकलकर नई क्रस्ट बनाता है, और जहाँ अवरोही धाराएँ नीचे उतरती हैं, वहाँ महासागरीय गर्तों (Trenches) में पुरानी क्रस्ट का विनाश (Subduction) होता है। महासागरीय तली की युवा आयु और कम अवसादों का समाधान: वेगनर यह नहीं बता सके थे कि महाद्वीप 3.8 अरब वर्ष पुराने हैं, फिर भी महासागरीय तली पर अवसाद इतने कम क्यों हैं। हेस ने स्पष्ट किया कि महासागरीय तली निरंतर पुनर्चक्रित (Recycle) होती रहती है, इसलिए कहीं भी 20 करोड़ वर्ष (200 Million Years) से पुरानी महासागरीय क्रस्ट मौजूद नहीं है। 2. पुराचुंबकत्व (Paleomagnetism) के प्रमाणों की निर्णायक भूमिका: ध्रुवीय भ्रमण पथ (Apparent Polar Wandering): विभिन्न महाद्वीपों की प्राचीन चट्टानों के चुंबकीय झुकाव के अध्ययन से पता चला कि या तो चुंबकीय ध्रुव भटक रहे थे या महाद्वीप। चूंकि चुंबकीय ध्रुव घूर्णन अक्ष से जुड़े होने के कारण स्थिर रहते हैं, अतः यह सिद्ध हुआ कि महाद्वीप ही विस्थापित हुए हैं। सममित ज़ेबरा चुंबकीय पट्टियाँ (Symmetric Magnetic Stripes — Vine & Matthews, 1963): मध्य-महासागरीय कटक से निकलने वाले बेसाल्टिक लावा में मौजूद मैग्नेटाइट (Magnetite) खनिज ठंडा होते समय उस काल के भू-चुंबकीय ध्रुवों की दिशा को रिकॉर्ड कर लेते हैं। कटक के दोनों ओर सामान्य ध्रुवण (Normal Polarity / +) और उत्क्रमित ध्रुवण (Reversed Polarity / -) की चट्टानी पट्टियाँ बिल्कुल दर्पण प्रतिबिंब (Mirror Image) के रूप में पाई गईं, तथा कटक से दूर जाने पर चट्टानों की आयु समान रूप से बढ़ती पाई गई। निष्कर्ष (Conclusion): इस प्रकार, सागर नितल प्रसरण और पुराचुंबकत्व ने वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत की यांत्रिक कमियों को दूर करते हुए उसे एक ठोस भू- भौतिकीय आधार प्रदान किया, जिसके समन्वय से 1967–68 में मैकेंज़ीी, पार्कर और मॉर्गन ने सर्वमान्य प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत का प्रतिपादन किया।

Chapter 2 — Prelims PYQ & Practice MCQs

वास्तविक UPSC PYQ और अध्याय-आधारित उच्च-स्तरीय अभ्यास प्रश्न—विकल्प, सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या सहित।

9 Full Questions
UPSC Prelims 2025 · वास्तविक प्रश्नप्रश्न 1 [UPSC Prelims 2025 — वास्तविक प्रश्न]: निम्नलिखित में से कौन-से महाद्वीपीय विस्थापन (Continental Drift) की▼
प्रश्न 1 [UPSC Prelims 2025 — वास्तविक प्रश्न]: निम्नलिखित में से कौन-से महाद्वीपीय विस्थापन (Continental Drift) की परिघटना के प्रमाण हैं? 1. ब्राज़ील तट की प्राचीन चट्टानों की पट्टी पश्चिमी अफ्रीका की चट्टानों से मेल खाती है। 2. घाना के स्वर्ण निक्षेप ब्राज़ील पठार से व्युत्पन्न हैं जब दोनों महाद्वीप अगल-बगल स्थित थे। 3. भारत के गोंडवाना तंत्र के अवसादों के प्रतिरूप दक्षिणी गोलार्ध के छह (भारत सहित कुल 6) विभिन्न स्थलखंडों में मिलते हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: (A) केवल 1 और 3    (B) केवल 1 और 2    (C) 1, 2 और 3    (D) केवल 2 और 3 सही उत्तर: (C) 1, 2 और 3 व्याख्या: तीनों कथन पूर्णतः सही हैं (NCERT कक्षा 11 भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत, अध्याय 4 से प्रत्यक्ष प्रश्न)। (1) ब्राज़ील तट और पश्चिमी अफ्रीका की 200 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानें आपस में हूबहू मेल खाती हैं। (2) घाना तट पर सोने के प्लेसर निक्षेप मिलते हैं जबकि मूल स्वर्ण शिराएँ ब्राज़ील पठार में हैं। (3) भारत के अलावा दक्षिणी गोलार्ध के 5 अन्य भू-भागों (अफ्रीका, फॉकलैंड, मेडागास्कर, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया—कुल 6 भू-भागों) में समान गोंडवाना टिलाइट अवसाद मिलते हैं।
UPSC Prelims 2018 · वास्तविक प्रश्नप्रश्न 3 [UPSC Prelims 2018 — वास्तविक प्रश्न]: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:▼
प्रश्न 3 [UPSC Prelims 2018 — वास्तविक प्रश्न]: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र हर कुछ सौ हज़ार (लाख) वर्षों में उत्क्रमित (Reversed) हुआ है। 2. जब पृथ्वी की उत्पत्ति 4000 मिलियन वर्षों से भी अधिक समय पहले हुई थी, तो (वायुमंडल में) 54% ऑक्सीजन थी और कार्बन डाइऑक्साइड नहीं थी। 3. जब जीवित जीव उत्पन्न हुए, तो उन्होंने पृथ्वी के आरंभिक वायुमंडल को बदल दिया। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं? (A) केवल 1    (B) केवल 2 और 3    (C) केवल 1 और 3    (D) 1, 2 और 3 सही उत्तर: (C) केवल 1 और 3 व्याख्या: कथन 1 सही है: पुराचुंबकत्व (Paleomagnetism) प्रमाणित करता है कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र औसतन हर 2 से 3 लाख वर्षों में उत्क्रमित (Normal से Reversed Polarity) होता रहा है। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रारंभिक पृथ्वी के वायुमंडल में स्वतंत्र ऑक्सीजन (O₂) नहीं थी; उस समय हाइड्रोजन, हीलियम, जलवाष्प, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड की प्रधानता थी। कथन 3 सही है क्योंकि सायनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) द्वारा प्रकाश-संश्लेषण शुरू करने के बाद ही वायुमंडल में ऑक्सीजन का संचयन (Great Oxidation Event) हुआ।
अध्याय 2 अभ्यास · Placer Depositsप्रश्न 6 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के संदर्भ में, पश्चिमी अफ्रीका के घाना तट▼
प्रश्न 6 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के संदर्भ में, पश्चिमी अफ्रीका के घाना तट (Gold Coast) पर मिलने वाले सोने के प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits) की मूल चट्टानें (Source Rocks) कहाँ स्थित हैं? (A) दक्षिण अफ्रीका का विटवाटरसैंड बेसिन    (B) ब्राज़ील का पठार (दक्षिण अमेरिका) (C) प्रायद्वीपीय भारत का धारवाड़ क्षेत्र    (D) पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का कालगूर्ली क्षेत्र सही उत्तर: (B) ब्राज़ील का पठार (दक्षिण अमेरिका) व्याख्या: घाना तट पर सोने के जलोढ़ (Placer) निक्षेप मिलते हैं किंतु वहाँ कोई मूल स्वर्ण शिरा नहीं है। सोने की मूल चट्टानें ब्राज़ील के पठार में हैं, जो प्रमाणित करता है कि दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका अतीत में एक साथ जुड़े थे।
अध्याय 2 अभ्यास · Seafloor Spreadingप्रश्न 7 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: सागर नितल प्रसरण (Seafloor Spreading) सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-▼
प्रश्न 7 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: सागर नितल प्रसरण (Seafloor Spreading) सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन- सा कथन सही नहीं है? (A) मध्य-महासागरीय कटक (MOR) के शिखर के पास सबसे नई चट्टानें पाई जाती हैं। (B) कटक से दूर जाने पर महासागरीय चट्टानों की आयु और अवसादों की मोटाई बढ़ती जाती है। (C) महासागरीय क्रस्ट की चट्टानें महाद्वीपीय चट्टानों की तुलना में अधिक पुरानी (300 करोड़ वर्ष से अधिक) हैं। (D) कटक के दोनों ओर समान दूरी पर स्थित चट्टानों में सममित पुराचुंबकीय गुण (Mirror-image Paleomagnetism) मिलते हैं। सही उत्तर: (C) व्याख्या: महासागरीय क्रस्ट कहीं भी 20 करोड़ वर्ष (200 Million Years) से अधिक पुरानी नहीं है क्योंकि यह महासागरीय गर्तों (Trenches) में निरंतर सबडक्ट होकर मेंटल में नष्ट होती रहती है, जबकि महाद्वीपीय चट्टानें 380 करोड़ (3.8 Billion) वर्ष तक पुरानी हैं।
अध्याय 2 Mapping · Ridges & Trenchesप्रश्न 8 [अध्याय 2 मैपिंग अभ्यास प्रश्न]: निम्नलिखित महासागरीय कटकों और गर्तों के युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित है?▼
प्रश्न 8 [अध्याय 2 मैपिंग अभ्यास प्रश्न]: निम्नलिखित महासागरीय कटकों और गर्तों के युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित है? (A) कार्ल्सबर्ग कटक (Carlsberg Ridge) — उत्तरी अटलांटिक महासागर (B) सुंडा गर्त (Sunda Trench) — पश्चिमी प्रशांत महासागर (C) प्यूर्टो रिको गर्त (Puerto Rico Trench) — अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा गर्त (D) नाइंटी ईस्ट रिज (Ninety East Ridge) — दक्षिणी प्रशांत महासागर सही उत्तर: (C) व्याख्या: प्यूर्टो रिको गर्त उत्तरी अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा गर्त (~8,376 m) है। कार्ल्सबर्ग कटक अरब सागर (उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर) में है, जबकि सुंडा गर्त और नाइंटी ईस्ट रिज दोनों पूर्वी हिंद महासागर में स्थित हैं।
अध्याय 2 अभ्यास · Scientists & Contributionsप्रश्न 13 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: महाद्वीपीय विस्थापन और सागर नितल प्रसरण से संबंधित वैज्ञानिकों और उनके योगदानों▼
प्रश्न 13 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: महाद्वीपीय विस्थापन और सागर नितल प्रसरण से संबंधित वैज्ञानिकों और उनके योगदानों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. आर्थर होम्स (Arthur Holmes) — मेंटल में संवहन धारा सिद्धांत (Convection Current Theory) 2. एडवर्ड बुलार्ड (Edward Bullard) — कंप्यूटर द्वारा अटलांटिक तटों का 1000-फैदम गहराई पर मिलान 3. वाइन और मैथ्यूज (Vine & Matthews) — मध्य-महासागरीय कटक के दोनों ओर सममित चुंबकीय पट्टियों की खोज उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं? (A) केवल एक    (B) केवल दो    (C) सभी तीन    (D) कोई भी नहीं सही उत्तर: (C) सभी तीन व्याख्या: तीनों युग्म पूर्णतः सही सुमेलित हैं। आर्थर होम्स ने 1928–29 में संवहन धारा सिद्धांत दिया; एडवर्ड बुलार्ड ने 1964 में अटलांटिक महासागर के तटों का कंप्यूटर द्वारा 1,000-फैदम समगंभीरता रेखा पर मिलान किया; और फ्रेेड वाइन व ड्रमंड मैथ्यूज ने 1963 में सागरीय अधःस्तल के चुंबकीय उत्क्रमण की सममित पट्टियों (Zebra Stripes) की व्याख्या कर हैरी हेस के सागर नितल प्रसरण सिद्धांत को प्रमाणित किया।
अध्याय 2 अभ्यास · Continental vs Oceanic Crustप्रश्न 14 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: भूपर्पटी (Earth's Crust) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:▼
प्रश्न 14 [अध्याय 2 प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: भूपर्पटी (Earth's Crust) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महाद्वीपीय क्रस्ट मुख्य रूप से बेसाल्टिक चट्टानों से बनी है और इसका औसत घनत्व महासागरीय क्रस्ट से अधिक होता है। 2. महासागरीय क्रस्ट की औसत मोटाई (5–10 km) महाद्वीपीय क्रस्ट (30–70 km) की तुलना में बहुत कम होती है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (A) केवल 1    (B) केवल 2    (C) 1 और 2 दोनों    (D) न तो 1, न ही 2 सही उत्तर: (B) केवल 2 व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि महाद्वीपीय क्रस्ट ग्रेनाइटिक (Felsic/SIAL) चट्टानों से बनी है और इसका घनत्व (2.7 g/cm³) बेसाल्टिक महासागरीय क्रस्ट (3.0 g/cm³) से कम होता है। इसी कारण अभिसरण के समय भारी महासागरीय क्रस्ट नीचे सबडक्ट होती है। कथन 2 सही है।
अध्याय 2 Mapping · Fastest Spreadingप्रश्न 15 [अध्याय 2 मैपिंग अभ्यास प्रश्न]: निम्नलिखित में से किस महासागरीय कटक पर विश्व में सबसे तेज़ सागर नितल प्रसरण दर▼
प्रश्न 15 [अध्याय 2 मैपिंग अभ्यास प्रश्न]: निम्नलिखित में से किस महासागरीय कटक पर विश्व में सबसे तेज़ सागर नितल प्रसरण दर (Fastest Seafloor Spreading Rate ~ 15 cm/वर्ष) पाई जाती है? (A) मध्य-अटलांटिक कटक (Mid-Atlantic Ridge) (B) कार्ल्सबर्ग कटक (Carlsberg Ridge) (C) पूर्वी प्रशांत उभार (East Pacific Rise) (D) दक्षिण-पश्चिमी भारतीय कटक (Southwest Indian Ridge) सही उत्तर: (C) पूर्वी प्रशांत उभार (East Pacific Rise) व्याख्या: दक्षिण-पूर्वी प्रशांत महासागर में प्रशांत प्लेट और नाज़्का प्लेट के मध्य स्थित पूर्वी प्रशांत उभार (East Pacific Rise) पर सागर नितल प्रसरण की दर विश्व में सर्वाधिक (6 से 15 cm/वर्ष तक) है, जबकि मध्य-अटलांटिक कटक और आर्कटिक के गैकेल कटक (Gakkel Ridge) पर प्रसरण दर धीमी (2 से 2.5 cm/वर्ष) है।
अध्याय 1+2 समन्वित · Geomagnetismप्रश्न 16 [अध्याय 1 एवं 2 समन्वित प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: पृथ्वी के भू-चुंबकत्व (Geomagnetism) और भू-डायनेमो सिद्धांत के▼
प्रश्न 16 [अध्याय 1 एवं 2 समन्वित प्रिलिम्स अभ्यास प्रश्न]: पृथ्वी के भू-चुंबकत्व (Geomagnetism) और भू-डायनेमो सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की उत्पत्ति बाह्य तरल क्रोड (Outer Liquid Core) में पिघले हुए लोहे और निकल की संवहन धाराओं तथा कोरिओलिस बल के संयुक्त प्रभाव से होती है। 2. पृथ्वी का चुंबकीय अक्ष उसके भौगोलिक घूर्णन अक्ष के साथ पूर्णतः संपाती (0° झुकाव पर) है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (A) केवल 1    (B) केवल 2    (C) 1 और 2 दोनों    (D) न तो 1, न ही 2 सही उत्तर: (A) केवल 1 व्याख्या: कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि पृथ्वी का चुंबकीय अक्ष उसके भौगोलिक घूर्णन अक्ष से लगभग 11.5° के कोण पर झुका हुआ है, जिसके कारण भौगोलिक ध्रुव और चुंबकीय ध्रुव एक ही स्थान पर स्थित नहीं हैं।
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अध्याय अभ्यास टेस्ट (Instant Prelims Check)

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