अल्फ्रेड वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत
महाद्वीपों के जुड़े होने की संभावना 1596 में अब्राहम ऑर्टेलियस और 1910 में एफ. बी. टेलर ने जताई थी, किंतु 1912 में जर्मन मौसम वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegener) ने व्यापक प्रमाणों के साथ यह सिद्धांत प्रस्तुत किया।
पैंजिया और पैंथालासा ~250–300 MYA
कार्बोनिफेरस युग में सभी महाद्वीप जुड़कर एक विशाल महाद्वीप पैंजिया (Pangaea) थे, जिसके चारों ओर विशाल महासागर पैंथालासा (Panthalassa — वर्तमान प्रशांत महासागर का पूर्वज) फैला था।
लॉरेशिया व गोंडवानालैंड ~200 MYA
पैंजिया टूटकर उत्तर में लॉरेशिया / अंगारालैंड (उत्तरी अमेरिका, यूरोप, एशिया) और दक्षिण में गोंडवानालैंड (द. अमेरिका, अफ्रीका, मेडागास्कर, प्रायद्वीपीय भारत, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका) में बँट गया।
टेथिस सागर (Tethys Sea)
लॉरेशिया और गोंडवानालैंड के बीच उथला टेथिस सागर खुला, जिसके अवसादों के मुड़ने से आगे चलकर हिमालय और आल्प्स बने (भूमध्य सागर इसी का अवशेष है)।
| विस्थापन की दिशा | वेगनर द्वारा बताया गया बल (Proposed Force) | भौगोलिक परिणाम (वेगनर के अनुसार) |
|---|---|---|
| 1. भूमध्य रेखा की ओर प्रवाह (Equatorward Drift) | गुरुत्वाकर्षण व प्लवनशीलता बल (Pole-Fleeing Force): पृथ्वी के घूर्णन और भूमध्यरेखीय उभार से उत्पन्न बल। | अफ्रीका और प्रायद्वीपीय भारत उत्तर की ओर खिसके, जिससे टेथिस सागर मुड़कर आल्प्स और हिमालय बने तथा पीछे हिंद महासागर खुला। |
| 2. पश्चिम की ओर प्रवाह (Westward Drift) | सूर्य और चंद्रमा का ज्वारीय बल (Tidal Force): पृथ्वी के पश्चिम-से-पूर्व घूर्णन के विपरीत ज्वारीय घर्षण। | उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका पश्चिम की ओर खिसके, बीच में S-आकार का अटलांटिक महासागर बना और पश्चिमी तट पर रॉकीज़ व एंडीज़ बने। |
महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में 5 प्रमुख प्रमाण
1. महाद्वीपीय तटों की साम्यता (Jig-Saw Fit)
दक्षिण अमेरिका का पूर्वी तट (ब्राज़ील का उभार) और अफ्रीका का पश्चिमी तट (गिनी की खाड़ी / Gulf of Guinea) आरी के दाँतों की तरह फिट बैठते हैं। 1964 में एडवर्ड बुलार्ड (Edward Bullard) ने कंप्यूटर द्वारा 1,000-फैदम गहराई रेखा (Continental Slope) पर इसे पूर्णतः सटीक सिद्ध किया।
2. महासागरों के पार चट्टानों की आयु में समानता
ब्राज़ील तट की 200 करोड़ वर्ष (2 Billion Years) पुरानी शैल पट्टी पश्चिमी अफ्रीका की चट्टानों से हूबहू मेल खाती है। उत्तरी अमेरिका के अपलेशियन पर्वत और ब्रिटेन/स्कैंडिनेविया के कैलेडोनियन पर्वत एक ही श्रृंखला के हिस्से हैं।
3. टिलाइट निक्षेप (Tillite — Glacial Deposits)
हिमनद निक्षेपण से बनी टिलाइट चट्टानें भारत के गोंडवाना तलछटों के समान ही दक्षिणी गोलार्ध के 5 अन्य भू-भागों—अफ्रीका, फॉकलैंड द्वीप, मेडागास्कर, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया में मिलती हैं।
4. प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits)
पश्चिमी अफ्रीका के घाना तट (Gold Coast) पर सोने (Gold) के समृद्ध जलोढ़ निक्षेप मिलते हैं, किंतु वहाँ सोने की कोई मूल चट्टान (Source Rock) नहीं है। सोने की मूल शिराएँ ब्राज़ील के पठार में मिलती हैं।
5. जीवाश्मों का वितरण (Fossil Evidences)
- मेसोसॉरस (Mesosaurus): उथले पानी का छोटा सरीसृप जो महासागर तैरकर पार नहीं कर सकता था; इसके जीवाश्म केवल दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी केप प्रांत और ब्राज़ील के इरावर शैल समूह में मिलते हैं।
- ग्लोसोप्टेरिस वनस्पति (Glossopteris Flora): भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका की कोयला परतों में समान रूप से पाए गए।
- लिस्ट्रोसॉरस और लेमूरिया: लिस्ट्रोसॉरस (स्थलीय सरीसृप) के जीवाश्म अफ्रीका, भारत व अंटार्कटिका में तथा लेमूर (Lemurs) के जीवाश्म भारत, मेडागास्कर व अफ्रीका में मिले।
⚠️ वेगनर के सिद्धांत की आलोचना (Criticism)
1. अपर्याप्त बल: ज्वारीय बल और ध्रुवीय पलायन बल महाद्वीपों को खिसकाने के लिए 10 अरब गुना कमज़ोर हैं। 2. विरोधाभासी तर्क: पहले कहा कि SIAL बिना रुकावट SIMA पर तैरती है, फिर कहा कि SIMA के घर्षण से रॉकीज़ व एंडीज़ पर्वत बन गए।
संवहन धारा सिद्धांत, पुराचुंबकत्व और सागर नितल प्रसरण
आर्थर होम्स का संवहन धारा सिद्धांत (1928–29)
मेंटल (Asthenosphere) में रेडियोधर्मी तत्वों (U, Th, K) के क्षय से तापीय अंतर पैदा होता है और मैग्मा की संवहन धाराएँ (Convection Currents) चलती हैं:
- आरोही धाराएँ (Rising Limbs): क्रस्ट के नीचे विपरीत दिशा में मुड़कर तनाव बल लगाती हैं → मध्य-महासागरीय कटक (MOR) बनते हैं।
- अवरोही धाराएँ (Descending Limbs): नीचे उतरते समय संपीडन बल लगाती हैं → वलित पर्वत और महासागरीय गर्त (Trenches) बनते हैं।
पुराचुंबकत्व (Vine & Matthews - 1963)
मध्य-महासागरीय कटक से निकलने वाले बेसाल्टिक लावा में मौजूद मैग्नेटाइट (Magnetite) खनिज ठंडा होते समय पृथ्वी के तात्कालिक चुंबकीय ध्रुवों की दिशा में जम जाते हैं।
कटक के दोनों ओर सामान्य ध्रुवण (Normal Polarity +) और उत्क्रमित ध्रुवण (Reversed Polarity -) की चट्टानी पट्टियाँ बिल्कुल सममित (Mirror-Image Zebra Stripes) रूप में मिलती हैं।
हैरी हेस के सागर नितल प्रसरण (1961) के 5 प्रमुख प्रमाण (Prelims High-Yield)
- कटक से दूरी के साथ आयु बढ़ना: मध्य-महासागरीय कटक (MOR) के शिखर पर चट्टानें सबसे नई (Youngest) हैं और कटक से दूर जाने पर आयु समान रूप से बढ़ती है।
- महासागरीय क्रस्ट की युवा आयु: महासागरीय नितल की चट्टानें कहीं भी 20 करोड़ वर्ष (200 Million Years) से अधिक पुरानी नहीं हैं (जबकि महाद्वीपीय चट्टानें 380 करोड़ वर्ष तक पुरानी हैं)।
- अवसादों की पतली परत: महासागरीय तल पर अवसादों (Sediments) की परत बहुत पतली है और कटक के शीर्ष के पास अवसाद लगभग शून्य हैं।
- सममित चुंबकीय पट्टियाँ: कटक के दोनों ओर समान दूरी पर स्थित चट्टानों की आयु, संरचना और चुंबकीय गुण दर्पण प्रतिबिंब (Mirror Image) हैं।
- भूकंप की गहराई: मध्य-महासागरीय कटकों पर उथले भूकंप (Shallow Focus: <70 km) आते हैं, जबकि महासागरीय गर्तों (Trenches) के पास गहरे भूकंप (300–700 km) आते हैं।
विश्व मानचित्रण: प्रमुख महासागरीय कटक और गर्त
| प्रमुख कटक / गर्त (Feature) | महासागर और अवस्थिति | UPSC प्रिलिम्स व मेंस में महत्व |
|---|---|---|
| 1. मध्य-अटलांटिक कटक (Mid-Atlantic Ridge) | अटलांटिक महासागर ('S' आकार में आइसलैंड से बूवेट द्वीप तक) | उत्तर में डॉल्फिन कटक (Dolphin Ridge) और दक्षिण में चैलेंजर कटक (Challenger Ridge)। आइसलैंड इसी कटक पर स्थित है। |
| 2. कार्ल्सबर्ग कटक (Carlsberg Ridge) | उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर (अरब सागर) | अफ्रीकी प्लेट और भारतीय प्लेट को अलग करने वाला अपसारी कटक। |
| 3. नाइंटी ईस्ट रिज (Ninety East Ridge) | पूर्वी हिंद महासागर (90°E देशांतर के समानांतर) | बंगाल की खाड़ी से दक्षिणी हिंद महासागर तक 5,000 km लंबा जलमग्न कटक। |
| 4. पूर्वी प्रशांत उभार (East Pacific Rise) | दक्षिण-पूर्वी प्रशांत महासागर | विश्व में सबसे तेज़ सागर नितल प्रसरण दर (15 cm/वर्ष तक); प्रशांत और नाज़्का प्लेट के मध्य। |
| 5. मारियाना गर्त (Mariana Trench) | पश्चिमी प्रशांत महासागर (गुआम द्वीप के पास) | विश्व का सबसे गहरा गर्त (Challenger Deep ~ 10,994 m); प्रशांत व फिलीपीन प्लेट की टक्कर। |
| 6. प्यूर्टो रिको गर्त (Puerto Rico Trench) | उत्तरी अटलांटिक और कैरेबियन सागर की सीमा | अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा गर्त (~8,376 m)। |
| 7. सुंडा या जावा गर्त (Sunda / Java Trench) | पूर्वी हिंद महासागर (सुमात्रा-जावा के दक्षिण में) | हिंद महासागर का सबसे गहरा गर्त (~7,450 m); 2004 की सुनामी का उद्गम क्षेत्र। |
| 8. टोंगा और कूरिल गर्त (Tonga & Kuril) | प्रशांत महासागर (न्यूज़ीलैंड के उत्तर व जापान के उत्तर) | टोंगा गर्त का Horizon Deep (~10,882 m) विश्व का दूसरा सबसे गहरा बिंदु है। |
अध्याय 2: Prelims Statement Traps
Statement Alertसही तथ्य: वेगनर ने Pole-fleeing force और Tidal force बताए; संवहन धारा सिद्धांत Arthur Holmes (1928–29) ने दिया।
सही तथ्य: कटक पर चट्टानें सबसे नई होती हैं; कटक से दूर जाने पर चट्टानों की आयु और अवसादों की मोटाई दोनों बढ़ती हैं।
UPSC Mains — Chapter 2 Model Answer Bank
UPSC GS Paper-1 के लिए अध्याय 2 से सीधे जुड़े वास्तविक एवं अभ्यास प्रश्नों के पूर्ण मॉडल उत्तर—भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष सहित।
UPSC CSE Mains 2013 · Continental Drift▼
UPSC CSE Mains 2025 · Crustal Movements▼
UPSC CSE Mains 2021 · Gondwanaland & Mining▼
अध्याय 2 मुख्य अभ्यास · Seafloor Spreading & Paleomagnetism▼
Chapter 2 — Prelims PYQ & Practice MCQs
वास्तविक UPSC PYQ और अध्याय-आधारित उच्च-स्तरीय अभ्यास प्रश्न—विकल्प, सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या सहित।