पृथ्वी की आंतरिक संरचना के स्रोत
पृथ्वी के आंतरिक भाग की जानकारी देने वाले स्रोतों को उनकी प्रकृति के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया जाता है:
(A) प्रत्यक्ष स्रोत (Direct Sources) सीमित गहराई तक
- 1. खनन एवं गहरे महासागरीय वेधन (Mining & Deep Ocean Drilling): दक्षिण अफ्रीका की सोने की खदानें (जैसे मपोनेंग खदान / Mponeng Mine) लगभग 3.5 से 4 किमी गहरी हैं। आर्कटिक महासागर के कोला प्रायद्वीप (Kola Superdeep Borehole, रूस) में अब तक का सबसे गहरा वेधन मात्र 12.2 किमी तक ही हो सका है।
- 2. ज्वालामुखी उद्गार (Volcanic Eruptions): धरातल पर आने वाला मैग्मा/लावा दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) की चट्टानों के संगठन की प्रत्यक्ष जानकारी देता है, परंतु यह निश्चित करना कठिन होता है कि मैग्मा कितनी गहराई से आया है।
(B) अप्रत्यक्ष स्रोत (Indirect Sources) सर्वाधिक महत्वपूर्ण
- 1. तापमान, दबाव एवं घनत्व: गहराई के साथ प्रारंभ में प्रति 32 मीटर पर ~1°C तापमान बढ़ता है (भू-तापीय प्रवणता), किंतु केंद्र में तापमान ~5,000–6,000°C रहता है (रेडियोधर्मी क्षय एवं आदिकालीन ऊष्मा के कारण)। पृथ्वी का औसत घनत्व 5.5 g/cm³ है।
- 2. उल्कापिंड (Meteors): इनकी ठोस संरचना पृथ्वी के आंतरिक कोर (लोहा व निकेल) से समानता रखती है।
- 3. गुरुत्वाकर्षण एवं गुरुत्वीय विसंगति (Gravity Anomaly): ध्रुवों पर गुरुत्वाकर्षण सर्वाधिक तथा भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है; द्रव्यमान के असमान वितरण से 'गुरुत्वीय विसंगति' पता चलती है।
- 4. चुंबकीय सर्वेक्षण एवं भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves): भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के अंतरतम का सबसे विश्वसनीय एक्स-रे (X-Ray) प्रस्तुत करती हैं।
रासायनिक / परंपरागत वर्गीकरण — एडवर्ड सुएस
ऑस्ट्रियाई भूवैज्ञानिक एडवर्ड सुएस (Eduard Suess) ने चट्टानों के रासायनिक संघटन के आधार पर पृथ्वी के आंतरिक भाग को तीन परतों में बाँटा:
1. सियाल (SIAL) भूपर्पटी
सिलिका (Si) + एल्युमीनियम (Al)
- यह महाद्वीपीय क्रस्ट की ऊपरी परत है।
- प्रकृति: अम्लीय एवं हल्की चट्टानें (मुख्यतः ग्रेनाइट)।
- औसत घनत्व: 2.7 से 2.9 g/cm³।
2. सीमा (SIMA) निचली क्रस्ट / मेंटल
सिलिका (Si) + मैग्नीशियम (Mg)
- महासागरीय क्रस्ट तथा मेंटल का भाग।
- प्रकृति: क्षारीय एवं भारी चट्टानें (मुख्यतः बेसाल्ट व गैब्रो); ज्वालामुखी लावा का मुख्य स्रोत।
- औसत घनत्व: 2.9 से 4.7 g/cm³।
3. निफे (NIFE) केंद्रीय कोर
निकेल (Ni) + फेरम / लोहा (Fe)
- पृथ्वी की सबसे भीतरी केंद्रीय परत।
- चुंबकीय गुणों से युक्त भारी धातुओं की प्रधानता।
- औसत घनत्व: 11.0 से 13.6 g/cm³।
पृथ्वी की यांत्रिक / आधुनिक संरचना (क्रस्ट, मेंटल एवं कोर)
भूकंपीय तरंगों के वेग में अंतर के आधार पर पृथ्वी को तीन मुख्य परतों — भूपर्पटी (Crust), प्रवार (Mantle) और क्रोड (Core) में विभाजित किया जाता है:
| परत (Layer) | गहराई एवं विस्तार | आयतन व द्रव्यमान | भौतिक अवस्था एवं प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| 1. भूपर्पटी (Crust) | महाद्वीपीय: 30–70 किमी (पर्वतों के नीचे 70 किमी तक) महासागरीय: 5–10 किमी |
आयतन का ~1% द्रव्यमान का ~0.5% |
• महाद्वीपीय क्रस्ट: ग्रेनाइट निर्मित (हल्की, घनत्व ~2.7 g/cm³)। • महासागरीय क्रस्ट: बेसाल्ट निर्मित (अधिक सघन, घनत्व ~3.0 g/cm³)। |
| 2. मेंटल (Mantle) | मोह असंबद्धता से 2,900 किमी तक | आयतन का ~84% द्रव्यमान का ~67% |
• स्थलमंडल (Lithosphere): क्रस्ट + मेंटल का ऊपरी ठोस भाग (10–200 किमी)। • दुर्बलतामंडल (Asthenosphere: 100–400 किमी): अर्ध-गलित (Plastic/Semi-molten) परत; ज्वालामुखी मैग्मा का मुख्य स्रोत; इसी पर लिथोस्फेरिक प्लेटें संचलन करती हैं। |
| 3. कोर (Core) | 2,900 किमी से 6,371 किमी (केंद्र) तक | आयतन का ~15% द्रव्यमान का ~32.5% |
• बाहरी कोर (2,900–5,150 किमी): द्रव अवस्था (Liquid state) — इसमें S-तरंगें प्रवेश नहीं कर पातीं; कोरिओलिस बल व संवहन से भू-चुंबकीय क्षेत्र (Geodynamo) बनता है। • आंतरिक कोर (5,150–6,371 किमी): अत्यधिक दाब के कारण उच्च तापमान के बावजूद ठोस अवस्था (Solid state) में। |
पृथ्वी की 5 प्रमुख भूगर्भिक असंबद्धताएँ
पृथ्वी के भीतर वे संक्रमण क्षेत्र (Transition Zones) जहाँ चट्टानों के घनत्व और भूकंपीय तरंगों की गति में अचानक परिवर्तन आता है, उन्हें असंबद्धता (Discontinuity) कहते हैं:
| क्रम (ऊपर से नीचे) | असंबद्धता का नाम (Discontinuity) | किन दो परतों को अलग करती है? | अनुमानित गहराई / विशेष बिंदु |
|---|---|---|---|
| 1. | कॉनराड असंबद्धता (Conrad) | ऊपरी क्रस्ट (SIAL/Granitic) एवं निचली क्रस्ट (SIMA/Basaltic) | महाद्वीपीय क्रस्ट के भीतर (~15–20 किमी) |
| 2. | मोहरोविसिक / मोह असंबद्धता (Moho) | निचली क्रस्ट एवं ऊपरी मेंटल | ~30–70 किमी (महाद्वीप) / 5–10 किमी (महासागर) |
| 3. | रेपेटी असंबद्धता (Repetti) | ऊपरी मेंटल एवं निचला मेंटल | ~700 किमी गहराई पर |
| 4. | गुटेनबर्ग असंबद्धता (Gutenberg / CMB) | निचला मेंटल (ठोस) एवं बाहरी कोर (द्रव) | 2,900 किमी (यहाँ S-तरंगें रुक जाती हैं व P-तरंगों का वेग अचानक घटता है) |
| 5. | लेहमैन असंबद्धता (Lehmann) | बाहरी कोर (द्रव) एवं आंतरिक कोर (ठोस) | 5,150 किमी गहराई पर |
"कॉन (Conrad) मोरे (Moho - Repetti) गुल (Gutenberg - Lehmann)" — कॉनराड → मोह → रेपेटी → गुटेनबर्ग → लेहमैन (ऊपरी क्रस्ट से आंतरिक कोर तक का सटीक क्रम)।
भूकंपीय तरंगें: भूगर्भिक (P व S) एवं धरातलीय (L) तरंगें
भूकंप के दौरान उद्गम केंद्र (Focus / Hypocentre) से ऊर्जा मुक्त होने पर दो मुख्य प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं — भूगर्भिक तरंगें (Body Waves) और धरातलीय तरंगें (Surface Waves):
| विशेषता का आधार | P-तरंगें (Primary Waves) | S-तरंगें (Secondary Waves) | L-तरंगें / धरातलीय तरंगें (Love & Rayleigh) |
|---|---|---|---|
| तरंग की प्रकृति | अनुदैर्ध्य (Longitudinal) / संपीडनात्मक (ध्वनि तरंगों के समान) | अनुप्रस्थ (Transverse) / अपरूपण (प्रकाश व जल तरंगों के समान) | धरातल के साथ चलने वाली यांत्रिक तरंगें (भूगर्भिक तरंगों व चट्टानों की अंतर्क्रिया से निर्मित) |
| गमन माध्यम (Medium) | ठोस, द्रव एवं गैस — तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं। | केवल ठोस (Only Solids) माध्यम में गमन करती हैं; द्रव में लुप्त हो जाती हैं। | पृथ्वी की ऊपरी सतह (क्रस्ट) के साथ गमन करती हैं। |
| वेग एवं आगमन (Speed) | सर्वाधिक तीव्र (8–14 km/s) — सीस्मोग्राफ पर सबसे पहले पहुँचती हैं। | मध्यम वेग (4–8 km/s) — P-तरंगों के कुछ समय बाद पहुँचती हैं। | सबसे कम वेग (3–5 km/s) — सबसे अंत में पहुँचती हैं। |
| कणों का कंपन एवं प्रभाव | तरंग की दिशा के समानांतर (आगे-पीछे) कंपन → चट्टानों में संकुचन व फैलाव (Compression & Dilation)। | तरंग की दिशा के लंबवत (समकोण पर ऊपर-नीचे) कंपन → चट्टानों में उभार व गर्त। | सर्वाधिक विनाशकारी (इमारतों व संरचनाओं को सबसे अधिक क्षति पहुँचाती हैं)। |
भूकंपीय छाया क्षेत्र (Seismic Shadow Zones)
पृथ्वी की सतह पर अधिकेंद्र (Epicentre) से वे कोणीय दूरी क्षेत्र जहाँ सीस्मोग्राफ पर कोई भी भूकंपीय तरंग दर्ज नहीं होती, उन्हें भूकंपीय छाया क्षेत्र (Shadow Zone) कहा जाता है:
1. P-तरंग छाया क्षेत्र (105° से 145°)
- अधिकेंद्र से 105° तक P और S दोनों तरंगें दर्ज होती हैं।
- 2,900 किमी (गुटेनबर्ग असंबद्धता) पर जब P-तरंगें ठोस मेंटल से द्रव बाहरी कोर में प्रवेश करती हैं, तो उनका वेग घट जाता है और वे अपवर्तित (Refracted) होकर मुड़ जाती हैं।
- इस अपवर्तन के कारण 105° से 145° (NCERT में 105°–145° / कुछ स्रोतों में 103°–142°) के बीच एक वलयाकार पट्टी में P-तरंगें नहीं पहुँचतीं। 145° के बाद वे पुनः प्रकट होती हैं।
2. S-तरंग छाया क्षेत्र (105° से 180° के पार पूरा क्षेत्र)
- चूँकि S-तरंगें केवल ठोस माध्यम में ही चल सकती हैं, इसलिए वे 2,900 किमी पर द्रव बाहरी कोर को पार नहीं कर पातीं।
- परिणामस्वरूप अधिकेंद्र से 105° के बाद पूरे भाग में कहीं भी S-तरंगें दर्ज नहीं होतीं।
- प्रमुख निष्कर्ष: S-तरंग का छाया क्षेत्र पृथ्वी की सतह के 40% से अधिक भाग पर फैला होता है और यह P-तरंग के छाया क्षेत्र से कहीं अधिक विस्तृत है।
पृथ्वी एवं भूपर्पटी का रासायनिक संघटन (Elemental Composition)
प्रारंभिक परीक्षा (UPSC व BPSC) में अक्सर "संपूर्ण पृथ्वी (Whole Earth)" और "केवल भूपर्पटी (Earth's Crust)" में सर्वाधिक पाए जाने वाले तत्वों के बीच भ्रम पैदा कर प्रश्न पूछा जाता है:
🌍 समग्र पृथ्वी (Whole Earth) में तत्व
क्रम: लोहा (Fe) > ऑक्सीजन (O) > सिलिकॉन (Si) > मैग्नीशियम (Mg)
🏔️ भूपर्पटी (Earth's Crust) में तत्व
क्रम: ऑक्सीजन (O) > सिलिकॉन (Si) > एल्युमीनियम (Al) > लोहा (Fe)
UPSC Prelims Traps एवं Mains GS-1 उत्तर-लेखन फ्रेमवर्क
⚠️ UPSC Prelims Alert — जहाँ 90% छात्र गलती करते हैं!
- Trap 1 (स्थलमंडल बनाम क्रस्ट): स्थलमंडल (Lithosphere) केवल भूपर्पटी (Crust) नहीं है! इसमें भूपर्पटी + ऊपरी ठोस मेंटल का भाग (10 से 200 किमी तक) शामिल होता है।
- Trap 2 (मैग्मा का मुख्य स्रोत): ज्वालामुखी उद्गार के दौरान बाहर आने वाले लावा/मैग्मा का मुख्य स्रोत 'बाहरी कोर' नहीं, बल्कि मेंटल का ऊपरी भाग दुर्बलतामंडल (Asthenosphere: 100–400 किमी) होता है।
- Trap 3 (UPSC Prelims 2023 PYQ): P-तरंगों में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर (आगे-पीछे) कंपन करते हैं, जबकि S-तरंगों में कण संचरण की दिशा के समकोण (ऊपर-नीचे) पर कंपन करते हैं।
✍️ Mains GS-1 अभ्यास प्रश्न एवं 150-शब्द मॉडल उत्तर फ्रेमवर्क
प्रश्न: "पृथ्वी की आंतरिक संरचना के प्रत्यक्ष अवलोकन की सीमाओं के बावजूद, भूकंपीय तरंगें भूगर्भ के भौतिक और रासायनिक स्वरूप को समझने में किस प्रकार निर्णायक साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं?" (150 शब्द, 10 अंक)
- 1. भूमिका (Introduction — 20–25 शब्द): पृथ्वी की विशाल त्रिज्या (6,371 किमी) और उच्च ताप-दाब के कारण प्रत्यक्ष वेधन (कोला बोरहोल: 12.2 किमी) की सीमा का उल्लेख करें तथा P व S भूकंपीय तरंगों को पृथ्वी के अंतरतम का 'प्राकृतिक सीटी-स्कैन' बताएँ।
-
2. मुख्य भाग (Body — 90–100 शब्द):
• घनत्व एवं वेग सह-संबंध: गहराई के साथ P और S तरंगों की गति में तीन स्थानों (मोह, गुटेनबर्ग 2,900 किमी, लेहमैन 5,150 किमी) पर आकस्मिक परिवर्तन से क्रस्ट, मेंटल और कोर का सीमांकन।
• S-तरंग छाया क्षेत्र (105° के पार): चूँकि S-तरंगें द्रव में गमन नहीं करतीं, 2,900 किमी के नीचे उनका विलुप्त होना सिद्ध करता है कि बाहरी कोर द्रव अवस्था में है।
• P-तरंग छाया क्षेत्र (105°–145°) एवं आंतरिक कोर: 5,150 किमी के बाद P-तरंगों की गति में पुनः वृद्धि सिद्ध करती है कि आंतरिक कोर अत्यधिक दाब के कारण ठोस (Ni-Fe) है। (साथ में छोटा छाया-क्षेत्र आरेख बनाएँ)। - 3. निष्कर्ष (Conclusion — 20–25 शब्द): भूकंपीय साक्ष्यों ने न केवल पृथ्वी की परतदार संरचना को स्पष्ट किया है, बल्कि प्लेट विवर्तनिकी (Asthenosphere) और भू-चुंबकत्व (Geodynamo) की गुत्थियों को भी सुलझाया है।
UPSC Mains — Chapter 1 Full Model Answer Bank
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भू-चुंबकत्व और तुलनात्मक ग्रह-विज्ञान से जुड़े 3 पूर्ण उत्तर—भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष सहित।
अध्याय 1 मुख्य अभ्यास · 15 अंक · 250 शब्द
भूकंपीय तरंगें पृथ्वी की आंतरिक संरचना के सबसे विश्वसनीय साक्ष्य कैसे प्रस्तुत करती हैं? Shadow Zones के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।▼
UPSC CSE Mains 2024 · GS-1 · 10 अंक · 150 शब्द
अरोरा ऑस्ट्रेलिस और अरोरा बोरियालिस क्या हैं? ये किस प्रकार उत्पन्न होते हैं?▼
UPSC CSE Mains 2017 · GS-1 · 10 अंक · 150 शब्द
NASA का Juno Mission पृथ्वी की उत्पत्ति और विकास को समझने में किस प्रकार सहायता करता है?▼
UPSC Prelims — Chapter 1 PYQ + Practice MCQ Bank
Chapter 1 से सीधे जुड़े वास्तविक PYQ और उच्च-स्तरीय अभ्यास प्रश्न—विकल्प, सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या सहित।