1.5.4.2 अभिसारी सीमा

जहाँ दो विवर्तनिक प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, वहाँ अभिसारी सीमा (Convergent Boundary) बनती है।

यह पृथ्वी की सबसे शक्तिशाली विवर्तनिक सीमाओं में से है और इससे—

जुड़े हैं।

अभिसरण के तीन मुख्य प्रकार

1. महासागर–महाद्वीप अभिसरण

घनी महासागरीय प्लेट हल्की महाद्वीपीय प्लेट के नीचे सबडक्ट होती है।

परिणाम—

उदाहरण—

नाज़्का प्लेट का दक्षिण अमेरिकी प्लेट के नीचे सबडक्शन → एंडीज पर्वत।

2. महासागर–महासागर अभिसरण

दो महासागरीय प्लेटों में सामान्यतः अधिक पुरानी/घनी प्लेट दूसरी के नीचे सबडक्ट होती है।

परिणाम—

उदाहरण—

मारियाना, जापान के कुछ भाग, टोंगा।

3. महाद्वीप–महाद्वीप अभिसरण

पहले बीच का महासागर बंद होता है।

इसके बाद दो हल्की महाद्वीपीय पर्पटियाँ टकराती हैं।

वे आसानी से गहरे मैंटल में सबडक्ट नहीं होतीं।

इसलिए पर्पटी—

है।

उदाहरण—

भारत–यूरेशिया टक्कर → हिमालय और तिब्बती पठार।

सबडक्शन

एक प्लेट का दूसरी के नीचे मैंटल में जाना सबडक्शन (Subduction) कहलाता है।

यह महासागरीय स्थलमंडल के पुनर्चक्रण की मुख्य प्रक्रिया है।

गर्त

जहाँ महासागरीय प्लेट नीचे मुड़ती है वहाँ गहरी महासागरीय गर्त (Ocean Trench) बनती है।

उदाहरण—

वाडाटी–बेनीऑफ क्षेत्र

सबडक्ट होती प्लेट में भूकंपों की झुकी हुई पट्टी को वाडाटी–बेनीऑफ क्षेत्र कहते हैं।

भूकंप लगभग सतह से सैकड़ों किलोमीटर गहराई तक हो सकते हैं।

यह सबडक्शन का महत्वपूर्ण भूकंपीय प्रमाण है।

ज्वालामुखीय चाप

डूबती स्लैब से जल निकलता है।

ऊपरी मैंटल वेज का गलनांक घटता है।

आंशिक पिघलाव से मैग्मा बनता है।

मैग्मा ऊपर जाकर ज्वालामुखीय चाप बनाता है।

महासागरीय द्वीप चाप

महासागर–महासागर अभिसरण।

महाद्वीपीय ज्वालामुखीय चाप

महासागर–महाद्वीप अभिसरण।

महाद्वीपीय टक्कर और ज्वालामुखिता

महाद्वीप–महाद्वीप टक्कर में हिमालय जैसे विशाल पर्वत बनते हैं।

सक्रिय सबडक्शन-जैसी व्यापक ज्वालामुखीय चाप ज्वालामुखिता सामान्यतः प्रमुख विशेषता नहीं होती।

हालाँकि पर्पटीय पिघलाव से ग्रेनाइटिक मैग्मा बन सकता है।

भारत–यूरेशिया टक्कर

भारतीय प्लेट गोंडवानालैंड से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ी।

टेथिस महासागर धीरे-धीरे बंद हुआ।

अंततः भारतीय और यूरेशियाई महाद्वीपीय पर्पटियों की टक्कर हुई।

परिणाम—

अंडमान–सुमात्रा सबडक्शन

भारत के पूर्व में भारतीय/ऑस्ट्रेलियाई महासागरीय स्थलमंडल सुंडा–बर्मा क्षेत्र के नीचे सबडक्ट होता है।

इससे—

जुड़े हैं।

2004 हिंद महासागर भूकंप

26 दिसंबर 2004 का महान सुमात्रा–अंडमान भूकंप इसी अभिसारी सबडक्शन सीमा पर हुआ।

समुद्रतल के अचानक विस्थापन से विनाशकारी सुनामी उत्पन्न हुई।

2025 का समसामयिक अद्यतन — भारतीय प्लेट की गहरी संरचना

2025 के अध्ययन ने तिब्बत के नीचे भारतीय स्थलमंडल की संरचना में पश्चिम–पूर्व अंतर दिखाया।

पूर्वी भागों में भारतीय स्थलमंडलीय मैंटल के पर्पटी से अलग होने और फटने के संकेत मिले।

यह बताता है कि महाद्वीपीय टक्कर गहराई में अत्यंत जटिल होती है।

2025 — अभिसरण को चलाने वाला बल

2025 के Nature Geoscience मॉडल के अनुसार सुमात्रा–जावा सबडक्शन से उत्पन्न स्लैब पुल वर्तमान भारत–यूरेशिया अभिसरण का प्रमुख चालक हो सकता है।

इससे एक महत्वपूर्ण अवधारणा सामने आती है—

एक प्लेट की एक सीमा पर चल रही सबडक्शन दूसरी दूरस्थ सीमा पर महाद्वीपीय टक्कर को प्रभावित कर सकती है।

अभिसारी सीमा और भूकंप जोखिम

विश्व के सबसे बड़े मेगाथ्रस्ट भूकंप अभिसारी सबडक्शन सीमाओं पर होते हैं।

कारण—

दो प्लेटों के बीच बड़ा क्षेत्र लॉक होकर लंबे समय तक तनाव जमा कर सकता है।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ

अभिसारी सीमा को सीधे परिभाषा सहित पूछने वाला स्पष्ट हालिया प्रत्यक्ष प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

सत्यापित संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ

भूगोल वैकल्पिक, 2014

प्लेट विवर्तनिकी द्वारा हिमालय और अपालेशियन पर्वतों की उत्पत्ति की व्याख्या पूछी गई।

भूगोल वैकल्पिक, 2019

विभिन्न प्रकार की प्लेट सीमाओं की तुलना कीजिए।

दोनों प्रश्न अभिसारी सीमा से सीधे संबंधित हैं।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा PYQ

69वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा, 2023 में प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत प्रत्यक्ष पूछा गया।

अभिसारी सीमा को अलग नाम से पूछने वाला स्पष्ट सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

सत्यापित बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा PYQ

प्रत्यक्ष सत्यापित प्रश्न नहीं मिला।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम तथ्य

अभिसारी = प्लेटें पास आती हैं।

महासागरीय प्लेट सबडक्ट हो सकती है।

महासागर–महाद्वीप → एंडीज प्रकार।

महासागर–महासागर → द्वीप चाप।

महाद्वीप–महाद्वीप → हिमालय।

सबडक्शन में गहरे भूकंप संभव।

2004 सुमात्रा–अंडमान भूकंप अभिसारी सीमा पर हुआ।

निष्कर्ष

अभिसारी सीमाएँ पृथ्वी की पर्पटी के विनाश, पुनर्चक्रण और पर्वतनिर्माण की मुख्य पट्टियाँ हैं। सबडक्शन और महाद्वीपीय टक्कर से महासागरीय गर्त, ज्वालामुखीय चाप, गहरे भूकंप और हिमालय जैसे विशाल पर्वत विकसित होते हैं।