1.3.2.6 दुर्बलतामंडल

दुर्बलतामंडल पृथ्वी के ऊपरी मैंटल का वह अपेक्षाकृत कमजोर, नम्य और दीर्घकाल में प्रवाही भाग है जो कठोर स्थलमंडल के नीचे स्थित होता है। अंग्रेज़ी में इसे Asthenosphere कहा जाता है।

इसे पूरी तरह पिघली हुई परत समझना गलत है। इसका अधिकांश पदार्थ ठोस होता है, लेकिन तापमान गलनांक के निकट होने, कम यांत्रिक शक्ति और कुछ क्षेत्रों में अल्प आंशिक पिघलाव के कारण यह भूवैज्ञानिक समयमान पर धीरे-धीरे विकृत और प्रवाहित कर सकता है।

स्थिति और गहराई

दुर्बलतामंडल ऊपरी मैंटल का हिस्सा है। इसकी गहराई पूरी पृथ्वी पर एक समान नहीं है। सामान्यतः इसे स्थलमंडल के आधार से शुरू होकर लगभग 100–350/400 किमी के क्रम तक फैले कमजोर ऊपरी-मैंटल क्षेत्र के रूप में समझा जाता है।

मध्य-महासागरीय कटकों और सक्रिय क्षेत्रों के नीचे यह अपेक्षाकृत उथला हो सकता है, जबकि पुराने क्रेटोनिक क्षेत्रों के नीचे कठोर स्थलमंडल अधिक मोटा होने के कारण दुर्बलतामंडल अधिक गहराई पर मिलता है।

स्थलमंडल और दुर्बलतामंडल

आधार स्थलमंडल दुर्बलतामंडल
प्रकृति कठोर और भंगुर कमजोर और नम्य
संरचना भूपर्पटी + कठोर ऊपरी मैंटल ऊपरी मैंटल का कमजोर भाग
प्लेटों से संबंध विवर्तनिक प्लेटें इसी से बनी हैं प्लेटों के नीचे स्थित
व्यवहार अपेक्षाकृत प्रत्यास्थ/भंगुर दीर्घकाल में प्रवाही
पिघलाव सामान्यतः ठोस मुख्यतः ठोस; कुछ क्षेत्रों में अल्प आंशिक पिघलाव
भूकंपीय संकेत अपेक्षाकृत उच्च वेग कई क्षेत्रों में निम्न-वेग क्षेत्र

परीक्षा-फँद

दुर्बलतामंडल = पिघले हुए मैग्मा का महासागर — गलत।

सही कथन है—

दुर्बलतामंडल मुख्यतः ठोस है, लेकिन उच्च तापमान के कारण इसकी यांत्रिक शक्ति कम है और यह दीर्घकाल में प्लास्टिक/श्यान व्यवहार कर सकता है।

निम्न-वेग क्षेत्र

दुर्बलतामंडल के कुछ भागों में भूकंपीय तरंगों के वेग में कमी देखी जाती है। इसे Low Velocity Zone — LVZ कहा जाता है।

विशेष रूप से S-तरंगों के वेग में कमी इस क्षेत्र की कम कठोरता का संकेत देती है।

संभावित कारण—

स्थलमंडल–दुर्बलतामंडल सीमा

स्थलमंडल और दुर्बलतामंडल के बीच की सीमा को Lithosphere–Asthenosphere Boundary — LAB कहा जाता है।

यह मोहो से अलग है।

मोहो — भूपर्पटी और मैंटल की रासायनिक/भूकंपीय सीमा।

LAB — कठोर स्थलमंडल और कमजोर दुर्बलतामंडल की यांत्रिक/तापीय सीमा।

LAB की पहचान के लिए वैज्ञानिक S-तरंग वेग, receiver functions, surface-wave tomography, विद्युत चालकता और तापीय मॉडल का उपयोग करते हैं।

दुर्बलतामंडल कमजोर क्यों है?

गहराई पर तापमान इतना बढ़ जाता है कि मैंटल की चट्टानें ठोस रहते हुए भी दीर्घकालीन दबाव में धीरे-धीरे बह सकती हैं।

कुछ क्षेत्रों में थोड़ी मात्रा में पिघलाव या जल खनिजों की शक्ति और कम कर सकते हैं।

यह पानी जैसा द्रव नहीं है; इसकी श्यानता अत्यंत अधिक होती है।

प्लेट विवर्तनिकी में भूमिका

दुर्बलतामंडल प्लेट विवर्तनिकी की यांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण है। कठोर स्थलमंडलीय प्लेटों और नीचे के प्रवाही मैंटल के बीच यांत्रिक विच्छेदन इसी क्षेत्र से जुड़ा है।

लेकिन प्लेटों की गति का एकमात्र कारण दुर्बलतामंडल का संवहन नहीं है। आधुनिक प्लेट विवर्तनिकी में—

सभी की भूमिका मानी जाती है।

मध्य-महासागरीय कटक

मध्य-महासागरीय कटक के नीचे गर्म मैंटल ऊपर उठता है। दबाव घटने से आंशिक पिघलाव होता है, बेसाल्टिक मैग्मा बनता है और नई महासागरीय पर्पटी का निर्माण होता है।

यहाँ स्थलमंडल पतला और दुर्बलतामंडल अपेक्षाकृत उथला होता है।

सबडक्शन क्षेत्र

सबडक्शन में ठंडी स्थलमंडलीय प्लेट नीचे मैंटल में जाती है। इससे दुर्बलतामंडलीय प्रवाह प्रभावित होता है।

नीचे जाती प्लेट से मुक्त जल ऊपर के मैंटल वेज का गलनांक कम कर सकता है और ज्वालामुखीय चापों के लिए मैग्मा उत्पन्न हो सकता है।

समस्थिति से संबंध

दीर्घकालीन समयमान पर स्थलमंडल के भार में परिवर्तन के प्रति नीचे का कमजोर मैंटल समायोजन कर सकता है।

उदाहरण—

यह समस्थितिक समायोजन से जुड़ा है।

भारत के संदर्भ में दुर्बलतामंडल

भारत के नीचे LAB और दुर्बलतामंडल की गहराई क्षेत्रीय रूप से बदलती है।

प्राचीन भारतीय क्रेटोन के नीचे स्थलमंडल मोटा है, जबकि सक्रिय प्लेट सीमाओं और कुछ तापीय/ज्वालामुखीय क्षेत्रों में LAB अपेक्षाकृत उथला हो सकता है।

भारत–एशिया टक्कर और इंडो–बर्मा सबडक्शन क्षेत्र आधुनिक भूकंपीय अध्ययनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

समसामयिक अद्यतन — इंडो–बर्मा, 2026

2026 में प्रकाशित Geophysical Research Letters के अध्ययन में Sp receiver functions द्वारा इंडो–बर्मा क्षेत्र की स्थलमंडल–दुर्बलतामंडल सीमा का अध्ययन किया गया।

मुख्य निष्कर्ष—

समसामयिक अद्यतन — मध्य हिंद महासागर, 2026

मध्य हिंद महासागर बेसिन के ocean-bottom seismometer डेटा पर आधारित 2026 के अध्ययन में विभिन्न प्रोफाइलों पर स्थलमंडल का आधार लगभग 67–82 किमी गहराई के क्रम में पाया गया।

इसके नीचे S-तरंग वेग में कमी ने LAB और ऊपरी दुर्बलतामंडल की पहचान में सहायता की।

सत्यापित UPSC Prelims PYQ

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में दुर्बलतामंडल की प्रत्यक्ष परिभाषा या LAB पर स्पष्ट, वर्ष-सहित प्रत्यक्ष PYQ सत्यापित नहीं मिला।

इसलिए किसी अभ्यास प्रश्न को UPSC PYQ नहीं कहा गया है।

सत्यापित UPSC Mains PYQ

इस सूक्ष्म उपविषय पर UPSC GS Mains का प्रत्यक्ष प्रश्न सत्यापित नहीं मिला।

प्लेट विवर्तनिकी पर Geography Optional के प्रश्नों में दुर्बलतामंडल की अवधारणा उपयोगी है, लेकिन उन्हें प्रत्यक्ष “दुर्बलतामंडल PYQ” नहीं माना गया है।

सत्यापित BPSC Prelims PYQ

70वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा, 2024

प्रश्न:

“पृथ्वी का वह दृढ़तम बाहरी भाग कौन-सा है जिसमें संपूर्ण भूपर्पटी और ऊपरी मैंटल शामिल हैं और जो विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है?”

सही उत्तर:

स्थलमंडल।

इस प्रश्न में Asthenosphere/दुर्बलतामंडल विकल्प के रूप में दिया गया था। यह स्थलमंडल और दुर्बलतामंडल के अंतर को समझने के लिए सीधे प्रासंगिक है।

सत्यापित BPSC Mains PYQ

68वीं BPSC Mains — Geology Optional, 2023

प्रश्न:

“The asthenosphere is—”

विकल्पों में—

दिए गए थे।

सही उत्तर:

Hot and weak — गर्म और कमजोर।

यह दुर्बलतामंडल की प्रकृति पर प्रत्यक्ष BPSC Mains Geology Optional PYQ है।

इसे BPSC GS Mains का प्रश्न नहीं समझना चाहिए।

Prelims के लिए अंतिम तथ्य

दुर्बलतामंडल ऊपरी मैंटल का हिस्सा है।

यह स्थलमंडल के नीचे स्थित होता है।

यह मुख्यतः ठोस है, पूर्णतः पिघला हुआ नहीं।

यह उच्च तापमान के कारण यांत्रिक रूप से कमजोर है।

यह भूवैज्ञानिक समयमान पर धीरे-धीरे प्रवाहित कर सकता है।

दुर्बलतामंडल का संबंध निम्न-वेग क्षेत्र से है।

LAB स्थलमंडल और दुर्बलतामंडल की सीमा है।

LAB और मोहो एक ही सीमा नहीं हैं।

निष्कर्ष

दुर्बलतामंडल पृथ्वी के ऊपरी मैंटल का कमजोर और नम्य भाग है, जो कठोर स्थलमंडलीय प्लेटों के नीचे स्थित है। इसकी कम यांत्रिक शक्ति, उच्च तापमान और कुछ क्षेत्रों में अल्प आंशिक पिघलाव प्लेटों के नीचे धीमे प्रवाह को संभव बनाते हैं। आधुनिक भूकंपीय अध्ययन बताते हैं कि इसकी गहराई और प्रकृति क्षेत्रीय विवर्तनिकी के अनुसार बदलती है।