BARC की समुद्री जल से लिथियम निष्कर्षण तकनीक और नया कार्बन अपररूप डायमंडाइन
BARC की प्राकृतिक समुद्री जल से लगभग 90% लिथियम पुनर्प्राप्ति तकनीक, DBM–MIBK प्रक्रिया और नए त्रि-आयामी कार्बन अपररूप डायमंडाइन का UPSC के लिए विस्तृत अध्ययन।
23 अक्टूबर 2026
चर्चा में क्यों?
BARC के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक समुद्री जल से लगभग 90% लिथियम पुनर्प्राप्त करने वाली चयनात्मक रासायनिक प्रक्रिया विकसित की है। दूसरी ओर स्वीडिश शोधकर्ताओं ने डायमंडाइन (Diamondiyne) नामक नया त्रि-आयामी कार्बन अपररूप पहली बार संश्लेषित किया है। दोनों घटनाएँ महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा और उन्नत पदार्थ विज्ञान से जुड़ी हैं।
समुद्री जल से लिथियम निकालना कठिन क्यों है?
- समुद्री जल में अनुमानतः लगभग 230 अरब टन लिथियम है, लेकिन सांद्रता करीब 0.17 mg/L है।
- मैग्नीशियम-लिथियम अनुपात 6,000 से अधिक हो सकता है।
- कम सांद्रता के कारण विशाल जल मात्रा संसाधित करनी पड़ती है, इसलिए ऊर्जा और लागत निर्णायक हैं।
BARC की तीन-चरणीय प्रक्रिया
- अशुद्धि हटाना: NaOH और Na₂CO₃ से pH बढ़ाकर 99% से अधिक Mg/Ca जैसे बाधक आयन हटाए गए।
- चयनात्मक निष्कर्षण: डाइबेंज़ोइल मीथेन (DBM) को मिथाइल आइसोब्यूटाइल कीटोन (MIBK) में घोलकर लिथियम बाँधा गया; लगभग 1 लीटर उपचारित जल पर 100 mL कार्बनिक विलायक।
- स्ट्रिपिंग: तनु नाइट्रिक अम्ल से लिथियम अलग घोल में लिया गया। पाँच चक्रों में रिकवरी लगभग 90% बनी रही, पर हर चक्र में करीब 10% भौतिक विलायक-हानि रिपोर्ट हुई।
शोध Talanta में “Development of a novel selective extraction system for lithium and application to its secondary resources” शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
भारत के लिए महत्त्व और सीमाएँ
EV और ऊर्जा-भंडारण के लिए लिथियम रणनीतिक है। समुद्री जल विशाल वैकल्पिक स्रोत है और भविष्य में विलवणीकरण ब्राइन के साथ एकीकरण की संभावना हो सकती है। लेकिन तकनीक अभी प्रयोगशाला/प्रारंभिक शोध है; ऊर्जा मांग, रसायन लागत, दीर्घकालिक विलायक हानि, झाग, समुद्री पारिस्थितिकी और बैटरी-ग्रेड शोधन का परीक्षण बाकी है। इसे तत्काल व्यावसायिक समाधान मानना गलत होगा।
डायमंडाइन: नया कार्बन अपररूप
- यह शुद्ध कार्बन का नया त्रि-आयामी छिद्रयुक्त अपररूप है।
- कार्बन परमाणु त्रिक बंधों से जुड़े हैं और ढाँचा टेट्राहेड्रल/हीरा-जैसा 3D नेटवर्क बनाता है।
- University of Gothenburg सहित स्वीडिश सहयोग ने इसे पहली बार वास्तविक रूप में बनाया।
- यह sp और sp³ बंधन-विन्यासों को जोड़ने वाली नई 3D कार्बन सामग्री है।
स्थिर पृष्ठभूमि: कार्बन के प्रमुख अपररूप
| अपररूप | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| हीरा | 3D sp³ जाल; अत्यधिक कठोर |
| ग्रेफाइट | परतदार sp²; चालक |
| ग्राफीन | एक-परमाणु मोटी 2D कार्बन शीट |
| कार्बन नैनोट्यूब | नलीनुमा नैनो-संरचना |
| डायमंडाइन | त्रिक-बंधयुक्त छिद्रयुक्त 3D कार्बन नेटवर्क |
विगत वर्ष का वास्तविक UPSC प्रश्न
UPSC CSE Prelims 2012
ग्राफीन हाल ही में प्रायः समाचारों में रहा है। इसका क्या महत्त्व है?
1. यह एक द्विविमीय पदार्थ है और इसमें अच्छी विद्युत चालकता है।
2. यह अब तक परीक्षित सबसे पतले, किंतु सबसे मजबूत पदार्थों में से एक है।
3. यह पूरी तरह सिलिकॉन से बना है और इसकी प्रकाशीय पारदर्शिता अधिक है।
4. इसका उपयोग टच स्क्रीन, LCD और कार्बनिक LED के लिए आवश्यक ‘चालक इलेक्ट्रोड’ के रूप में किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3 और 4
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4सही उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (c) केवल 1, 2 और 4। ग्राफीन कार्बन का द्विविमीय अपररूप है; यह सिलिकॉन से बना पदार्थ नहीं है।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
1. BARC प्रक्रिया में DBM को MIBK में घोलकर लिथियम निष्कर्षित किया जाता है। 2. समुद्री जल में लिथियम की सांद्रता बहुत अधिक है। 3. डायमंडाइन 3D छिद्रयुक्त कार्बन अपररूप है।
(a) केवल 1 और 2 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: (b)। समुद्री जल में लिथियम लगभग 0.17 mg/L की बहुत कम सांद्रता में है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
10 अंक · 150 शब्द: भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण रणनीति में समुद्री जल से लिथियम निष्कर्षण जैसी स्वदेशी तकनीकों की संभावनाओं और व्यावसायीकरण की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।