प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना: NSAP का नया रूप और दिव्यांगजन पेंशन विस्तार
NSAP के प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के रूप में पुनर्नामकरण, ₹53,428 करोड़ के पाँच-वर्षीय प्रावधान, दिव्यांगजन पात्रता और अनुच्छेद 41 का विस्तृत अध्ययन।
24 अक्टूबर 2026
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए जारी रखने और इसे प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना नाम देने को मंजूरी दी है। कुल स्वीकृत परिव्यय ₹53,428 करोड़ है। सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता और कवरेज में हुआ है।
योजना में क्या बदला?
- NSAP → प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना
- IGNOAPS → प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना
- IGNWPS → प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना
- IGNDPS → प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना
- NFBS → प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना
वृद्धावस्था, विधवा और परिवार लाभ घटकों को मूल रूप में जारी रखा गया है; दिव्यांगजन पेंशन में प्रमुख सुधार किए गए हैं।
दिव्यांगजन पेंशन: सबसे महत्वपूर्ण सुधार
- दिव्यांगता सीमा 80% से घटाकर Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के 40% benchmark disability के अनुरूप की गई।
- न्यूनतम पात्रता आयु 18 वर्ष हटाकर पात्रता जन्म से संभव की गई।
- केंद्रीय सहायता: 0–79 वर्ष के लिए ₹375 प्रति माह और 80 वर्ष या अधिक के लिए ₹625 प्रति माह।
- दिव्यांगजन पेंशन के अनुमानित लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से 27.48 लाख तक बढ़ती है।
संवैधानिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि
अनुच्छेद 41 राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमा के भीतर काम, शिक्षा तथा बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और दिव्यांगता जैसी स्थितियों में सार्वजनिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करने को कहता है।
NSAP 1995 से भारत की सामाजिक सहायता संरचना का प्रमुख आधार रहा है। यह contributory insurance नहीं, बल्कि vulnerable households को सार्वजनिक सहायता देने की व्यवस्था है। इसे ग्रामीण विकास विभाग संचालित करता है और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की अपनी pension top-ups भी हो सकती हैं।
Prelims के लिए मुख्य तथ्य
- नोडल विभाग: Department of Rural Development.
- नई अवधि: 2026-27 से 2030-31.
- कुल परिव्यय: ₹53,428 करोड़.
- Benchmark disability: RPwD Act, 2016 के तहत सामान्यतः 40% या अधिक।
- DPSP संबंध: अनुच्छेद 41.
- यह सामाजिक सहायता है; इसे EPFO जैसी contributory pension से न मिलाएँ।
मुख्य परीक्षा विश्लेषण
महत्त्व: वृद्ध, विधवा, दिव्यांगजन और परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु से प्रभावित गरीब परिवारों के लिए न्यूनतम आय-सुरक्षा; disability threshold घटने से exclusion error कम हो सकता है।
चुनौतियाँ: पेंशन राशि की पर्याप्तता, मुद्रास्फीति, beneficiary identification, disability certification, बैंकिंग/DBT पहुँच, राज्यों के top-up में असमानता और grievance redressal।
आगे की राह: inflation-indexed assistance पर विचार, social registry interoperability, सरल disability certification, doorstep banking और सामाजिक लेखा-परीक्षा/समयबद्ध grievance mechanism।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
प्रश्न 1. प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह पूर्व NSAP का नया नाम है। 2. इसकी 2026-31 अवधि का परिव्यय ₹53,428 करोड़ है। 3. दिव्यांगजन पेंशन की benchmark disability 80% कर दी गई है। सही विकल्प— (a) केवल 1 (b) 1 और 2 (c) 2 और 3 (d) सभी।
उत्तर
(b)। सीमा 80% से घटाकर 40% benchmark disability के अनुरूप की गई है।
प्रश्न 2. सामाजिक सहायता के संदर्भ में संविधान का कौन-सा DPSP सर्वाधिक प्रत्यक्ष है? (a) अनुच्छेद 39A (b) अनुच्छेद 41 (c) अनुच्छेद 44 (d) अनुच्छेद 48A
उत्तर
(b) अनुच्छेद 41.
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना में दिव्यांगजन पेंशन के विस्तार को भारतीय कल्याणकारी राज्य और अनुच्छेद 41 के संदर्भ में समझाइए। इसके क्रियान्वयन की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
10 अंक · 150 शब्द · GS-II