नागरिकता अधिनियम की धारा 6A: असम समझौता और सर्वोच्च न्यायालय का संविधान पीठ निर्णय
धारा 6A की संवैधानिक वैधता, असम की 25 मार्च 1971 कट-ऑफ, अनुच्छेद 11, 29(1) और 355 तथा निर्णय के संघीय और सुरक्षा आयामों का UPSC विश्लेषण।
पाठ्यक्रम से संबंध
- प्रारंभिक: संविधान के अनुच्छेद 5–11, 14, 21, 29; नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6A; असम समझौता 1985।
- मुख्य GS-II: संविधान, संघवाद, संसद की विधायी शक्तियाँ, ऐतिहासिक समझौते और सीमावर्ती राज्यों की जनसांख्यिकीय चुनौतियाँ।
चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय की पाँच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6A की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। यह धारा 15 अगस्त 1985 के असम समझौते को विधायी प्रभाव देने के लिए जोड़ी गई थी। न्यायालय ने माना कि संसद को अनुच्छेद 11 के तहत नागरिकता के विनियमन की व्यापक विधायी शक्ति प्राप्त है और असम की विशिष्ट ऐतिहासिक व भू-राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर तय कट-ऑफ अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करती।
प्रारंभिक परीक्षा के मुख्य तथ्य
धारा 6A का तीन-स्तरीय ढाँचा
- 1 जनवरी 1966 से पहले: तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से असम आए लोगों को स्वतः नागरिक माना गया।
- 1 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1971: विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी के रूप में पहचान के बाद पंजीकरण; 10 वर्षों तक मताधिकार से वंचित; अवधि समाप्त होने पर पूर्ण नागरिक अधिकार।
- 25 मार्च 1971 या उसके बाद: ऐसे अवैध प्रवेशकर्ताओं को विदेशी माना जाएगा और Foreigners Act, 1946 के तहत पहचान व निर्वासन की प्रक्रिया लागू होगी।
स्थैतिक एवं संवैधानिक पृष्ठभूमि
- अनुच्छेद 11: संसद को नागरिकता के अर्जन, समाप्ति और अन्य संबंधित मामलों के विनियमन की शक्ति देता है।
- अनुच्छेद 29(1): संस्कृति और भाषा की विशिष्टता के संरक्षण का अधिकार; न्यायालय के अनुसार इसका अर्थ अन्य समुदायों को नागरिकता से बाहर रखना नहीं है।
- अनुच्छेद 355: संघ का कर्तव्य है कि वह राज्यों को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से संरक्षित करे।
मुख्य परीक्षा हेतु विश्लेषण
निर्णय का महत्व
- शांति और राजनीतिक स्थिरता: असम समझौते की मूल संरचना 25 मार्च 1971 की कट-ऑफ पर टिकी है; धारा 6A हटने से बड़े पैमाने पर नागरिकता विवाद और सामाजिक-राजनीतिक अस्थिरता की आशंका हो सकती थी।
- समझौतों को विधायी संरक्षण: निर्णय यह रेखांकित करता है कि राष्ट्रीय एकता व शांति के लिए किए गए राजनीतिक समझौतों को संसद विधायी रूप दे सकती है।
अल्पमत मत
न्यायमूर्ति पारदीवाला के असहमति मत में कहा गया कि 1966–71 के प्रवासियों की पहचान की कोई निश्चित समय-सीमा न होने से व्यवस्था मनमानी हो सकती है और अवैध प्रवासन को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल सकता है।
आगे की राह
स्मार्ट फेंसिंग पूर्ण करना, 1971 के बाद आए अवैध प्रवासियों के मामलों का विदेशी न्यायाधिकरणों में त्वरित निस्तारण और असम समझौते के खंड 6 के तहत असमिया लोगों के लिए संवैधानिक सुरक्षा तंत्र मजबूत करना।
विगत वर्षों के सटीक प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा 2021
भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- केवल एक ही नागरिकता और एक ही अधिवास है।
- केवल जन्म से नागरिक ही राष्ट्राध्यक्ष बन सकता है।
- किसी विदेशी को एक बार नागरिकता प्रदान कर देने के बाद किसी भी परिस्थिति में उससे नागरिकता नहीं छीनी जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) केवल 1 और 3 (घ) केवल 2 और 3
भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था है। राष्ट्रपति बनने के लिए जन्मजात नागरिक होना आवश्यक नहीं है, और नागरिकता अधिनियम, 1955 में निर्धारित परिस्थितियों में नागरिकता से वंचित किया जा सकता है।
मुख्य परीक्षा 2026 — सामान्य अध्ययन-II, प्रश्न 4
10 अंक · 150 शब्द
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अभ्यास प्रश्न
प्रारंभिक प्रश्न
धारा 6A के संदर्भ में कथनों पर विचार कीजिए: (1) इसे 1985 के असम समझौते को कानूनी प्रभाव देने के लिए शामिल किया गया था। (2) 1 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1971 के बीच आए लोगों को तत्काल पूर्ण मताधिकार मिला। (3) 25 मार्च 1971 के बाद आए व्यक्ति को धारा 6A के तहत नागरिकता का अधिकार नहीं मिलता।
सही उत्तर: केवल 1 और 3। कथन 2 गलत है क्योंकि संबंधित समूह को 10 वर्ष तक मताधिकार से वंचित रखा जाता है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास
15 अंक · 250 शब्द
आधार सामग्री
यह लेख 16 अक्टूबर 2026 की उपयोगकर्ता-प्रदत्त दैनिक समसामयिकी अध्ययन सामग्री के आधार पर व्यवस्थित किया गया है। मूल तथ्य, प्रश्न और विश्लेषण उसी सामग्री के अनुरूप रखे गए हैं।