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69वाँ राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन, भारतीय संसद सुधार, भारत–पोलैंड संवाद, लाल सागर और बद्र समझौता ज्ञापन

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केपटाउन के 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन, भारतीय संसद की बैठकों और समिति-जाँच, डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा, लाल सागर–बाब अल-मंदेब संकट तथा तुर्किये–कतर–पाकिस्तान–इंडोनेशिया बद्र रक्षा-उद्योग समझौता ज्ञापन का अध्ययन।

22 अक्टूबर 2026

चर्चा में क्यों?

सितंबर 2026 में Cape Town में 69वाँ राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (Commonwealth Parliamentary Conference) (CPC) हुआ, जिसमें भारत का संसदीय प्रतिनिधिमंडल Rajya Sabha के उपसभापति Harivansh के नेतृत्व में शामिल हुआ। सम्मेलन की बहसें संसदीय लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून और legislative accountability पर केंद्रित थीं। भारत में इसी संदर्भ से संसद की घटती बैठकें और कम committee scrutiny का प्रश्न जुड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 21–22 अक्टूबर को तीन समानांतर घटनाएँ महत्वपूर्ण हैं—Poland के प्रधानमंत्री Donald Tusk की भारत यात्रा, Türkiye–Qatar–Pakistan–Indonesia का बद्र रक्षा-उद्योग समझौता ज्ञापन, और लाल सागर–बाब अल-मंदेब के आसपास बढ़ा सुरक्षा तनाव।

69वाँ राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (Commonwealth Parliamentary Conference)

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (Commonwealth Parliamentary Association) (CPA) के अनुसार 69वाँ CPC 13–19 सितंबर 2026 को केपटाउन, दक्षिण अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका की संसद और सीपीए दक्षिण अफ्रीका शाखा ने host किया। इसकी theme थी: ““बदलती विश्व व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना: राष्ट्रमंडल नेतृत्व””

भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्यसभा के उपसभापति Harivansh ने किया। सम्मेलन में सीपीए महासभा, संसदीय कार्यशालाएँ, राष्ट्रमंडल महिला सांसद मंच, लघु शाखाएँ और दिव्यांग सांसद मंच से संबंधित बैठकें हुईं।

2026 वर्ष का राष्ट्रमंडल सांसद Tasmania, Australia की रूथ फॉरेस्ट एमएलसी को मिला। अगला, 70वाँ CPC, कनाडा की संसद द्वारा Ottawa में 5–12 सितंबर 2027 आयोजित किया जाएगा।

भारतीय संसद: बैठकों और समिति-जाँच का गिरता रुझान

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के comparative data के अनुसार पहली Lok Sabha ने औसतन लगभग 135 बैठक दिवस प्रति वर्ष काम किया, जबकि 17वीं Lok Sabha का औसत केवल 55 days प्रति वर्ष था। 17वीं Lok Sabha ने कुल 274 sittings कीं—पूर्ण कार्यकाल वाली लोकसभाओं में सबसे कम।

विधेयक-जाँच का trend भी कमजोर हुआ। विभाग-संबंधित और अन्य संसदीय समितियों को भेजे गए Bills का अनुपात 15वीं Lok Sabha में 71% था, जो 17वीं Lok Sabha में 16% रह गया। 17वीं Lok Sabha में 58% विधेयकों की प्रस्तुति के दो सप्ताह के भीतर pass हुए और 35% विधेयक लोकसभा में एक घंटे से कम चर्चा के साथ pass हुए।

क्यों महत्त्वपूर्ण? संसदीय समिति सदन की बहस का विकल्प नहीं, लेकिन तकनीकी जाँच, हितधारक साक्ष्य, मंत्रालयी जवाबदेही और बहुदलीय विचार-विमर्श के लिए “लघु संसद” की तरह काम करती है।

संसद सुधार: तथ्य और प्रस्ताव अलग रखें

भारत के संविधान में Parliament के लिए कोई fixed annual minimum बैठक दिवस नहीं हैं। Article 85 President द्वारा सत्र आहूत करने और दो sessions के बीच छह महीने से अधिक अंतर न होने की व्यवस्था देता है।

वर्षों से अलग-अलग सुधार प्रस्ताव सामने आए हैं। संविधान के कार्यकरण की समीक्षा हेतु राष्ट्रीय आयोग ने Lok Sabha के लिए कम-से-कम 120 और Rajya Sabha के लिए 100 कार्य दिवस की recommendation की थी। अन्य निजी सदस्यों के प्रस्ताव में 100 या 120 days जैसे अलग thresholds भी सुझाए गए हैं। इसलिए PDF का “100 LS/90 RS” कोई वर्तमान संवैधानिक नियम नहीं है।

सुधार के उपयोगी विकल्पों में पूर्वानुमेय वार्षिक कैलेंडर, महत्वपूर्ण विधेयक की पूर्व-विधायी परामर्श, समिति को संदर्भित करना को सामान्य नियम बनाना, विपक्षी कार्य दिवस, प्रश्नकाल की सुरक्षा, शोध सहायता और समिति प्रतिवेदन पर समयबद्ध सरकारी उत्तर शामिल हो सकते हैं। ब्रिटेन-शैली प्रधानमंत्री प्रश्नकाल (PMQs) तुलनात्मक प्रेरणा हो सकता है, भारतीय संवैधानिक requirement नहीं।

भारत–पोलैंड रणनीतिक साझेदारी

Poland के प्रधानमंत्री Donald Tusk 21–23 अक्टूबर 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह संबंध अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Poland यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत हुआ था।

22 अक्टूबर के लिए दोनों प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित हैं। Official agenda में व्यापार और निवेश, defence, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, नवीकरणीय ऊर्जा, education, culture, जन-से-जन संबंध और India–EU engagement शामिल हैं। Tusk Bengaluru में IT और अंतरिक्ष क्षेत्र के हितधारक से भी मिलेंगे; Delhi और Bengaluru में व्यावसायिक मंच निर्धारित हैं।

तारीख-सावधानी: 22 अक्टूबर की सुबह तक visit जारी है। इसलिए final संयुक्त परिणाम/समझौते को official वार्ता-पश्चात आधिकारिक विज्ञप्ति से पहले निश्चित उपलब्धि की तरह नहीं लिखा गया है।

बद्र समझौता ज्ञापन: रक्षा-उद्योग सहयोग, सामूहिक रक्षा संधि नहीं

21 अक्टूबर 2026 को Doha में Türkiye, Qatar, Pakistan और Indonesia ने बहुपक्षीय “बद्र” समझौता ज्ञापन (Badr MoU) sign किया। Official descriptions के अनुसार इसका उद्देश्य रक्षा विनिर्माण, सैन्य क्षमताएँ, तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाना है।

यह distinction परीक्षा के लिए जरूरी है: Badr कोई NATO Article-5 जैसा परस्पर रक्षा/सामूहिक सुरक्षा संधि नहीं है। सार्वजनिक रूप से घोषित पाठ इसे रक्षा-उद्योग सहयोग ढाँचा के रूप में वर्णित करता है। चारों देशों के रक्षा मंत्रालय के साथ Pakistan की रक्षा उत्पादन प्राधिकरण और Türkiye की रक्षा उद्योग प्रेसीडेंसी भी संस्थागत भागीदार हैं।

Türkiye की परिपक्व रक्षा उद्योग, Pakistan और Indonesia की manufacturing/workforce क्षमता तथा Qatar की capital/investment क्षमता इसे रक्षा आपूर्ति-श्रृंखला सहयोग का महत्त्वपूर्ण उदाहरण बनाती है।

बाब अल-मंदेब और होर्मुज: दो सामरिक जलडमरूमध्य

जलडमरूमध्यक्या जोड़ता है?किनके बीच?रणनीतिक महत्त्व
Bab al-Mandebलाल सागर को अदन की खाड़ी/अरब सागर सेYemen और Horn of Africa—मुख्यतः जिबूती/इरिट्रियास्वेज नहर–हिंद महासागर समुद्री परिवहन की दक्षिणी प्रवेश-द्वार
होर्मुज जलडमरूमध्यफारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी/अरब सागर सेIran और Oman के Musandam क्षेत्रखाड़ी क्षेत्र के तेल/एलएनजी निर्यात का प्रमुख समुद्री सामरिक संधि-बिंदु

भारत के लिए दोनों chokepoints ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्ग, बीमा/मालभाड़ा लागत और Indian diaspora के कारण महत्वपूर्ण हैं। Bab al-Mandeb में स्वेज मार्ग में व्यवधान को प्रभावित कर केप ऑफ गुड होप की ओर मार्ग परिवर्तन बढ़ा सकता है।

मिस्र–सऊदी सुरक्षा और लाल सागर संकट

21 अक्टूबर को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने कहा कि यदि Saudi Arabia माँगे तो मिस्र का सैन्य समर्थन Kingdom के territory और borders की defence तक सीमित रहेगा; Yemen पर offensive attack इसका हिस्सा नहीं होगा। Egypt की parliament विदेशी सैन्य तैनाती की अनुमति पर deliberation कर रही है।

यह मुद्दा Bab al-Mandeb और लाल सागर समुद्री परिवहन से सीधे जुड़ा है। Egypt के लिए लाल सागर security स्वेज नहर राजस्व और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों से जुड़ी है; Saudi Arabia के लिए ड्रोन/मिसाइल खतरे और महत्वपूर्ण अवसंरचना और maritime routes महत्वपूर्ण हैं।

रूस–यूक्रेन–अमेरिका त्रिपक्षीय वार्ता

21 अक्टूबर को Kremlin ने कहा कि Russia नवंबर में Ukraine और United States के साथ US-mediated talks फिर शुरू करने को principle में तैयार है। Ukraine के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने भी वार्ताकार-स्तरीय त्रिपक्षीय वार्ता को support किया और इसे जल्द—संभवतः early November—कराने की इच्छा जताई।

इसे “peace agreement हो गया” या “leaders’ summit तय हो गया” न पढ़ें। वर्तमान स्थिति talks resume करने की willingness और negotiation format पर convergence की है; युद्धविराम, सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय विवाद अभी substantive negotiation के विषय हैं।

भारत के लिए रणनीतिक निहितार्थ

संसदीय कूटनीति: CPC जैसे platforms भारत को democratic institutions, वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधित्व और संसदीय श्रेष्ठ प्रथाएँ पर engagement देते हैं। Domestic credibility विचार-विमर्श की गुणवत्ता और accountability से जुड़ी रहती है।

मध्य यूरोप: Poland EU, NATO और Central-Eastern Europe में strategic position रखता है। रक्षा, उभरती प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा और India–EU cooperation भारत के विविधीकरण लक्ष्यों से मेल खाते हैं।

West Asia: Badr MoU को नए सैन्य गुट की तरह overstate करने के बजाय रक्षा-औद्योगिक नेटवर्किंग के रूप में देखना चाहिए। Türkiye–Pakistan defence cooperation भारत के लिए परिचित security variable है, जबकि Qatar और Indonesia के साथ भारत के अपने गहरे ties भी हैं; इसलिए issue शून्य-योग संरेखण से अधिक complex है।

Maritime security: Bab al-Mandeb/Hormuz instability भारत के import bill, समुद्री परिवहन time और energy flows पर असर डाल सकती है। नौसैनिक उपस्थिति, निकासी तत्परता, रणनीतिक भंडार और विविधीकृत आपूर्ति मार्ग महत्त्वपूर्ण हैं।

विगत वर्ष का वास्तविक प्रश्न

UPSC मुख्य परीक्षा 2023 • सामान्य अध्ययन-II • 15 अंक • 250 शब्द

Explain the structure of the Parliamentary Committee system. How far have the financial committees helped in the institutionalisation of Indian Parliament?

संसदीय समिति प्रणाली की संरचना को समझाइए। भारतीय संसद के संस्थानीकरण में वित्तीय समितियों ने कहाँ तक सहायता की है?

प्रश्न की मांग समझें

उत्तर में Standing और Ad Hoc Committees की मूल संरचना, विभाग-संबंधित Standing Committees और तीन financial committees—Public Accounts Committee, Estimates Committee और Committee on Public Undertakings—की भूमिका लिखें। फिर continuity, financial scrutiny, CAG-based accountability, executive oversight और bipartisan work के योगदान के साथ limits भी दें। PDF में दिया “संसदीय संप्रभुता और कार्यपालिका की जवाबदेही…” वाला वाक्य वास्तविक 2023 प्रश्न का हूबहू पाठ नहीं है।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 69वाँ CPC Cape Town में 2026 में आयोजित हुआ और 70वाँ CPC Ottawa में 2027 में होगा।
  2. Badr MoU चार देशों के बीच automatic collective-defence obligation स्थापित करता है।
  3. Bab al-Mandeb लाल सागर को Gulf of Aden से जोड़ता है।
  4. 17वीं Lok Sabha में Bills का committee referral 15वीं Lok Sabha की तुलना में बढ़ा।
  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 1, 2 और 3
  • (c) केवल 2 और 4
  • (d) 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या

सही उत्तर: (a) केवल 1 और 3

Badr public text defence-industry cooperation MoU है, automatic collective defence pact नहीं। Committee referral 15वीं Lok Sabha के 71% से घटकर 17वीं में 16% हुआ।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“संसद की संस्थागत शक्ति केवल कानून पारित करने की गति से नहीं, बल्कि deliberation, committee scrutiny और executive accountability की गुणवत्ता से मापी जाती है।” 69वें Commonwealth Parliamentary Conference और भारतीय संसदीय trends के आलोक में सुधार सुझाइए।

15 अंक • 250 शब्द

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स्रोत और संदर्भ