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RBI का परिचालन जोखिम पूँजी ढाँचा: Basel III मानकीकृत दृष्टिकोण 1 अप्रैल 2027 से

वाणिज्यिक बैंकों के परिचालन जोखिम के लिए RBI के नए Basel III मानकीकृत दृष्टिकोण, बिजनेस इंडिकेटर, आंतरिक हानि गुणक और बैंकिंग स्थिरता का अध्ययन।

25 अक्टूबर 2026

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 23 अक्टूबर 2026 को वाणिज्यिक बैंकों के परिचालन जोखिम के लिए न्यूनतम नियामकीय पूँजी की नई मानकीकृत पद्धति को लागू करने संबंधी द्वितीय संशोधन निर्देश जारी किए। यह ढाँचा 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा।

परिचालन जोखिम क्या है?

अपर्याप्त या विफल आंतरिक प्रक्रियाओं, कर्मचारियों, प्रणालियों अथवा बाहरी घटनाओं से होने वाली हानि को परिचालन जोखिम कहा जाता है। साइबर हमला, भुगतान प्रणाली का ठप होना, धोखाधड़ी, गलत प्रक्रिया या भौतिक परिसंपत्ति की क्षति इसके उदाहरण हैं। यह ऋण जोखिम और बाजार जोखिम से अलग है।

नए निर्देश के मुख्य बिंदु

  • Basel III का नया मानकीकृत दृष्टिकोण 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा।
  • बिजनेस इंडिकेटर (BI) के तीन घटकों—ब्याज/पट्टा/लाभांश, सेवा और वित्तीय घटक—को वित्तीय विवरणों की मदों से जोड़ने के लिए संकेतात्मक मैपिंग दी गई है।
  • हानि घटक (LC) पिछले परिचालन जोखिम नुकसानों से जुड़ता है; सामान्यतः 10 वर्ष के उच्च-गुणवत्ता वाले डेटा का उपयोग होगा। पहली बार लागू होने पर 10 वर्ष उपलब्ध न हों तो कम-से-कम 5 वर्ष का उपयुक्त डेटा प्रयोग किया जा सकेगा।
  • क्षतिग्रस्त या नष्ट बैंक परिसंपत्तियों से परिचालन हानि की गणना के लिए भी स्पष्ट नियम दिए गए हैं।

BI, BIC और ILM

बिजनेस इंडिकेटर (BI) बैंक के कारोबार के आकार और प्रकृति का मापक है। इससे बिजनेस इंडिकेटर कंपोनेंट (BIC) निकलता है। आंतरिक हानि गुणक (ILM) बैंक के ऐतिहासिक परिचालन नुकसान को पूँजी आवश्यकता से जोड़ता है। इससे केवल आय के आकार पर निर्भर पुराने दृष्टिकोण की तुलना में बैंक के वास्तविक हानि-अनुभव का महत्व बढ़ता है।

Basel III की पृष्ठभूमि

Basel III को बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति (BCBS) ने वैश्विक वित्तीय संकट के बाद बैंकिंग क्षेत्र की पूँजी, तरलता और जोखिम प्रबंधन क्षमता मजबूत करने के लिए विकसित किया। Basel मानक स्वयं भारतीय कानून नहीं हैं; RBI उन्हें भारतीय बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप नियामकीय निर्देशों के माध्यम से लागू करता है।

भारत में पूँजी पर्याप्तता

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए RBI के नियामकीय ढाँचे में न्यूनतम पूँजी-से-जोखिम भारित आस्ति अनुपात (CRAR) सामान्यतः 9% है। परीक्षा में यह याद रखें कि जोखिम-भारित आस्तियों में केवल ऋण जोखिम नहीं, बल्कि बाजार और परिचालन जोखिम भी शामिल होते हैं।

मुख्य परीक्षा विश्लेषण

नया ढाँचा बेहतर डेटा-शासन, साइबर नियंत्रण, धोखाधड़ी रोकथाम और व्यवसाय निरंतरता को सीधे पूँजी प्रबंधन से जोड़ता है। मजबूत आंतरिक नियंत्रण वाला बैंक परिचालन हानि को सीमित कर सकता है। चुनौती छोटे डेटा इतिहास, घटनाओं के समान वर्गीकरण, आईटी प्रणालियों की गुणवत्ता और नए ढाँचे के अनुपालन लागत में है।

वास्तविक UPSC PYQ

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2015

‘Basel III Accord’ या केवल ‘Basel III’ का उद्देश्य क्या है?

सही उत्तर: वित्तीय और आर्थिक दबाव से निपटने के लिए बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता तथा जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाना।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

प्रश्न. परिचालन जोखिम के संदर्भ में निम्न में से कौन शामिल हो सकता है? 1. साइबर हमला 2. कर्मचारी धोखाधड़ी 3. आईटी प्रणाली विफलता 4. उधारकर्ता का ऋण न चुकाना। (a) 1, 2 और 3 (b) 1 और 4 (c) 2 और 4 (d) सभी

उत्तर

(a)। ऋण न चुकाना मुख्यतः ऋण जोखिम है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

RBI का नया परिचालन जोखिम पूँजी ढाँचा बैंकिंग प्रणाली में बेहतर आंतरिक नियंत्रण और डेटा-आधारित जोखिम प्रबंधन को किस प्रकार प्रोत्साहित कर सकता है? विवेचना कीजिए।

10 अंक · 150 शब्द · GS-III

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स्रोत और संदर्भ

  • भारतीय रिज़र्व बैंक — वाणिज्यिक बैंक (आगामी अनुदेश) द्वितीय संशोधन निर्देश, 2026; 23 अक्टूबर 2026।