भाग 2: दाब, उत्प्लावन, पृष्ठ तनाव, श्यानता, केशिकत्व एवं ऊष्मा
यह पृष्ठ आपकी दी हुई “भौतिक विज्ञान भाग 2” सामग्री को आधार बनाकर तैयार किया गया है। मूल परीक्षा-केंद्रित विषय-विन्यास रखा गया है और जहाँ पाठ्य कथन अत्यधिक सरल, पुराने या संदर्भ-निर्भर थे, वहाँ आधुनिक भौतिकी के अनुसार तथ्य-सुधार अलग से दिए गए हैं।
मूल नोट्स से किए गए प्रमुख तथ्य-सुधार
- 1 atm: मानक वायुमंडलीय दाब 101325 Pa = 1.01325 bar = 760 Torr के लगभग है।
- बैरोमीटर और मौसम: दाब का तेजी से घटना खराब मौसम से जुड़ सकता है, लेकिन “इतना गिरा = निश्चित तूफान” कठोर सार्वभौमिक नियम नहीं है; मौसम-पूर्वानुमान कई कारकों पर निर्भर करता है।
- ऊँचाई पर खाना देर से पकना: कारण केवल “भोजन को पर्याप्त ऊष्मा नहीं मिलती” नहीं है; कम वायुदाब से जल कम तापमान पर उबलता है, इसलिए उबलते जल का ताप कम रहता है।
- प्रेशर कुकर: जल का क्वथनांक लगभग 120°C तक पहुँच सकता है, पर वास्तविक ताप कुकर के परिचालन दाब पर निर्भर करता है।
- जहाज का समुद्र में ऊपर उठना: समुद्री जल अधिक घना होने के कारण जहाज को संतुलन के लिए कम आयतन विस्थापित करना पड़ता है। तैरते जहाज पर संतुलन में उत्प्लावन बल उसके भार के बराबर होता है, अधिक नहीं।
- लैक्टोमीटर: यह दूध की विशिष्ट गुरुत्व/घनत्व मापता है; केवल इससे दूध की “शुद्धता” निश्चित नहीं की जा सकती।
- पौधों में जल ऊपर जाना: केशिकत्व सहायक है, पर लंबे पौधों में प्रमुख तंत्र वाष्पोत्सर्जन खिंचाव और संसंजन-तनाव है; केवल केशिकत्व से पूरी व्याख्या नहीं होती।
- बर्नौली सिद्धांत: “वेग बढ़े तो दाब हमेशा घटे” केवल उपयुक्त स्थिर, लगभग असंपीड्य और कम-श्यानता प्रवाह की परिस्थितियों में लागू समझें। विमान की लिफ्ट को केवल बर्नौली से नहीं, बल्कि वायु-प्रवाह के मोड़, परिसंचरण और संवेग परिवर्तन के साथ समझना बेहतर है।
- परम शून्य: 0 K पर “सभी आणविक गति पूरी तरह रुक जाती है” आधुनिक क्वांटम भौतिकी में सही नहीं है; शून्य-बिंदु गति बनी रह सकती है।
- जल का अधिकतम घनत्व: शुद्ध जल का अधिकतम घनत्व लगभग 3.98°C पर होता है; परीक्षा में इसे 4°C लिखा जाता है।
- ऊष्मा चालन: चालन केवल ठोसों में नहीं होता; द्रव और गैसों में भी हो सकता है, यद्यपि वहाँ संवहन अक्सर अधिक प्रमुख होता है।
- किरचॉफ का नियम: “अच्छा अवशोषक अच्छा उत्सर्जक” समान ताप और तरंगदैर्ध्य के संदर्भ में ऊष्मीय संतुलन का नियम है; कपड़ों के रंग से गर्म/ठंडा रहना केवल रंग पर निर्भर नहीं, कपड़े की मोटाई, पदार्थ और वायु-संचार भी महत्वपूर्ण हैं।
इस भाग की अध्ययन-सूची
1. दाब एवं द्रव स्थैतिकी
दाब: P = F/A, जहाँ बल सतह पर लंबवत घटक के रूप में लगाया जाता है। SI इकाई पास्कल (Pa = N/m²) है और दाब अदिश राशि है।
वायुमंडलीय दाब
- 1 atm = 101325 Pa
- 1 atm ≈ 1.01325 bar
- 1 atm ≈ 760 mmHg ≈ 760 Torr
पास्कल का नियम
बंद द्रव में लगाया गया अतिरिक्त दाब आदर्श रूप से सभी दिशाओं में संचारित होता है। इसका उपयोग हाइड्रोलिक प्रेस, लिफ्ट और ब्रेक में होता है।
गहराई के साथ दाब
एकसमान घनत्व वाले स्थिर द्रव में ऊर्ध्व गहराई अंतर h के कारण दाब-अंतर:
ΔP = ρgh
इसी कारण बाँध की दीवारें नीचे की ओर अधिक मोटी बनाई जाती हैं।
ऊँचाई और क्वथनांक
ऊँचाई बढ़ने पर सामान्यतः वायुमंडलीय दाब घटता है। परिणामस्वरूप जल 100°C से कम तापमान पर उबल सकता है और भोजन पकने में अधिक समय लग सकता है। प्रेशर कुकर में इसके विपरीत दाब बढ़ाकर जल का क्वथनांक बढ़ाया जाता है।
2. उत्प्लावन एवं आर्किमिडीज का सिद्धांत
आर्किमिडीज सिद्धांत: किसी द्रव/गैस में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल उस वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है।
प्लवन की शर्त
- तैरती वस्तु के संतुलन में: उत्प्लावन बल = वस्तु का भार।
- औसत घनत्व द्रव से कम हो तो वस्तु आंशिक डूबी अवस्था में तैर सकती है।
- औसत घनत्व द्रव से अधिक हो तो सामान्यतः डूबती है।
परीक्षा-उपयोगी उदाहरण
- बर्फ: तैरती बर्फ का अधिकांश भाग जल में डूबा रहता है; लगभग 9/10 वाला पाठ्य मान एक अच्छा सन्निकटन है।
- तैरती बर्फ पिघले: शुद्ध जल में स्वतंत्र रूप से तैरती बर्फ के पिघलने पर आदर्श स्थिति में जल स्तर नहीं बदलता।
- नदी से समुद्र: समुद्री जल अधिक घना होने से जहाज कम आयतन विस्थापित कर संतुलन बनाता है, इसलिए थोड़ा ऊपर तैरता है।
- लोहे की कील बनाम जहाज: जहाज का खोखला आकार उसके औसत घनत्व को कम करता है और पर्याप्त जल विस्थापन संभव बनाता है।
- हाइड्रोमीटर: तरल के सापेक्ष घनत्व/विशिष्ट गुरुत्व का मापक।
3. पृष्ठ तनाव
पृष्ठ तनाव को द्रव सतह पर प्रति इकाई लंबाई स्पर्शरेखीय बल के रूप में परिभाषित किया जा सकता है:
γ = F/L, SI इकाई N/m। सतही ऊर्जा प्रति क्षेत्रफल की इकाई J/m² होती है और द्रवों के लिए दोनों राशियों के मानों में निकट संबंध है।
- छोटी जल-बूँदें पृष्ठ तनाव के कारण लगभग गोलाकार होती हैं, क्योंकि दिए आयतन के लिए गोले का क्षेत्रफल न्यूनतम होता है। बड़ी वर्षा-बूँदें वायु प्रतिरोध से चपटी/विकृत हो सकती हैं।
- साबुन और डिटर्जेंट जल का पृष्ठ तनाव घटाकर सतह को भिगोने और मैल तक पहुँचने में मदद करते हैं।
- ब्रश के गीले बाल बाहर निकालने पर आपस में चिपकना केशिकीय/पृष्ठ-तनाव बलों से जुड़ा है।
4. केशिकत्व
पतली नली या सूक्ष्म छिद्र में द्रव का ऊपर उठना या नीचे जाना पृष्ठ तनाव, संपर्क कोण तथा आसंजक-संसंजक बलों से संबंधित है। आदर्श पतली नली में ऊँचाई:
h = 2γ cosθ / (ρgr)
- दीपक/लालटेन की बत्ती में तेल का ऊपर आना।
- ब्लॉटिंग पेपर और तौलिये द्वारा द्रव सोखना।
- फाउंटेन पेन की सूक्ष्म नालियाँ।
- पौधों में सूक्ष्म वाहिकाएँ केशिकीय प्रभाव देती हैं, पर ऊँचे पौधों में मुख्य जल-उत्थान वाष्पोत्सर्जन खिंचाव और संसंजन-तनाव से होता है।
5. श्यानता
श्यानता तरल की परतों के बीच सापेक्ष गति के विरोध का माप है—इसे आंतरिक घर्षण के रूप में समझा जा सकता है।
- द्रवों में तापमान बढ़ने पर सामान्यतः श्यानता घटती है।
- गैसों में तापमान बढ़ने पर सामान्यतः श्यानता बढ़ती है।
- इसी कारण शहद या तेल गरम करने पर अपेक्षाकृत आसानी से बहते हैं।
6. बर्नौली सिद्धांत
स्थिर, असंपीड्य, कम-श्यानता प्रवाह में एक ही streamline के along:
P + ½ρv² + ρgh = नियत
यदि ऊँचाई समान हो और अन्य शर्तें लागू हों, तो अधिक वेग वाले क्षेत्र में स्थैतिक दाब कम हो सकता है।
सामान्य अनुप्रयोग
- वेंटुरीमीटर और एटोमाइज़र
- कार्बोरेटर जैसे प्रवाह-आधारित उपकरण
- तेज हवा में छत पर दाब-वितरण का बदलना
- विमान-पंख पर लिफ्ट: बर्नौली प्रभाव इसका एक भाग है, पर संपूर्ण व्याख्या में वायु के नीचे की ओर मोड़ और संवेग परिवर्तन भी महत्वपूर्ण हैं।
- घूमती गेंद पर मैग्नस प्रभाव दबाव-अंतर उत्पन्न कर वक्र पथ दे सकता है।
7. तापमान पैमाने एवं जल का असामान्य प्रसार
तापमान संबंध
C/5 = (F−32)/9 = (K−273.15)/5
यदि Réaumur पैमाना R लिया जाए, तो C/5 = R/4। इसे Rankine पैमाने से न भ्रमित करें।
- −40°C = −40°F
- 0 K = −273.15°C
- 37°C ≈ 98.6°F ≈ 310.15 K एक पारंपरिक “औसत सामान्य” शरीर ताप है; वास्तविक सामान्य ताप व्यक्ति, समय और मापन-स्थान के अनुसार बदलता है।
परम शून्य
0 K ऊष्मागतिक तापमान का निम्नतम सीमा-बिंदु है। आधुनिक क्वांटम भौतिकी में इसे “सभी कण बिल्कुल स्थिर” मानना सही नहीं, क्योंकि शून्य-बिंदु ऊर्जा/गति रह सकती है।
जल का असामान्य प्रसार
- शुद्ध जल का घनत्व लगभग 3.98°C पर अधिकतम होता है।
- 0°C से 4°C तक गरम करने पर जल का आयतन घटता है; 4°C से ऊपर सामान्यतः बढ़ता है।
- झील की सतह जमने पर बर्फ ऊपर रहती है; नीचे अपेक्षाकृत गर्म द्रव जल बना रह सकता है।
- जल के जमने पर आयतन बढ़ने से पाइप फट सकते हैं।
8. गुप्त ऊष्मा
अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान लगभग स्थिर रहते हुए अवशोषित या मुक्त ऊष्मा:
Q = mL
| प्रक्रिया | जल के लिए लगभग मान |
|---|---|
| बर्फ का गलन | 334 kJ/kg ≈ 80 cal/g |
| जल का वाष्पन 100°C के पास | 2256 kJ/kg ≈ 540 cal/g |
इसी कारण 100°C की भाप त्वचा पर संघनित होकर अतिरिक्त गुप्त ऊष्मा छोड़ सकती है और 100°C के जल की तुलना में अधिक गंभीर जलन पैदा कर सकती है।
9. ऊष्मा संचरण की विधियाँ
| विधि | मूल सिद्धांत | उदाहरण |
|---|---|---|
| चालन | कणों/इलेक्ट्रॉनों के सूक्ष्म स्तर पर ऊर्जा हस्तांतरण; पदार्थ का bulk flow आवश्यक नहीं | धातु चम्मच का गरम होना; चालन द्रव/गैस में भी हो सकता है |
| संवहन | द्रव/गैस के bulk motion द्वारा ऊष्मा परिवहन | उबलता जल, समुद्री/स्थलीय समीर, वायुमंडलीय संवहन |
| विकिरण | विद्युतचुंबकीय विकिरण द्वारा ऊर्जा संचरण; माध्यम आवश्यक नहीं | सूर्य से पृथ्वी तक ऊर्जा पहुँचना |
10. थर्मस फ्लास्क, किरचॉफ नियम एवं रेफ्रिजरेटर
थर्मस फ्लास्क
- दोहरी दीवारों के बीच निर्वात — चालन और संवहन को बहुत कम करता है।
- परावर्तक/चमकीली सतह — ऊष्मीय विकिरण घटाती है।
- अच्छा ढक्कन/संकीर्ण गर्दन — वायु-प्रवाह और चालन को सीमित करते हैं।
किरचॉफ का ऊष्मीय विकिरण नियम
ऊष्मीय संतुलन पर किसी दिए ताप और तरंगदैर्ध्य के लिए अच्छे अवशोषक अच्छे उत्सर्जक भी होते हैं। काली सतहें सामान्यतः दृश्य/अवरक्त ऊर्जा अधिक अवशोषित कर सकती हैं, पर कपड़ों की वास्तविक ऊष्मीय सुविधा केवल रंग से तय नहीं होती।
खुले दरवाजे वाला रेफ्रिजरेटर
यदि बंद कमरे में चल रहे रेफ्रिजरेटर का दरवाजा खुला छोड़ दिया जाए, तो वह कमरे को ठंडा नहीं करेगा। मोटर/कम्प्रेसर के कार्य सहित कुल ऊर्जा अंततः कमरे में अधिक ऊष्मा के रूप में पहुँचती है, इसलिए औसतन कमरा थोड़ा गर्म होगा।
11. अभ्यास प्रश्न — PYQ नहीं
उत्तर: समुद्री जल का घनत्व अधिक होता है; जहाज को अपने भार के बराबर उत्प्लावन बल पाने के लिए कम जल-आयतन विस्थापित करना पड़ता है।
उत्तर: 3.98°C, जिसे प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः 4°C लिखा जाता है।
1. चालन केवल ठोसों में होता है।
2. संवहन द्रव और गैस में होता है।
3. विकिरण निर्वात में भी संभव है।
उत्तर: कथन 1 गलत है।
12. सत्यापित BPSC PYQ स्थिति
मूल PDF में 2015–2023 के कई प्रश्न BPSC PYQ के रूप में दिए गए हैं। उन्हें अभी वास्तविक PYQ के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है। प्रत्येक प्रश्न को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका/उत्तर-कुंजी से सत्यापित करने के बाद ही “वास्तविक PYQ” खंड जोड़ा जाएगा।
मूल आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध “भौतिक विज्ञान भाग 2” नोट्स। तथ्य-सुधार: आधुनिक विद्यालय/स्नातक-स्तरीय द्रव यांत्रिकी और ऊष्मा-विज्ञान के मानक सिद्धांतों के आधार पर स्रोत के पुराने या अत्यधिक सरल कथनों को स्पष्ट किया गया है। अंतिम संपादकीय अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026।