भाग 3: तरंग गति, ध्वनि, प्रकाशिकी, विद्युत एवं आधुनिक भौतिकी
यह पृष्ठ आपकी दी हुई “भौतिक विज्ञान भाग 3” सामग्री के विषय-विन्यास पर आधारित है। स्रोत में दिए गए ध्वनि, प्रकाशिकी, विद्युत और आधुनिक भौतिकी के सभी मुख्य परीक्षा-बिंदु रखे गए हैं; जहाँ कथन अत्यधिक सरलीकृत या पुराने थे, वहाँ अलग से सुधार जोड़े गए हैं।
मूल नोट्स से किए गए प्रमुख तथ्य-सुधार
- अनुप्रस्थ तरंगें: “केवल ठोसों और द्रव की सतह पर” कथन यांत्रिक अनुप्रस्थ तरंगों के संदर्भ में उपयोगी सरलीकरण है। विद्युतचुंबकीय तरंगें भी अनुप्रस्थ होती हैं और निर्वात में चलती हैं।
- ध्वनि की चाल: “ठोस > द्रव > गैस” सामान्य परीक्षा-प्रवृत्ति है, पर यह हर पदार्थ-जोड़ी के लिए कठोर सार्वभौमिक नियम नहीं है; चाल प्रत्यास्थता और घनत्व दोनों पर निर्भर करती है।
- आर्द्रता: समान तापमान पर आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल सामान्यतः अधिक होती है, लेकिन “इसलिए आवाज हमेशा अधिक दूर तक जाती है” को सार्वभौमिक नियम की तरह नहीं रखा गया है।
- प्रतिध्वनि की 17.2 m दूरी: यह लगभग 20°C पर ध्वनि की चाल ~343 m/s और 0.1 s श्रवण-स्थायित्व मानकर निकला सन्निकटन है।
- ऑप्टिकल फाइबर: प्रकाश का मार्गदर्शन पूर्ण आंतरिक परावर्तन/समतुल्य wave-guiding सिद्धांत से होता है, लेकिन “बिना ऊर्जा ह्रास” गलत है; वास्तविक फाइबर में attenuation होता है।
- मरीचिका: इसे केवल एक ही सतह पर TIR से नहीं, बल्कि गर्म वायु की परतों में क्रमिक अपवर्तन और उपयुक्त स्थिति में पूर्ण आंतरिक परावर्तन से समझना बेहतर है।
- आकाश नीला क्यों: केवल “बैंगनी का अधिक प्रकीर्णन” पर्याप्त नहीं है; सूर्य के स्पेक्ट्रम, वायुमंडलीय अवशोषण और मानव आँख की संवेदनशीलता के कारण हमें आकाश मुख्यतः नीला दिखता है।
- घरेलू वोल्टेज: भारत में मानक एकल-फेज घरेलू आपूर्ति 230 V, 50 Hz है; पुराने 220 V वाले कथन को सुधारा गया है।
- फ्यूज तार: केवल “उच्च प्रतिरोध + निम्न गलनांक” कहना अधूरा है। फ्यूज-तत्व का चयन उचित resistivity, कम गलनांक और सुरक्षित I²t व्यवहार के आधार पर होता है; सामग्री विभिन्न अनुप्रयोगों में अलग हो सकती है।
- ट्रांसफॉर्मर: स्थिर DC पर काम नहीं करता; उसे बदलता चुंबकीय फ्लक्स चाहिए, इसलिए सामान्य शक्ति-ट्रांसफॉर्मर AC पर कार्य करते हैं।
- अतिचालकता: केवल शून्य प्रतिरोध ही नहीं, मीस्नर प्रभाव भी इसकी मूल विशेषता है। पारे में लगभग 4.2 K पर इसकी खोज हेइके कामरलिंग ओनेस ने की थी।
- आइंस्टीन का नोबेल: 1921 का भौतिकी नोबेल उन्हें विशेष रूप से “फोटोविद्युत प्रभाव के नियम की खोज” के लिए दिया गया; पुरस्कार 1922 में प्रदान किया गया।
इस भाग की अध्ययन-सूची
1. तरंग गति एवं तरंगों का वर्गीकरण
| प्रकार | कणों/क्षेत्र की प्रकृति | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग | माध्यम के कण तरंग-संचरण दिशा के समानांतर दोलन करते हैं | वायु में ध्वनि, स्प्रिंग में compression wave |
| अनुप्रस्थ यांत्रिक तरंग | कणों का दोलन संचरण दिशा के लंबवत | तनावयुक्त तार; द्रव सतह की तरंगें मिश्रित प्रकृति की हो सकती हैं |
| विद्युतचुंबकीय तरंग | विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर तथा संचरण दिशा के लंबवत | रेडियो, माइक्रोवेव, IR, दृश्य, UV, X-ray, gamma |
निर्वात में विद्युतचुंबकीय तरंगों की चाल c = 299,792,458 m/s है।
विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम
आवृत्ति का सामान्य बढ़ता क्रम: रेडियो → माइक्रोवेव → अवरक्त → दृश्य → पराबैंगनी → एक्स-किरण → गामा। तरंगदैर्ध्य का क्रम इसका उलटा होता है।
2. ध्वनि तरंगें, SONAR एवं प्रतिध्वनि
| श्रेणी | सामान्य आवृत्ति सीमा | टिप्पणी |
|---|---|---|
| अपश्रव्य | < 20 Hz | मनुष्य के सामान्य श्रवण से नीचे; हाथी/व्हेल जैसे जीव निम्न आवृत्तियाँ उत्पन्न/महसूस कर सकते हैं। |
| श्रव्य | लगभग 20 Hz–20 kHz | युवा स्वस्थ मानव के लिए पाठ्य सीमा; आयु और व्यक्ति के अनुसार ऊपरी सीमा घट सकती है। |
| पराश्रव्य | > 20 kHz | चमगादड़, डॉल्फिन आदि उच्च आवृत्तियों का उपयोग करते हैं। |
पराश्रव्य के उपयोग
- SONAR: जल में ध्वनि पल्स और प्रतिध्वनि से दूरी/गहराई या वस्तु-स्थिति का अनुमान।
- अल्ट्रासोनोग्राफी: चिकित्सा इमेजिंग में उच्च आवृत्ति ध्वनि का उपयोग।
- लिथोट्रिप्सी: गुर्दे की पथरी तोड़ने के लिए shock waves; इसे साधारण “ultrasound imaging” से अलग समझें।
ध्वनि की चाल
- निर्वात में ध्वनि नहीं चलती।
- वायु में 20°C पर लगभग 343 m/s।
- जल में लगभग 1480 m/s और इस्पात में कई हजार m/s; वास्तविक मान तापमान और पदार्थ पर निर्भर।
- आदर्श गैस में तापमान बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है।
प्रतिध्वनि
स्पष्ट अलग echo सुनने के लिए लगभग 0.1 s का अंतर चाहिए। 20°C पर इसका अर्थ स्रोत और परावर्तक के बीच लगभग 17 m न्यूनतम दूरी है, क्योंकि ध्वनि को आना-जाना दोनों पड़ता है।
तारत्व (Pitch) मुख्यतः आवृत्ति से जुड़ा है; तीव्रता/लाउडनेस केवल आवृत्ति नहीं, ध्वनि-दाब, कान की संवेदनशीलता और अन्य कारकों पर निर्भर करती है।
3. दर्पण एवं उनके अनुप्रयोग
| दर्पण | प्रतिबिंब | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| समतल | आभासी, सीधा, समान आकार, पार्श्व-विपर्यय | चेहरा देखने में; पूर्ण शरीर देखने के लिए न्यूनतम दर्पण ऊँचाई व्यक्ति की ऊँचाई की आधी। |
| अवतल | वस्तु-स्थिति पर निर्भर; वास्तविक/उल्टा या आभासी/सीधा/बड़ा | शेविंग दर्पण, दंत-दर्पण, reflector systems, सौर संकेन्द्रक |
| उत्तल | सदैव आभासी, सीधा, छोटा | विस्तृत दृश्य-क्षेत्र के लिए वाहन के बाहरी/साइड दर्पण |
ध्यान दें: “Rear-view mirror = convex” को हर दर्पण पर न लागू करें; वाहन का आंतरिक रियर-व्यू दर्पण प्रायः समतल होता है, जबकि बाहरी साइड दर्पण अक्सर उत्तल होते हैं।
4. अपवर्तन, वायुमंडलीय अपवर्तन एवं पूर्ण आंतरिक परावर्तन
प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में जाने पर उसकी चाल और तरंगदैर्ध्य बदल सकते हैं; सीमा पार करते समय आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है।
- विरल से अधिक अपवर्तनांक वाले माध्यम में जाने पर सामान्यतः किरण अभिलंब की ओर झुकती है।
- पानी में सिक्का ऊपर उठा हुआ तथा पेंसिल मुड़ी हुई दिखना अपवर्तन से।
- तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन और बदलती refractive index संरचना से।
- अग्रिम सूर्योदय और विलंबित सूर्यास्त वायुमंडलीय अपवर्तन से संबंधित हैं; “ठीक 2 मिनट” एक औसत पाठ्य मान है, स्थान/ऋतु से बदल सकता है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR)
- प्रकाश उच्च अपवर्तनांक वाले माध्यम से कम अपवर्तनांक वाले माध्यम की ओर जा रहा हो।
- आपतन कोण critical angle से बड़ा हो।
- हीरे की चमक में उच्च अपवर्तनांक और बहु-परावर्तन महत्वपूर्ण हैं।
- ऑप्टिकल फाइबर में core-cladding refractive index अंतर से प्रकाश मार्गदर्शित होता है; वास्तविक प्रणाली में attenuation मौजूद रहता है।
- मरीचिका में तापमान-निर्भर refractive index gradient और कुछ किरणों के लिए TIR/strong bending दोनों भूमिका निभाते हैं।
5. लेंस एवं दृष्टिदोष
लेंस क्षमता: P = 1/f, जहाँ f मीटर में; SI-स्वीकृत विशेष नाम डायोप्टर (D)। उत्तल लेंस की शक्ति सामान्यतः धनात्मक और अवतल की ऋणात्मक।
| दृष्टिदोष | समस्या | सामान्य सुधार |
|---|---|---|
| निकट दृष्टिदोष (Myopia) | दूर की वस्तु का फोकस रेटिना के आगे बनने की प्रवृत्ति | अवतल/अपसारी लेंस |
| दूर दृष्टिदोष (Hypermetropia) | निकट वस्तु का फोकस रेटिना के पीछे बनने की प्रवृत्ति | उत्तल/अभिसारी लेंस |
| जरादृष्टि (Presbyopia) | आयु के साथ accommodation क्षमता घटती है | रीडिंग लेंस; आवश्यकता अनुसार bifocal/progressive |
| अबिंदुकता (Astigmatism) | cornea/lens की असमान वक्रता से अलग meridians का अलग फोकस | cylindrical/toric correction |
25 cm को “स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी” एक पारंपरिक मानक near point के रूप में पढ़ें; व्यक्ति-विशेष में यह अलग हो सकता है।
6. प्रकाश का प्रकीर्णन एवं रंग
Rayleigh सीमा में बहुत छोटे कणों द्वारा प्रकीर्णन लगभग 1/λ⁴ के अनुपात में होता है। छोटी तरंगदैर्ध्य अधिक प्रकीर्णित होती हैं।
- आकाश नीला: नीली/बैंगनी तरंगदैर्ध्य अधिक प्रकीर्णित होती हैं, पर सूर्य के स्पेक्ट्रम, वायुमंडलीय अवशोषण और मानव दृष्टि-संवेदनशीलता के संयुक्त प्रभाव से आकाश हमें मुख्यतः नीला दिखता है।
- सूर्योदय/सूर्यास्त लाल: लंबा वायुमंडलीय मार्ग छोटी तरंगदैर्ध्यों को अधिक बिखेर देता है; लाल/नारंगी प्रकाश अधिक प्रत्यक्ष पहुँचता है।
- लाल संकेत: लंबी तरंगदैर्ध्य होने से Rayleigh scattering अपेक्षाकृत कम; मानकीकरण और दृश्यता भी कारण हैं।
- अंतरिक्ष में काला आकाश: पर्याप्त वायुमंडलीय scattering न होने के कारण।
प्रकाश के योगात्मक प्राथमिक रंग: लाल, हरा, नीला (RGB)। आदर्श योग में तीनों मिलकर श्वेत प्रकाश दे सकते हैं।
7. विद्युत धारा, ओम का नियम एवं प्रतिरोध
ओम का नियम
ओमिक चालक के लिए स्थिर भौतिक परिस्थितियों पर:
V = IR
तार का प्रतिरोध
R = ρl/A
- लंबाई बढ़े तो प्रतिरोध बढ़ता है।
- अनुप्रस्थ क्षेत्रफल बढ़े तो प्रतिरोध घटता है।
- यदि तार को खींचकर लंबाई 2 गुनी की जाए और आयतन तथा resistivity लगभग स्थिर रहें, तो क्षेत्रफल आधा और प्रतिरोध लगभग 4 गुना हो जाता है।
तापमान प्रभाव
- सामान्य धातुओं में ताप बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
- कई अर्धचालकों में ताप बढ़ने पर चालकता बढ़ती है और प्रतिरोध घटता है।
अतिचालकता
critical temperature से नीचे कुछ पदार्थों में DC विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और वे चुंबकीय फ्लक्स को निष्कासित करने का मीस्नर प्रभाव दिखाते हैं। पारे में लगभग 4.2 K पर यह प्रभाव 1911 में खोजा गया।
8. घरेलू विद्युत, फ्यूज एवं ट्रांसफॉर्मर
भारत की घरेलू आपूर्ति
मानक भारतीय घरेलू एकल-फेज आपूर्ति 230 V, 50 Hz है। घरेलू उपकरण समानांतर जुड़े रहते हैं ताकि प्रत्येक पर समान आपूर्ति-वोल्टेज मिले और वे स्वतंत्र रूप से चालू-बंद हो सकें।
फ्यूज
फ्यूज एक sacrificial सुरक्षा उपकरण है। अधिक धारा पर उसका तत्व गर्म होकर पिघलता है और परिपथ खोल देता है। उपयुक्त फ्यूज सामग्री में कम गलनांक, नियंत्रित resistivity, स्थिर ageing और वांछित current-time characteristic महत्वपूर्ण हैं; पुराने पाठों में दिए “केवल Pb-Sn alloy” को सार्वभौमिक न मानें।
ट्रांसफॉर्मर
बदलते चुंबकीय फ्लक्स और विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। सामान्य power transformer स्थिर DC से काम नहीं करता, क्योंकि steady DC से secondary में सतत प्रेरित emf नहीं बनती।
- Step-up: AC voltage बढ़ाना
- Step-down: AC voltage घटाना
9. आधुनिक भौतिकी
फोटोविद्युत प्रभाव
उपयुक्त आवृत्ति से अधिक प्रकाश पड़ने पर किसी पदार्थ की सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित हो सकते हैं। आइंस्टीन ने 1905 में प्रकाश-क्वांटम विचार से इसकी व्याख्या की। उन्हें 1921 का भौतिकी नोबेल विशेष रूप से फोटोविद्युत प्रभाव के नियम की खोज के लिए दिया गया; पुरस्कार 1922 में प्रदान किया गया।
नाभिकीय विखंडन
कुछ भारी नाभिक, जैसे U-235, न्यूट्रॉन अवशोषण के बाद दो मध्यम-भार नाभिकों में टूट सकते हैं और अतिरिक्त न्यूट्रॉन व ऊर्जा मुक्त कर सकते हैं। इससे chain reaction संभव है।
- रिएक्टर: नियंत्रित श्रृंखला-अभिक्रिया।
- मॉडरेटर: कुछ रिएक्टरों में भारी जल या ग्रेफाइट न्यूट्रॉन धीमे करने के लिए।
- नियंत्रक पदार्थ: बोरॉन, कैडमियम, हैफ्नियम आदि न्यूट्रॉन-अवशोषक सामग्री विभिन्न रिएक्टर डिजाइनों में उपयोग हो सकती हैं।
नाभिकीय संलयन
हल्के नाभिक मिलकर अधिक भारी नाभिक बनाते हैं और द्रव्यमान-अंतर ऊर्जा में बदलता है। सूर्य में मुख्यतः प्रोटॉन–प्रोटॉन श्रृंखला द्वारा हाइड्रोजन से हीलियम बनने की प्रक्रिया ऊर्जा देती है। अत्यधिक ताप पर प्लाज्मा में Coulomb barrier पार करने की संभावना बढ़ती है।
10. अभ्यास प्रश्न — PYQ नहीं
उत्तर: लगभग 230 V, 50 Hz।
1. उसमें प्रकाश बिल्कुल बिना किसी ऊर्जा हानि के चलता है।
2. core और cladding के अपवर्तनांक अंतर से प्रकाश मार्गदर्शित होता है।
3. वास्तविक फाइबर में attenuation हो सकता है।
उत्तर: केवल 2 और 3।
उत्तर: फोटोविद्युत प्रभाव के नियम की खोज के लिए।
11. सत्यापित BPSC PYQ स्थिति
मूल PDF में 2015–2023 के कई प्रश्न BPSC PYQ के रूप में दिए गए हैं। उन्हें अभी वास्तविक PYQ के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है। प्रत्येक प्रश्न को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका/उत्तर-कुंजी से सत्यापित करने के बाद ही अलग “वास्तविक PYQ” खंड में जोड़ा जाएगा।
मूल आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध “भौतिक विज्ञान भाग 3” नोट्स। बाहरी सत्यापन/अद्यतन: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के 230 V, 50 Hz घरेलू आपूर्ति संदर्भ, नोबेल पुरस्कार अभिलेख में आइंस्टीन के 1921 पुरस्कार-विवरण तथा मानक आधुनिक भौतिकी सिद्धांतों के आधार पर चयनित सुधार। अंतिम संपादकीय अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026।