भाग 1: पदार्थ की अवस्थाएँ, परमाणु संरचना, रासायनिक बंधन, रेडियोधर्मिता एवं रासायनिक अभिक्रियाएँ
यह पृष्ठ आपकी दी हुई “रसायन विज्ञान भाग 1” सामग्री के विषय-विन्यास पर आधारित है। मूल नोट्स की परीक्षा-केंद्रित संरचना सुरक्षित रखते हुए जहाँ कथन अत्यधिक सरलीकृत, पुराने या तथ्यात्मक रूप से भ्रामक थे, वहाँ आधुनिक मानक रसायन विज्ञान के अनुसार अलग तथ्य-सुधार जोड़े गए हैं।
मूल नोट्स से किए गए प्रमुख वैज्ञानिक सुधार
- “पदार्थ की 5 अवस्थाएँ”: ठोस, द्रव, गैस, प्लाज्मा और बोस–आइंस्टीन संघनित अवस्था को प्रतियोगी परीक्षा का सामान्य वर्गीकरण समझें; आधुनिक भौतिकी में पदार्थ की अन्य विशिष्ट अवस्थाएँ भी ज्ञात हैं।
- बोस–आइंस्टीन संघनित अवस्था: यह परम शून्य के ठीक बराबर नहीं, बल्कि उसके अत्यंत निकट ताप पर बनती है। 1995 में रुबिडियम परमाणुओं के विरल गैस-समूह में प्रयोगात्मक रूप से प्राप्त की गई।
- प्रोटॉन की खोज: यूजेन गोल्डस्टीन ने नहर/धन किरणों का अध्ययन किया, लेकिन प्रोटॉन को हाइड्रोजन नाभिक के रूप में पहचानने का श्रेय रदरफोर्ड के कार्य को दिया जाता है।
- इलेक्ट्रॉन “कक्षा में चक्कर”: आधुनिक क्वांटम मॉडल में इलेक्ट्रॉन निश्चित ग्रह-जैसी कक्षाओं में नहीं घूमते; उन्हें कक्षकों (Orbitals) और प्रायिकता-वितरण से वर्णित किया जाता है।
- रेडियोधर्मिता: केवल “भारी नाभिक” रेडियोधर्मी नहीं होते; ट्रिटियम और कार्बन-14 जैसे हल्के नाभिक भी रेडियोधर्मी हैं।
- सहसंयोजक बंध: इलेक्ट्रॉन-साझेदारी हमेशा समान नहीं होती; ध्रुवीय सहसंयोजक बंध में साझेदारी असमान होती है। सभी सहसंयोजक पदार्थों का गलनांक कम भी नहीं होता—हीरा और सिलिका जैसे नेटवर्क सहसंयोजक ठोस बड़े अपवाद हैं।
- आयनिक पदार्थ: “सभी जल में घुलते हैं” गलत है। कई आयनिक लवण जल में अल्प-विलेय या अविलेय होते हैं।
- भौतिक/रासायनिक परिवर्तन: भौतिक परिवर्तन हमेशा उत्क्रमणीय और रासायनिक परिवर्तन हमेशा अनुत्क्रमणीय नहीं होते। मूल अंतर यह है कि नए रासायनिक पदार्थ बनते हैं या नहीं।
इस भाग की अध्ययन-सूची
1. पदार्थ की अवस्थाएँ एवं अवस्था-परिवर्तन
| अवस्था | मुख्य गुण | परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|
| ठोस | आम तौर पर निश्चित आकार और आयतन; कण सघन | संपीड्यता बहुत कम। |
| द्रव | निश्चित आयतन, पात्र के अनुसार आकार | प्रवाहशील; सतही तनाव और श्यानता जैसे गुण। |
| गैस | न आकार निश्चित, न आयतन | अधिक संपीड्य; पात्र को भरती है। |
| प्लाज्मा | आयनों और मुक्त इलेक्ट्रॉनों वाली आयनीकृत गैस | तारों, कुछ गैस-डिस्चार्ज उपकरणों और उच्च-ऊर्जा परिस्थितियों में। |
| बोस–आइंस्टीन संघनित अवस्था | अत्यंत कम ताप पर बोसॉन का सामूहिक क्वांटम व्यवहार | सत्येंद्र नाथ बोस और आइंस्टीन की सैद्धांतिक नींव; 1995 में विरल परमाणु गैस में प्रयोगात्मक उपलब्धि। |
ऊर्ध्वपातन
ठोस का द्रव अवस्था में आए बिना सीधे गैस में बदलना ऊर्ध्वपातन (Sublimation) है। सामान्य परीक्षा उदाहरण: कपूर, नेफ्थलीन, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड और शुष्क बर्फ।
शुष्क बर्फ
ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को शुष्क बर्फ कहते हैं। 1 वायुमंडलीय दाब पर यह सामान्यतः पिघलने के बजाय सीधे गैस में बदलती है।
वाष्पीकरण और शीतलन
द्रव की सतह से क्वथनांक से कम ताप पर अणुओं का गैस अवस्था में जाना वाष्पीकरण है। उच्च-ऊर्जा अणु बाहर निकलते हैं, इसलिए शेष द्रव की औसत ऊर्जा घट सकती है और शीतलन महसूस होता है। मिट्टी के घड़े का पानी ठंडा होना और पसीना सूखने पर ठंडक इसी सिद्धांत से जुड़े हैं।
2. परमाणु संरचना एवं उपपरमाण्विक कण
| कण | मुख्य ऐतिहासिक तथ्य | आवेश | स्थान/आधुनिक समझ |
|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरण प्रयोगों से इलेक्ट्रॉन की पहचान की | −1.602 × 10⁻¹⁹ C | नाभिक के बाहर क्वांटम कक्षकों में वर्णित |
| प्रोटॉन | गोल्डस्टीन ने धन/कैनाल किरणों का अध्ययन किया; रदरफोर्ड ने हाइड्रोजन नाभिक को मूल धन कण के रूप में पहचाना | +1.602 × 10⁻¹⁹ C | नाभिक में |
| न्यूट्रॉन | जेम्स चैडविक, 1932 | 0 | अधिकांश नाभिकों में; प्रोटियम (¹H) में न्यूट्रॉन नहीं |
रदरफोर्ड का α-कण प्रकीर्णन प्रयोग
सोने की पतली पन्नी पर α-कणों के प्रकीर्णन से यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है और धन आवेश तथा अधिकांश द्रव्यमान अत्यंत छोटे नाभिक में केंद्रित है। आधुनिक नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से न्यूक्लियॉन कहा जाता है।
- परमाणु क्रमांक (Z): प्रोटॉनों की संख्या। उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी Z के बराबर।
- द्रव्यमान संख्या (A): प्रोटॉन + न्यूट्रॉन। अतः न्यूट्रॉन संख्या = A − Z।
3. समस्थानिक, समभारिक एवं समन्यूट्रॉनिक
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| समस्थानिक (Isotopes) | एक ही तत्व के परमाणु: Z समान, A भिन्न | ¹H, ²H, ³H |
| समभारिक (Isobars) | अलग तत्व: A समान, Z भिन्न | ⁴⁰Ar, ⁴⁰K, ⁴⁰Ca |
| समन्यूट्रॉनिक (Isotones) | न्यूट्रॉन संख्या समान | ¹⁴C और ¹⁶O — दोनों में 8 न्यूट्रॉन |
हाइड्रोजन के प्रमुख समस्थानिक
- प्रोटियम (¹H): 1 प्रोटॉन, 0 न्यूट्रॉन।
- ड्यूटीरियम (²H या D): 1 प्रोटॉन, 1 न्यूट्रॉन; भारी जल D₂O में।
- ट्रिटियम (³H या T): 1 प्रोटॉन, 2 न्यूट्रॉन; रेडियोधर्मी।
चयनित उपयोग
| समस्थानिक | उपयोग | टिप्पणी |
|---|---|---|
| कार्बन-14 | पुरातात्विक/जैविक नमूनों की रेडियोकार्बन डेटिंग | बहुत प्राचीन भूवैज्ञानिक चट्टानों के लिए उपयुक्त नहीं। |
| यूरेनियम समस्थानिक | यूरेनियम-सीसा जैसे रेडियोमेट्रिक डेटिंग तंत्र; U-235 परमाणु ईंधन | “केवल U-235 से पृथ्वी की आयु” कहना अत्यधिक सरलीकृत है। |
| आयोडीन-131 | थायरॉइड ऊतक में रेडियोआयोडीन उपचार/नैदानिक उपयोग | विशेषकर हाइपरथायरॉइडिज़्म और कुछ थायरॉइड कैंसर संदर्भों में। |
| कोबाल्ट-60 | गामा विकिरण स्रोत; ऐतिहासिक और कुछ वर्तमान रेडियोथेरेपी प्रणालियों में | आधुनिक केंद्रों में रैखिक त्वरक व्यापक हैं, फिर भी Co-60 का उपयोग समाप्त नहीं हुआ। |
| सोडियम-24 | ऐतिहासिक/अनुसंधानात्मक जैव-ट्रेसर के रूप में परिसंचरण अध्ययन | “रक्त का थक्का खोजने का मानक परीक्षण” के रूप में याद न करें। |
4. रेडियोधर्मिता
रेडियोधर्मिता अस्थिर नाभिकों का स्वतः क्षय है, जिसमें कण या विद्युतचुंबकीय विकिरण उत्सर्जित हो सकते हैं। हेनरी बेकेरल ने 1896 में प्राकृतिक रेडियोधर्मिता का अवलोकन किया; मैरी और पियरे क्यूरी ने इस क्षेत्र को आगे विकसित किया।
एस.आई. इकाई: बेकेरल (Bq) = 1 नाभिकीय क्षय प्रति सेकंड। क्यूरी (Ci) एक गैर-एस.आई. इकाई है। गीगर–मूलर काउंटर आयनकारी विकिरण के पता लगाने/गणना के लिए उपयोग किया जा सकता है।
| गुण | α किरण | β किरण | γ किरण |
|---|---|---|---|
| प्रकृति | हीलियम-4 नाभिक | β⁻ में इलेक्ट्रॉन; β⁺ में पॉज़िट्रॉन | उच्च-ऊर्जा फोटॉन |
| आवेश | +2 | −1 या +1 | 0 |
| आयनन क्षमता | बहुत अधिक | मध्यम | तुलनात्मक रूप से कम |
| भेदन क्षमता | सबसे कम; कागज/त्वचा की बाहरी परत से रुक सकती है | मध्यम; पतली धातु/प्लास्टिक से रोकी जा सकती है | सबसे अधिक; घने पदार्थ जैसे सीसा/कंक्रीट से धीरे-धीरे क्षीण होती है |
सॉडी–फैजन्स विस्थापन नियम
- α-क्षय: A में 4 और Z में 2 की कमी।
- β⁻-क्षय: A अपरिवर्तित, Z में 1 की वृद्धि।
- γ-उत्सर्जन: A और Z अपरिवर्तित; नाभिक की ऊर्जा अवस्था घटती है।
5. रासायनिक बंधन
| बंधन | निर्माण | मुख्य गुण | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| आयनिक बंध | इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण से बने विपरीत आवेशित आयनों के बीच विद्युतस्थैतिक आकर्षण | अक्सर उच्च गलनांक; ठोस अवस्था में सामान्यतः विद्युत-अचालक, पर गलित अवस्था/उपयुक्त विलयन में चालक। जल-विलेयता यौगिक-विशिष्ट है। | NaCl, MgO, CaCl₂ |
| सहसंयोजक बंध | इलेक्ट्रॉन युग्मों की साझेदारी | साझेदारी समान या असमान हो सकती है। आणविक पदार्थ अक्सर निम्न गलनांक वाले, लेकिन नेटवर्क सहसंयोजक ठोस बहुत कठोर और उच्च गलनांक वाले हो सकते हैं। | H₂, Cl₂, H₂O, CH₄, हीरा, SiO₂ |
| हाइड्रोजन बंध | आमतौर पर F, O या N से जुड़े H और किसी विद्युतऋणात्मक परमाणु के अकेले इलेक्ट्रॉन युग्म के बीच आकर्षण | जल के अपेक्षाकृत उच्च क्वथनांक, प्रोटीन/DNA संरचना आदि में महत्वपूर्ण | H₂O, HF, NH₃, DNA |
6. भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन
भौतिक परिवर्तन
ऐसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ की रासायनिक पहचान मूलतः वही रहती है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है। अवस्था, आकार, द्रवण, वाष्पीकरण या घुलना इसके उदाहरण हो सकते हैं। यह आवश्यक नहीं कि हर भौतिक परिवर्तन सरलता से उत्क्रमणीय हो।
रासायनिक परिवर्तन
ऐसा परिवर्तन जिसमें नए रासायनिक पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। जंग लगना, दहन, भोजन का पाचन और दही बनना उदाहरण हैं। कुछ रासायनिक अभिक्रियाएँ उलटी दिशा में भी कराई जा सकती हैं, इसलिए “रासायनिक परिवर्तन = हमेशा अनुत्क्रमणीय” सही सार्वभौमिक नियम नहीं है।
मोमबत्ती का उदाहरण
मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन है, जबकि मोम-वाष्प का दहन रासायनिक परिवर्तन है। इसलिए जलती मोमबत्ती में दोनों प्रकार की प्रक्रियाएँ साथ हो सकती हैं।
7. ऑक्सीकरण, अपचयन एवं जंग
- ऑक्सीकरण: इलेक्ट्रॉन त्याग या ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि; पारंपरिक रूप में ऑक्सीजन का जुड़ना/हाइड्रोजन का हटना।
- अपचयन: इलेक्ट्रॉन ग्रहण या ऑक्सीकरण संख्या में कमी; पारंपरिक रूप में हाइड्रोजन का जुड़ना/ऑक्सीजन का हटना।
- ऑक्सीकरण और अपचयन एक ही रेडॉक्स अभिक्रिया में साथ होते हैं।
लोहे में जंग
जंग मुख्यतः जलयोजित लौह(III) ऑक्साइडों/ऑक्साइड-हाइड्रॉक्साइडों का मिश्रित उत्पाद है, जिसे सामान्य परीक्षा स्तर पर Fe₂O₃·xH₂O से दर्शाया जाता है। जंग बनने के लिए सामान्यतः जल/नमी और ऑक्सीजन दोनों आवश्यक होते हैं।
- प्रारंभिक जंग बनने पर ऑक्सीजन और जल जुड़ने से वस्तु का द्रव्यमान बढ़ सकता है।
- दीर्घकाल में जंग की परत झड़ने पर कुल वस्तु-द्रव्यमान घट भी सकता है; इसलिए प्रश्न के शब्दों पर ध्यान दें।
- यशदलेपन (Galvanization): लोहे/इस्पात पर जस्ता की सुरक्षात्मक परत चढ़ाना।
8. अभ्यास प्रश्न — PYQ नहीं
1. द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन।
2. γ-किरणों की आयनन क्षमता α-किरणों से अधिक होती है।
3. β⁻-क्षय में द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है और परमाणु क्रमांक 1 बढ़ता है।
उत्तर: केवल 1 और 3।
A. सभी आयनिक पदार्थ जल में घुलते हैं।
B. सभी सहसंयोजक पदार्थों का गलनांक कम होता है।
C. गलित आयनिक यौगिक विद्युत का संचालन कर सकते हैं।
D. हर भौतिक परिवर्तन पूर्णतः उत्क्रमणीय होता है।
उत्तर: C।
उत्तर: 242 − 94 = 148।
9. सत्यापित BPSC PYQ स्थिति
मूल PDF में 2015–2023 के अनेक प्रश्न BPSC PYQ के रूप में दिए गए हैं। इस पृष्ठ पर उन्हें अभी वास्तविक PYQ के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है। प्रत्येक प्रश्न को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक प्रश्न-पुस्तिका/उत्तर-कुंजी से सत्यापित करने के बाद ही “वास्तविक PYQ” खंड में जोड़ा जाएगा।
मूल आधार: उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध “रसायन विज्ञान भाग 1” नोट्स। बाहरी सत्यापन/अद्यतन: मानक रसायन विज्ञान पाठ्यस्रोत, नोबेल पुरस्कार के बोस–आइंस्टीन संघनन अभिलेख, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) तथा आधुनिक रसायन-विज्ञान संदर्भों से चयनित तथ्य-सुधार। अंतिम संपादकीय अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026।