बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission—BPSC) · बिहार विशेष · भूगोल

भाग 6: बिहार की मृदा — वर्गीकरण, विशेषताएँ एवं वितरण

उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार और दक्षिणी पठारी किनारे की प्रमुख मृदाओं, उनकी उर्वरता, भौतिक गुण और फसल संबंध का व्यवस्थित अध्ययन।

मुख्य आधारजलोढ़ मृदा का व्यापक प्रभुत्व
उत्तर बिहारतराई · बलसुंदरी · खादर
दक्षिण बिहारताल · करैल-कैवाल · बलथर

महत्वपूर्ण तथ्य

  • बिहार के अधिकांश मैदानी भूभाग पर गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित जलोढ़ मृदा का विस्तार है।
  • उत्तर-पश्चिमी पश्चिमी चंपारण में पर्वतपादीय/दलदली और तराई मृदा मिलती है।
  • उत्तर बिहार की बलसुंदरी मृदा प्रायः चूना-समृद्ध पुरानी जलोढ़ मृदा है, जबकि खादर नदियों द्वारा बार-बार नवीनीकृत नई जलोढ़ मृदा है।
  • दक्षिण बिहार का ताल क्षेत्र भारी चिकनी मिट्टी और जलभराव के लिए प्रसिद्ध है; जल उतरने के बाद दलहन की खेती महत्वपूर्ण होती है।
  • दक्षिणी पठारी किनारे पर लाल-पीली और लाल बलुई मृदाएँ मिलती हैं।

इस भाग में क्या पढ़ना है?

1. बिहार की मृदा का सामान्य परिचय

बिहार के विशाल मैदान पर जलोढ़ अवसादों की मोटी परत है। नदियाँ प्रतिवर्ष गाद, चिकनी मिट्टी और बालू लाकर अनेक क्षेत्रों की मिट्टी को नया करती हैं। राज्य की मृदाओं को अध्ययन की सुविधा के लिए तीन बड़े भौगोलिक समूहों में समझा जा सकता है:

  1. उत्तर बिहार के मैदान की मृदाएँ
  2. दक्षिण बिहार के मैदान की मृदाएँ
  3. दक्षिणी सीमांत पठारी क्षेत्र की मृदाएँ

2. उत्तर बिहार के मैदान की मृदाएँ

मृदामुख्य विस्तारविशेषताएँप्रमुख फसलें
पर्वतपादीय/दलदली मृदापश्चिमी चंपारण, सोमेश्वर श्रेणी का गिरिपादकंकड़, बालू और जैविक पदार्थ; अधिक नमी और दलदली दशाएँ; अम्लीय प्रवृत्तिधान, गन्ना, घास एवं वनस्पति
तराई मृदानेपाल सीमा के समानांतर उत्तरी पट्टीनमी-धारण क्षमता अधिक; हल्का पीला से भूरा रंग; कई क्षेत्रों में अम्लीय से उदासीनधान, जूट, गन्ना
बलसुंदरी मृदासारण, सीवान, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा तथा आसपासपुरानी जलोढ़; चूना-समृद्ध, प्रायः क्षारीय; बलुई-दोमट से दोमटमक्का, गेहूँ, गन्ना, तंबाकू, आम, लीची
खादरबाढ़-प्रवण निम्न मैदान—पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया, दरभंगा, समस्तीपुर आदिनई जलोढ़; वार्षिक/आवधिक गाद निक्षेप; सामान्यतः बहुत उपजाऊधान, जूट, गेहूँ, मक्का, सब्जियाँ

3. दक्षिण बिहार के मैदान की मृदाएँ

मृदामुख्य विस्तारविशेषताएँप्रमुख फसलें
कगारी/प्राकृतिक तटबंध मृदागंगा, सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल के तटवर्ती ऊँचे भागबालू और सिल्ट की प्रधानता; हल्की बनावट; जल-निकास तेजसब्जियाँ, मक्का, सरसों, मिर्च
ताल मृदाफतुहा–बख्तियारपुर–मोकामा–बड़हिया सहित गंगा के दक्षिण के निम्न भागभारी चिकनी मिट्टी; वर्षा में जलभराव; उच्च जल-धारण क्षमताचना, मसूर, मटर, खेसारी सहित रबी दलहन
करैल–कैवालरोहतास, कैमूर का मैदानी भाग, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल, पटना, नालंदा, नवादा, मुंगेर, भागलपुरपुरानी जलोढ़; भारी चिकनी/दोमट; नमी संजोने की क्षमता अधिक; सूखने पर दरारेंधान, गेहूँ, चना, सरसों, अलसी, अरहर
बलथरदक्षिणी मैदान और छोटानागपुर पठार की संक्रमण पट्टीपीली से लाल, बालू-कंकड़ और लौह अंश; अम्लीय और अपेक्षाकृत कम उपजाऊमक्का, अरहर, कुर्थी और मोटे अनाज

4. दक्षिणी सीमांत पठारी क्षेत्र की मृदाएँ

मृदाविस्तारनिर्माण/विशेषताउपयुक्त फसलें
लाल एवं पीली मृदाबांका, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद के पठारी/पहाड़ी ढालग्रेनाइट, नाइस और शिस्ट के अपक्षय से निर्मित; लौह ऑक्साइड से लाल रंग; नाइट्रोजन व ह्यूमस अपेक्षाकृत कममक्का, बाजरा, दलहन, तिलहन
लाल बलुई मृदाकैमूर और रोहतास के पठारी भागविंध्यन बलुआ पत्थर के विखंडन से; मोटे बालू/क्वार्ट्ज कण; जलधारण क्षमता कमज्वार, बाजरा और अन्य मोटे अनाज

5. मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व एवं जैविक खेती

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड: pH, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन, उपलब्ध नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, बोरॉन और सूक्ष्म पोषक तत्वों के परीक्षण के आधार पर उर्वरक सिफारिशें देने में उपयोगी।
  • पोषक असंतुलन: बिहार के कई क्षेत्रों में नाइट्रोजन, जैविक कार्बन तथा जिंक/बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी स्थानीय रूप से देखी जाती है; इसलिए मृदा परीक्षण आवश्यक है।
  • जैविक गलियारा: गंगा क्षेत्र में जैविक खेती के लिए 13 जिलों का कार्यक्रम विकसित किया गया है—बक्सर, भोजपुर, पटना, नालंदा, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार।
  • मृदा सुधार: अम्लीय मिट्टी में कृषि-चूना तथा क्षारीय/सोडिक स्थितियों में वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर जिप्सम जैसे सुधारकों का उपयोग किया जाता है।

6. अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. बलसुंदरी मृदा की प्रमुख विशेषता क्या है?
उत्तर: यह पुरानी जलोढ़, चूना-समृद्ध और प्रायः क्षारीय प्रकृति की मृदा है।
प्रश्न 2. मोकामा ताल क्षेत्र किस फसल समूह के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: रबी दलहन।
प्रश्न 3. लाल बलुई मृदा मुख्यतः कहाँ पाई जाती है?
उत्तर: कैमूर और रोहतास के पठारी भागों में।

7. BPSC के पिछले वर्षों के प्रश्न

  1. 69वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2023): बिहार में बलसुंदरी मृदा की प्रमुख विशेषता क्या है? उत्तर: चूना-समृद्ध एवं क्षारीय प्रकृति।
  2. 68वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2023): करैल–कैवाल मृदा बिहार के किस भाग में पाई जाती है? उत्तर: दक्षिण बिहार के मैदान में।
  3. 67वीं BPSC पुनर्परीक्षा (2022): बलथर मृदा का विस्तार कहाँ पाया जाता है? उत्तर: छोटानागपुर पठार और दक्षिणी मैदान के सीमांत भाग में।
  4. 66वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2020): पीडमोंट दलदली मृदा किस जिले में पाई जाती है? उत्तर: पश्चिमी चंपारण।
  5. 65वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2019): ताल क्षेत्र की मिट्टी में मुख्यतः कौन-सी फसल उगाई जाती है? उत्तर: दलहन।
  6. 64वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2018): बिहार में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर किस प्रकार की मृदा का विस्तार है? उत्तर: जलोढ़ मृदा।
  7. 63वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2017): नवीन जलोढ़ मृदा (खादर) किन दक्षिणी जिलों में प्रमुख नहीं है? उत्तर: गया/पटना जैसे पुराने जलोढ़ प्रधान क्षेत्र।
  8. 60वीं–62वीं BPSC (2016): मुजफ्फरपुर और दरभंगा क्षेत्र में मुख्यतः कौन-सी मृदाएँ मिलती हैं? उत्तर: बलसुंदरी और नवीन जलोढ़।
  9. 56वीं–59वीं BPSC (2015): कैमूर पठार पर किस प्रकार की मृदा पाई जाती है? उत्तर: लाल बलुई मृदा।

अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026