भाग 2: भूगर्भिक संरचना एवं भौतिक विभाजन
बिहार की भूगर्भिक संरचना, चट्टानी क्रम, तराई, जलोढ़ मैदान और दक्षिणी पठारी क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन।
महत्वपूर्ण तथ्य
- बिहार में प्राचीन क्रिस्टलीय/धारवाड़ संबंधी शैलों से लेकर नवीन चतुर्थक जलोढ़ निक्षेप तक शैल समूह पाए जाते हैं।
- जमुई के सोनो क्षेत्र में 222.885 मिलियन टन स्वर्ण-अयस्क संसाधन का आकलन है, जिसमें लगभग 37.6 टन स्वर्ण धातु निहित है।
- भारत के पाइराइट संसाधनों का लगभग 94% बिहार में स्थित है; रोहतास का अमझोर प्रमुख क्षेत्र है।
- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का अधिसूचित बाघ अभयारण्य है; कैमूर क्षेत्र को दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया चलती रही है।
- काबरताल आर्द्रभूमि बेगूसराय में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 2,620 हेक्टेयर है।
इस भाग में क्या पढ़ना है?
1. बिहार की भूगर्भिक संरचना
बिहार में अत्यंत प्राचीन क्रिस्टलीय शैलों से लेकर नवीन चतुर्थक जलोढ़ निक्षेप तक विविध शैल समूह मिलते हैं। परीक्षा की सुविधा के लिए इन्हें चार बड़े समूहों में समझा जा सकता है।
| परीक्षा-प्रचलित क्रम | मुख्य विस्तार | प्रमुख शैल/संसाधन | याद रखने योग्य |
|---|---|---|---|
| प्राचीन क्रिस्टलीय/धारवाड़ संबंधी शैल | मुंगेर, जमुई, नवादा, गया, बांका तथा दक्षिणी बिहार के अलग-अलग खंड | क्वार्ट्जाइट, शिस्ट, फिलाइट, नाइस, ग्रेनाइट; अभ्रक, क्वार्ट्ज, सोना आदि के संकेत | बिहार के सबसे पुराने शैल खंडों से संबद्ध |
| विंध्यन शैल | कैमूर–रोहतास क्षेत्र | बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, शेल; पाइराइट क्षेत्र | कैमूर पठार और रोहतास की भू-संरचना में महत्वपूर्ण |
| नवजीवी/शिवालिक-सम्बद्ध निक्षेप | पश्चिमी चंपारण का हिमालय-पाद क्षेत्र | कांग्लोमरेट, बलुआ पत्थर, मृत्तिका निक्षेप | सोमेश्वर-दून क्षेत्र के साथ पढ़ें |
| चतुर्थक जलोढ़ | गंगा और सहायक नदियों का विशाल मैदान | बालू, गाद, चिकनी मिट्टी, बजरी | राज्य के अधिकांश भूभाग का कृषि आधार |
क्रम: प्राचीन क्रिस्टलीय/धारवाड़ संबंधी शैल → विंध्यन → नवजीवी/शिवालिक निक्षेप → चतुर्थक जलोढ़।
2. बिहार का भौतिक विभाजन
- उत्तर-पश्चिम का पर्वतीय/तराई क्षेत्र — पश्चिमी चंपारण का सोमेश्वर–दून क्षेत्र।
- बिहार का विशाल जलोढ़ मैदान — गंगा के उत्तर और दक्षिण फैला मुख्य प्रदेश।
- दक्षिणी सीमांत पठारी क्षेत्र — प्रायद्वीपीय पठार का उत्तरी किनारा, विशेषकर कैमूर–रोहतास और दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी खंड।
3. उत्तर-पश्चिम का पर्वतीय/तराई क्षेत्र
यह क्षेत्र पश्चिमी चंपारण में नेपाल सीमा से लगा हिमालयी पादप्रदेश है। बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड भी पश्चिमी चंपारण में सोमेश्वर और दून पहाड़ी श्रेणियों को विशिष्ट वन-भौगोलिक इकाई मानता है।
- सोमेश्वर श्रेणी: नेपाल सीमा के समानांतर ऊँचा पहाड़ी भाग; वाल्मीकि क्षेत्र का महत्वपूर्ण प्राकृतिक भू-आकृतिक ढाँचा।
- दून क्षेत्र: सोमेश्वर श्रेणी के दक्षिण स्थित निम्नतर पहाड़ी/घाटी क्षेत्र।
- भिखना ठोरी: ऐतिहासिक मार्ग और सीमा-पाद क्षेत्र के रूप में महत्वपूर्ण।
सोमेश्वर श्रेणी पश्चिमी चंपारण के हिमालय-पाद क्षेत्र की प्रमुख पर्वतीय इकाई है और नेपाल सीमा के समानांतर फैली हुई है।
4. बिहार का विशाल मैदान
बिहार का मुख्य भूभाग गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा जमा जलोढ़ से निर्मित है। गंगा इसे दो भागों में बाँटती है।
उत्तर बिहार का मैदान
- मुख्य नदियाँ: घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा।
- सामान्य ढाल हिमालय-पाद से गंगा की ओर है।
- भांगर: पुराना, अपेक्षाकृत ऊँचा जलोढ़।
- खादर: नया, बाढ़ से बार-बार नवीनीकृत जलोढ़।
- चौर: उथले जलमग्न/आर्द्र निम्न भूभाग।
- मन/गोखुर झील: छोड़े हुए नदी-विसर्प से बनी झीलें।
- दियारा: नदी किनारे नई गाद/बालू से बने अस्थायी या अर्ध-स्थायी जमाव क्षेत्र।
दक्षिण बिहार का मैदान
- मुख्य नदियाँ: कर्मनाशा, सोन, पुनपुन, फल्गु, किऊल, चंदन आदि।
- ढाल सामान्यतः दक्षिणी पठारी किनारे से गंगा की ओर है।
- ताल क्षेत्र: गंगा के दक्षिण में प्राकृतिक तटबंधों के पीछे बने मौसमी जलमग्न निम्न क्षेत्र; मोकामा ताल इसका प्रमुख उदाहरण है।
5. दक्षिणी सीमांत पठारी क्षेत्र
| खंड | क्षेत्र | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| कैमूर–रोहतास पठार | कैमूर और रोहतास | विंध्यन बलुआ पत्थर व चूना पत्थर; झरने, कगार और वन क्षेत्र |
| खड़गपुर पहाड़ियाँ | मुंगेर क्षेत्र | प्राचीन कायांतरित/क्रिस्टलीय शैल खंड |
| राजगीर–गिरियक पहाड़ियाँ | नालंदा | वैभार, विपुलाचल, रत्नागिरि, उदयगिरि, सोनगिरि आदि पहाड़ियाँ |
| बराबर–नागार्जुनी पहाड़ियाँ | जहानाबाद–गया क्षेत्र | प्राचीन ग्रेनाइटिक शैल और मौर्यकालीन शैल-कट गुफाएँ |
| मंदार पहाड़ी | बांका | प्राचीन कठोर शैल खंड; सांस्कृतिक व भूगोल दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण |
6. समसामयिकी जोड़
जमुई स्वर्ण संसाधन
खान मंत्रालय/प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार बिहार के सोनो, जमुई क्षेत्र में 222.885 मिलियन टन प्राथमिक स्वर्ण-अयस्क संसाधन का आकलन है, जिसमें 37.6 टन स्वर्ण धातु निहित है। इसे “resource” के रूप में पढ़ें, न कि स्वतः सिद्ध वाणिज्यिक “reserve” के रूप में।
पाइराइट
भारतीय खान ब्यूरो के भारतीय खनिज वर्षपुस्तक 2024 के अनुसार भारत के लगभग 94% पाइराइट संसाधन बिहार में स्थित हैं; रोहतास का अमझोर क्षेत्र प्रमुख है।
काबरताल
बेगूसराय का काबरताल आर्द्रभूमि 21 जुलाई 2020 को रामसर स्थल नामित हुआ। आधिकारिक रामसर सूचना सेवा के अनुसार इसका क्षेत्रफल 2,620 हेक्टेयर है।
कैमूर टाइगर रिजर्व
कैमूर क्षेत्र को संभावित दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में लेकर प्रक्रिया/प्रस्ताव चर्चा में रहा है, लेकिन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की वर्तमान सूची में बिहार का अधिसूचित टाइगर रिजर्व अभी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ही है।
7. अभ्यास प्रश्न
उत्तर: कैमूर–रोहतास क्षेत्र।
उत्तर: भांगर पुराना व अपेक्षाकृत ऊँचा जलोढ़ है; खादर नया, बाढ़ से बार-बार नवीनीकृत जलोढ़ है।
उत्तर: स्वर्ण-अयस्क संसाधन की; इसमें लगभग 37.6 टन स्वर्ण धातु निहित है।
8. BPSC के पिछले वर्षों के प्रश्न
- 69वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2023): कैमूर पठार किसके लिए प्रसिद्ध है? उत्तर: चूना पत्थर।
- 68वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2023): बिहार में ‘चौर’ और ‘ताल’ भू-आकृतियाँ क्रमशः कहाँ पाई जाती हैं? उत्तर: उत्तरी बिहार के मैदान और दक्षिणी बिहार के मैदान में।
- 67वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2022): किस जिले में धारवाड़ चट्टानें नहीं पाई जाती हैं? उत्तर: रोहतास।
- 66वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2020): बिहार में भूगर्भीय दृष्टि से सबसे पुराना भू-आकृतिक खंड कौन-सा है? उत्तर: खड़गपुर पहाड़ियाँ।
- 65वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2019): सोमेश्वर श्रेणी किस जिले में स्थित है? उत्तर: पश्चिमी चंपारण।
- 64वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2018): बिहार में स्थित पर्वत चोटी कौन-सी है? उत्तर: सोमेश्वर किला।
- 63वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा (2017): गंगा के मैदान में जलोढ़ अवसादों की गहराई सामान्यतः कितनी पाई जाती है? उत्तर: लगभग 1,000–1,500 मीटर; कुछ स्थानों पर अधिक।
- 60वीं–62वीं BPSC (2016): राजगीर की पहाड़ियाँ किस प्रकार की भूगर्भिक चट्टानों से निर्मित हैं? उत्तर: प्राचीन क्वार्ट्जाइट/धारवाड़ संबंधी शैल।
- 56वीं–59वीं BPSC (2015): बिहार के किस जिले में चूना पत्थर एवं पाइराइट के प्रमुख निक्षेप पाए जाते हैं? उत्तर: रोहतास।
अद्यतन: 5 अक्टूबर 2026