वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 48
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941–960 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंडच ईस्ट इंडिया कंपनी (Vereenigde Oostindische Compagnie - VOC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डच संसद द्वारा 1602 में एक चार्ट…
डच ईस्ट इंडिया कंपनी (Vereenigde Oostindische Compagnie - VOC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डच संसद द्वारा 1602 में एक चार्टर पारित कर डच कंपनी को युद्ध करने, संधियां करने और किले बनाने का अधिकार दिया गया। 2. डचों ने भारत में अपनी पहली व्यापारिक कोठी 1605 में मसूलीपट्टनम (Musulipatnam) में स्थापित की। 3. डचों का मुख्य व्यावसायिक हित भारतीय मसालों के बजाय वस्त्रों (Cotton Textiles) के निर्यात में था, और उन्होंने वस्त्रों को भारतीय निर्यात की मुख्य वस्तु बनाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 1602 में स्थापित डच यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) विश्व की पहली संयुक्त पूंजी कंपनी थी जिसने शेयर जारी किए थे। 1605 में मसूलीपट्टनम में पहली फैक्ट्री खोली गई। डचों ने भारतीय सूती वस्त्रों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की प्रमुख वस्तु बनाया।
डलहौजी के पंजाब विलय के औचित्य पर इतिहासकार जॉन विलियम काये (John William Kaye) ने क्या आलोचनात्मक विचार व्यक्त किए?
डलहौजी के पंजाब विलय के औचित्य पर इतिहासकार जॉन विलियम काये (John William Kaye) ने क्या आलोचनात्मक विचार व्यक्त किए?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार जॉन विलियम काये ने पंजाब के विलय की निंदा करते हुए लिखा कि जिस नाबालिग बालक (दलीप सिंह) के संरक्षण का वचन अंग्रेजों ने भैरोवाल की संधि में दिया था, उसी का राज्य हड़प लेना ब्रिटिश न्यायप्रियता के मुंह पर तमाचा था।
डलहौजी द्वारा व्यपगत के सिद्धांत के तहत हड़पे गए निम्नलिखित में से किन राज्यों के विलय को कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने बाद में अमान्य कर दिया और उन्हे…
डलहौजी द्वारा व्यपगत के सिद्धांत के तहत हड़पे गए निम्नलिखित में से किन राज्यों के विलय को कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने बाद में अमान्य कर दिया और उन्हें उनके शासकों को वापस लौटा दिया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (b) सही है। कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने डलहौजी द्वारा बघाट (1850) और उदयपुर (1852) के विलय को अनुचित मानते हुए रद्द कर दिया और बाद में लॉर्ड कैनिंग ने इन्हें पुनः उनके मूल शासकों को लौटा दिया। करौली के विलय को भी डायरेक्टर्स ने नामंजूर कर दिया था।
डलहौजी ने व्यपगत के सिद्धांत को लागू करने के लिए भारतीय रियासतों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया था। इन श्रेणियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनो…
डलहौजी ने व्यपगत के सिद्धांत को लागू करने के लिए भारतीय रियासतों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया था। इन श्रेणियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रथम श्रेणी (स्वतंत्र रियासतें): वे राज्य जो कभी मुग़ल या पेशवा के अधीन नहीं रहे; इन्हें बिना किसी रोक-टोक के गोद लेने का पूर्ण अधिकार था। 2. द्वितीय श्रेणी (अधीनस्थ रियासतें): वे राज्य जो मुग़ल या पेशवा के करद थे और अब अंग्रेजों के अधीन थे; इन्हें कंपनी की पूर्व अनुमति से ही गोद लेने की छूट थी। 3. तृतीय श्रेणी (सृजित रियासतें): वे राज्य जिन्हें अंग्रेजों ने स्वयं संधियों या सनदों द्वारा बनाया या पुनर्जीवित किया था; इन्हें गोद लेने की बिल्कुल अनुमति नहीं थी और उत्तराधिकारी न होने पर इनका विलय अनिवार्य था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों श्रेणियां सही हैं। डलहौजी ने राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटा: स्वतंत्र राज्य (गोद लेने की पूर्ण छूट), अधीनस्थ राज्य (कंपनी की अनुमति से गोद लेने की छूट), और अंग्रेजों द्वारा सृजित राज्य (गोद लेने पर पूर्ण प्रतिबंध और अनिवार्य विलय)।
डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी (Danish East India Company) के भारत में आगमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डेनिश कंपनी की स्थापना 161…
डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी (Danish East India Company) के भारत में आगमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डेनिश कंपनी की स्थापना 1616 में हुई थी। 2. इन्होंने 1620 में तमिलनाडु के त्रावणकोर/ट्रैंकोबार (Tranquebar) में अपनी पहली व्यापारिक कोठी स्थापित की। 3. बंगाल में सेरामपुर (Serampore) डेनमार्क का प्रमुख मुख्यालय था, जो बाद में ईसाई मिशनरी गतिविधियों का केंद्र बना। 4. 1845 में डेनमार्क ने अपनी सभी भारतीय बस्तियां ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बेच दीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों कथन सही हैं। डेनमार्क की कंपनी 1616 में बनी। 1620 में ट्रैंकोबार (तमिलनाडु) और 1676 में सेरामपुर (बंगाल) में केंद्र बने। सेरामपुर बाद में विलियम कैरी के नेतृत्व में प्रसिद्ध मिशनरी प्रेस और कॉलेज का केंद्र बना। 1845 में डेनमार्क ने अपनी सभी फैक्ट्रियां अंग्रेजों को बेच दीं।
डॉ. एस.एन. सेन ने 1857 के विद्रोह के स्वरूप का सार किस प्रकार प्रस्तुत किया?
डॉ. एस.एन. सेन ने 1857 के विद्रोह के स्वरूप का सार किस प्रकार प्रस्तुत किया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। डॉ. एस.एन. सेन ने लिखा कि "जो आंदोलन धर्म की रक्षा के लिए आरंभ हुआ था, वह स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ।"
डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा निकाले गए समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. मूकनायक (1920) : मराठी पाक्षिक 2. बहिष्कृ…
डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा निकाले गए समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. मूकनायक (1920) : मराठी पाक्षिक 2. बहिष्कृत भारत (1927) : मराठी पाक्षिक 3. जनता (1930) : साप्ताहिक पत्रिका 4. प्रबुद्ध भारत (1956) : अंतिम समाचार पत्र उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सभी चार युग्म सही सुमेलित हैं। अंबेडकर ने मूकनायक (1920), बहिष्कृत भारत (1927), जनता (1930) और प्रबुद्ध भारत (1956) का संपादन किया।
तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड डफरिन (Lord Dufferin) ने 1887 में कांग्रेस के प्रति अपना रुख बदलते हुए कांग्रेस को क्या कहकर उपहास उड़ाया था?
तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड डफरिन (Lord Dufferin) ने 1887 में कांग्रेस के प्रति अपना रुख बदलते हुए कांग्रेस को क्या कहकर उपहास उड़ाया था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। 1887 में लॉर्ड डफरिन ने कांग्रेस का उपहास करते हुए इसे "अत्यंत सूक्ष्म अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व" (Microscopic Minority) करने वाली संस्था कहा था।
तमिलनाडु में 19वीं सदी के महान संत रामलिंग अडिगल (वल्ललार / Vallalar - 1823–1874) द्वारा स्थापित 'समरस शुद्ध सन्वर्ग संगम' के संदर्भ में निम्नलिख…
तमिलनाडु में 19वीं सदी के महान संत रामलिंग अडिगल (वल्ललार / Vallalar - 1823–1874) द्वारा स्थापित 'समरस शुद्ध सन्वर्ग संगम' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उन्होंने जाति प्रथा और धार्मिक रूढ़िवादिता का कड़ा विरोध किया और सभी प्राणियों के प्रति दया (जीव कारुण्यम) का उपदेश दिया। 2. उन्होंने वडलूर में 'सत्य ज्ञान सभा' की स्थापना की जहां किसी मूर्ति के बजाय एक अखंड ज्योति (Eternal Light) की पूजा की जाती है। 3. उन्होंने भूखों को भोजन कराने के लिए एक सदावर्त (निःशुल्क भोजनालय) शुरू किया जो आज तक अनवरत चल रहा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। रामलिंग अडिगल (वल्ललार) ने वडलूर में सत्य ज्ञान सभा बनाई। अखंड ज्योति की पूजा का संदेश दिया और भूखों के लिए निःशुल्क लंगर (सदावर्त) शुरू किया जो आज भी जारी है।
ताई-अहोम राज्य द्वारा निर्मित और यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में सम्मिलित, मोइदामों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा/क…
- वे सैन्य दुर्ग के रूप में कार्य करते थे।
- वे राजवंशियों (रॉयल) और अभिजातों (नोबल) के मनोरंजन केंद्र (recreation centre) थे।
- वे राजवंशियों (रॉयल) और अभिजातों (नोबल) के समाधि स्थल (burial ground) थे।
- वे राजवंशियों (रॉयल) और अभिजातों (नोबल) के युद्धाभ्यास केंद्र (battle drill centres) थे।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
उत्तर और पूरी व्याख्या
मोइदाम क्या हैं?
चराइदेव के मोइदाम ताई-अहोम शासकों की राजकीय समाधि-टीला परंपरा हैं। इनमें ईंट, पत्थर या मिट्टी से बने कक्षों पर मिट्टी के टीले निर्मित किए जाते थे और इनमें राजाओं तथा अन्य राजकीय व्यक्तियों के अवशेष व समाधि-सामग्री रखी जाती थी।
तात्या टोपे (Tatya Tope) के अंतिम संघर्ष और शहादत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे ने लगभग एक…
तात्या टोपे (Tatya Tope) के अंतिम संघर्ष और शहादत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे ने लगभग एक वर्ष तक मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध (Guerilla Warfare) जारी रखा। 2. उनके मित्र नरवर के राजा मानसिंह ने विश्वासघात कर सोते हुए तात्या टोपे को अंग्रेजों के हवाले कर दिया। 3. अप्रैल 1859 में शिवपुरी (मध्य प्रदेश) में एक सैनिक अदालत के फैसले के बाद तात्या टोपे को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। तात्या टोपे ने एक साल तक मध्य भारत के जंगलों में छापामार युद्ध लड़ा। नरवर के राजा मानसिंह के विश्वासघात से वे पकड़े गए और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में उन्हें फांसी दी गई।
तानसेन के बारे में कौन-सा कथन सही नहीं है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- तानसेन नाम/उपाधि के अकबर द्वारा दिए जाने का कथन सही नहीं माना गया।
तिलक की होमरूल लीग की प्रमुख मांगों और प्रचार के तौर-तरीकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तिलक ने 'स्वराज्य' (Swarajya) की मां…
तिलक की होमरूल लीग की प्रमुख मांगों और प्रचार के तौर-तरीकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तिलक ने 'स्वराज्य' (Swarajya) की मांग के साथ-साथ भाषाई आधार पर राज्यों के गठन और मातृभाषा में राष्ट्रीय शिक्षा की वकालत की। 2. तिलक ने अपने प्रसिद्ध समाचार पत्रों 'मराठा' (अंग्रेजी) और 'केसरी' (मराठी) का उपयोग लीग के विचारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए किया। 3. तिलक ने कहा: 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।' उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। तिलक ने होमरूल को केवल अमूर्त स्वशासन तक सीमित न रखकर उसे भाषाई प्रांतों के गठन और मातृभाषा में शिक्षा से जोड़ा ताकि यह जनसामान्य का आंदोलन बन सके। उन्होंने केसरी और मराठा के जरिए गांवों तक संगठन खड़ा किया।
तिलक को 1908 में 6 वर्ष की सजा दिए जाने के विरोध में भारत में पहली बार किस वर्ग ने व्यापक राजनीतिक हड़ताल की थी?
तिलक को 1908 में 6 वर्ष की सजा दिए जाने के विरोध में भारत में पहली बार किस वर्ग ने व्यापक राजनीतिक हड़ताल की थी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। तिलक को सजा सुनाए जाने पर बंबई के कपड़ा मिल मजदूरों ने 6 दिनों की ऐतिहासिक राजनीतिक हड़ताल की, जो भारतीय मजदूर वर्ग की पहली बड़ी राजनीतिक कार्रवाई थी।
तुगरिल खाँ ने किसके शासनकाल में विद्रोह किया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- बंगाल के तुगरिल खाँ ने बलबन के शासनकाल में विद्रोह किया।
तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885) और बर्मा के अंतिम विलय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन (Lord Duffer…
तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885) और बर्मा के अंतिम विलय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन (Lord Dufferin) ने बर्मा के राजा थिबाव (King Thibaw) के फ्रांसीसी संपर्कों और बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन पर लगाए गए जुर्माने को युद्ध का आधार बनाया। 2. 1 जनवरी 1886 को लॉर्ड डफरिन ने संपूर्ण ऊपरी बर्मा (Upper Burma) का ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य में विलय कर दिया। 3. 1935 के भारत शासन अधिनियम द्वारा बर्मा को भारत के प्रशासनिक नियंत्रण से अलग कर दिया गया (1937 में प्रभावी)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। लॉर्ड डफरिन ने 1885 में ऊपरी बर्मा पर आक्रमण कर राजा थिबाव को बंदी बनाया (रत्नागिरि निर्वासित किया)। 1886 में बर्मा का विलय हुआ और 1935 के अधिनियम से 1937 में बर्मा भारत से अलग हुआ।
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–1818) के आरंभ होने की पृष्ठभूमि और पिंडारियों (Pindaris) के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प…
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–1818) के आरंभ होने की पृष्ठभूमि और पिंडारियों (Pindaris) के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पिंडारी मूलतः मराठा सेनाओं के साथ चलने वाले अनियमित घुड़सवार लुटेरे थे जो मराठों के सहायक के रूप में कार्य करते थे। 2. लॉर्ड हेस्टिंग्स (Lord Hastings) ने पिंडारियों का समूल नाश करने के लिए उत्तरी और दक्षिणी सेनाओं का एक विशाल अभियान चलाया। 3. मराठा सरदारों (पेशवा, भोंसले, होल्कर) ने अंग्रेजों द्वारा मध्य भारत में सेना की इस भारी तैनाती को अपनी संप्रभुता पर अंतिम प्रहार माना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। पिंडारी (जैसे वासिल मुहम्मद, चीतू, करीम खान) मध्य भारत में लूटपाट करते थे। लॉर्ड हेस्टिंग्स ने 1817 में 1,13,000 सैनिकों का विशाल अभियान चलाकर पिंडारियों का दमन किया। इस सैन्य जमावड़े ने मराठा सरदारों को आशंकित कर दिया और तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध छिड़ गया।
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–1818) के प्रमुख युद्धों और मराठा सरदारों की पराजय के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. खड़की (Khirki…
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–1818) के प्रमुख युद्धों और मराठा सरदारों की पराजय के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. खड़की (Khirki) का युद्ध: पेशवा बाजीराव द्वितीय की पराजय 2. सीताबर्डी (Sitabaldi) का युद्ध: नागपुर के अप्पा साहिब भोंसले की पराजय 3. महिदपुर (Mahidpur) का युद्ध: मल्हारराव होल्कर द्वितीय की पराजय उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों युग्म सही सुमेलित हैं। नवंबर 1817 में पूना के पास खड़की में पेशवा पराजित हुआ; सीताबर्डी में अप्पा साहिब भोंसले हारे; और दिसंबर 1817 में महिदपुर में सर थॉमस हिस्लोप ने होल्कर की सेना को निर्णायक रूप से हराया।
तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1790–1792) के तात्कालिक कारण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1790–1792) के तात्कालिक कारण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। 1789 में त्रावणकोर के राजा ने डचों से क्रैंगानोर और जाइकोट्टा के दुर्ग खरीदे, जिन्हें टीपू अपना मानता था। टीपू ने अप्रैल 1790 में त्रावणकोर पर आक्रमण किया। त्रावणकोर अंग्रेजों का मित्र राज्य था, अतः कॉर्नवालिस ने इसे युद्ध का बहाना बनाया।
तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान लॉर्ड कॉर्नवालिस की कूटनीति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कॉर्नवालिस ने मराठों और हैदराबाद क…
तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान लॉर्ड कॉर्नवालिस की कूटनीति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कॉर्नवालिस ने मराठों और हैदराबाद के निज़ाम के साथ एक त्रिगुट संधि की, जिसमें विजित क्षेत्रों को आपस में बांटने का वादा किया गया। 2. कॉर्नवालिस ने स्वयं ब्रिटिश सेना की कमान संभाली और बंगलुरु पर अधिकार करते हुए श्रीरंगपट्टनम का घेरा डाला। 3. 1792 में टीपू सुल्तान को झुकना पड़ा और 'श्रीरंगपट्टनम की संधि' पर हस्ताक्षर करने पड़े। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। कॉर्नवालिस ने मराठों और निज़ाम को मैसूर का क्षेत्र बांटने का प्रलोभन देकर अपनी ओर मिलाया। कॉर्नवालिस ने स्वयं कमान संभालकर बंगलुरु जीता और श्रीरंगपट्टनम को घेर लिया, जिससे 1792 में टीपू को संधि करनी पड़ी।